बदायूं के दोहरे हत्याकांड के दूसरे आरोपी जावेद ने गुरुवार को बरेली में आत्मसमर्पण कर दिया जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया।दिल्ली सरकार में मंत्री आतिशी ने आज कहा कि सीएम अरविंद केजरीवाल प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में शामिल होना चाहते हैं।प्रधानमंत्री कांग्रेस को आर्थिक रूप से पंगु बनाने का प्रयास कर रहे हैं : सोनिया गांधी,केजरीवाल ईडी की जांच में शामिल होना चाहते हैं, उनकी अपील दंडात्मक कार्रवाई के खिलाफ है: आतिशी,बदायूं के दोहरे हत्याकांड का दूसरा आरोपी जावेद गिरफ्तार, पीड़ित पिता ने फांसी देने की मांग की,भारत-अमेरिका संबंध पहले से कहीं अधिक मजबूत: पेंटागन अधिकारी,डॉलर के मुकाबले रुपया 14 पैसे मजबूत होकर 83.05 पर, पाकिस्तान के पूर्व टेस्ट कप्तान और अपने समय के धुरंधर बल्लेबाज सईद अहमद का यहां 86 वर्ष की उम्र में निधन हो गया।

दिल्ली में शाम ढलते ही हाई वोल्टेज ड्रामा शुरू हो गया है। फ्लैग रोड स्थित मुख्यमंत्री निवास पर प्रवर्तन निदेशालय की टीम पहुंची और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से शराब नीति मामले में पूछताछ शुरू कर दी। रात होते ही यह खबर आई की उनकी गिरफ्तारी हो गई है। इसके बाद दिल्ली सरकार के सामने नेतृत्व संकट का सवाल खड़ा हो गया।
देश में लोकसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है और आदर्श आचार संहिता भी लग चुकी है। पहले चरण के नामांकन के लिए अधिसूचना भी जारी हो चुकी है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आदर्श आचार संहिता को लेकर प्रवर्तन निदेशालय के 9वें समन पर दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। राहत नहीं मिली और देर शाम गिरफ्तार हो गए। मुख्यमंत्री के तौर पर वह जेल से दिल्ली की सरकार चलाएंगे। लेकिन इसे लोकसभा चुनाव 2024 का बड़ा टर्न आउट माना जा रहा है। केजरीवाल की गिरफ्तारी को मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस से लेकर भाजपा ने मुद्दा बनाना शुरू कर दिया है।
चर्चा आम हो गई कि मुख्यमंत्री जेल जाते है तो दिल्ली का मुख्यमंत्री कौन होगा। इतना ही नहीं कांग्रेस के साथ गठबंधन पर भी संशय उठने लगा। कांग्रेस ने लोकसभा प्रत्याशियों की सूची भी आई लेकिन उसमें दिल्ली के तीन लोकसभा सीट के उम्मीदवारों के नाम नहीं आए। हालांकि आप ने एक हस्ताक्षर कैंपेन चलाया था, जिसमें 90 प्रतिशत लोगों ने यह कहा था कि जेल से ही मुख्यमंत्री दिल्ली का शासन संभालेंगे।
दिल्ली की सियासत में बड़ा उफान गुरुवार रात को देखने को मिला। भाजपा आम आदमी पार्टी पर पूरी तरह से हमलावर रही। कांग्रेस पार्टी ने चुप्पी साध लिया। उधर, आम आदमी पार्टी के कुछ बड़े नेता अपने मुखिया की गिरफ्तारी के बाद मुखर रहे और यहां तक बोला कि जेल से ही मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल दिल्ली की सत्ता संभालेंगे।
आप के कई विधायक ऊहापोह की स्थिति में रहे कि उन्हें मुख्यमंत्री निवास तक जाना है या नहीं। उन्हें अपने घरों में नजरबंद होने का भी संशय रहा। आम आदमी पार्टी में यह भी चर्चा आम रही कि अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। सूत्रों की माने तो मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन के जेल में होने की वजह से मंत्री आतिशी और सौरभ भारद्वाज ही कद्दावर नेता बनकर उभरे है। वहीं यह भी कयास लगाया जा रहा है कि अरविंद केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल भी सत्ता संभाल सकती है। हालांकि इस स्थिति में आम आदमी पार्टी के कई नेताओं में इस स्थिति में नाराजगी नहीं हो और पार्टी एकजुट रहे इसे लेकर भी सहमति बनानी होगी।
इधर, कांग्रेस पार्टी की चुप्पी से गठबंधन पर भी संशय बना हुआ है। पार्टी को यह भी डर सता रहा है कि अगर भ्रष्टाचार के मामले ज्यादा तेजी से उठते है तो प्रत्याशियों को इसका खामियाजा उठाना पड़ेगा। कार्यकर्ता भी चुनाव में गर्म जोशी के साथ चुनावी समर में नहीं उतरेंगे। गठबंधन से वैसे ही कांग्रेस का एक खेमा काफी नाराज है। दूसरी तरह कांग्रेस की नीति यह भी हो सकती है कि अपने छिटके हुए कैडर को इसी बहाने वापस कांग्रेस के पक्ष में लाया जाए।
चुनौती योग्य नेता, आप के सर्वे की माने तो जेल से ही दिल्ली की सत्ता चलाएंगे केजरीवाल
आम आदमी पार्टी (आप) के सामने अब चुनौती एक योग्य नेता को सामने लाने की है। जो उनकी अनुपस्थिति में दिल्ली में पार्टी और सरकार दोनों को संभाल सके। पूर्व आईआरएस अधिकारी सुनीता केजरीवाल के अलावा आतिशी और सौरभ भारद्वाज की भी दावेदारी हो सकती है। आतिशी दिल्ली सरकार में शिक्षा, वित्त, पीडब्ल्यूडी, राजस्व और सेवाओं सहित सबसे अधिक विभाग हैं। केजरीवाल की करीबी भी माना जाता है। भाजपा पर हमला भी रही है। भारद्वाज दिल्ली मंत्रिमंडल के एक प्रमुख सदस्य हैं, जिनके पास स्वास्थ्य और शहरी विकास सहित कई महत्वपूर्ण विभाग हैं। वह, भी, पार्टी का एक जाना-माना चेहरा हैं, जो अक्सर पार्टी और उसके नेताओं का बचाव करने और केंद्र में भाजपा और उसकी सरकार को राजनीतिक मुद्दों पर जवाबी हमला करने में लगे रहते हैं।
आप नेता कुमार गौतम का कहना है कि पिछले साल दिसंबर में, आप ने एक हस्ताक्षर कैंपेन चलाया गया था। ”मैं भी केजरीवाल” जिसमें लोगों से पूछा गया कि क्या उन्हें दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देना चाहिए या गिरफ्तार होने पर जेल से सरकार चलानी चाहिए। अभियान के दौरान 90 प्रतिशत लोगों की राय थी कि केजरीवाल के पास ही दिल्ली का जनादेश है। चुने हुए मुख्यमंत्री है। वह जेल में रहे है या कही थी, मुख्यमंत्री वहीं रहेंगे। दिल्ली सरकार ने इस बाबत सर्वे भी कराया था तो उसमें भी यही बात निकल कर सामने आई थी कि जेल से ही सत्ता संभालेंगे अरविंद केजरीवाल।
केजरीवाल की गिरफ्तारी का चुनाव में कितना पड़ेगा असर, भाजपा बनाएगी मुद्दा; AAP, विपक्ष भी तैयार
दिल्ली सरकार में मंत्री आतिशी मार्लेना ने केजरीवाल की गिरफ्तारी को राजनीतिक साजिश करार दिया है। उन्होंने कहा कि गिरफ्तारी से साफ है कि ईडी और भाजपा अदालतों का सम्मान नहीं करती। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने इसे गलत और असंवैधानिक करार दिया है। प्रियंका गांधी ने हमला बोलते हुए कहा कि विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस के बैंक खाते फ्रीज कर दिए गए हैं। तमाम राजनीतिक दलों के नेताओं पर ईडी, सीबीआई, आयकर विभाग का लगातार दबाव है। एक मुख्यमंत्री जेल में डलवा दिए गए हैं और दूसरे को जेल ले जाने की तैयारी हो रही है। उन्होंने एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को अपना स्तर इतना नीचे गिराना शोभा नहीं देता।
भाजपा ने केजरीवाल की गिरफ्तारी से सेट किया चुनावी एजेंडा
भाजपा के प्रवक्ता गौरव भाटिया ने आम आदमी पार्टी (आप) के मुखिया अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी को सही और न्याय संगत बताया है। दिल्ली भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा पहले ही कह चुके हैं कि अरविंद केजरीवाल गिरफ्तारी से भाग नहीं सकते। दिल्ली में भाजपा के नेता अरुण शुक्ला का कहना है कि आम आदमी पार्टी का जन्म ईमानदार, जनता के प्रति जवाबदेह पार्टी के रूप में हुआ था। इसके संयोजक और मुख्यमंत्री भ्रष्टाचार के आरोप में जेल जा चुके हैं। इससे बड़ी बात क्या होगी? भाजपा के नेता, प्रवक्ता और केंद्रीय मंत्री दिल्ली शराब घोटाले को लेकर 2023 से ही केजरीवाल की गिरफ्तारी की भविष्यवाणी कर रहे थे। यह भविष्यवाणी से 2022 में भी हो रही थी।
भाजपा के थिंक टैंक से जुड़े एक नेता ने बताया कि केजरीवाल की गिरफ्तारी भ्रष्टाचार पर नकेल कसने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। केंद्रीय जांच एजेंसियां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में निष्पक्षता, दृढ़ता और स्वतंत्रता के साथ दबाव रहित होकर अपना काम कर रही हैं। देश की जनता देख रही है। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भ्रष्टाचार के आरोप में इस्तीफा देना पड़ा, आज वह जेल में हैं। दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया जेल में हैं। आप सांसद संजय सिंह, स्वास्थ्य मंत्री रहे सत्येन्द्र जैन समेत आम आदमी पार्टी के एक दर्जन विधायक गिरफ्तार हो चुके हैं।
भ्रष्टाचारी को खुली छूट नहीं दे सकते….
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जनसभा से लेकर संसद तक भ्रष्टाचार के खिलाफ निरंतर अपनी सरकार की लड़ाई जारी रखने का आह्वान करते रहे हैं। प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई के जरिए भाजपा मोदी सरकार के इकबाल को दोहराने में जुटी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह लगातार कहते हैं कि देश में भ्रष्टाचार में लिप्त या गलत काम करने वालों को डरना चाहिए। भाजपा के चुनाव प्रचार अभियान की रणनीति में प्रमुख भूमिका निभाने वाले प्रोफेशनल ने कहा कि वह मीडिया में बात नहीं कर सकते। लेकिन उन्हें पता है कि देश की जनता में इसका अच्छा संदेश जाएगा। वह कहते हैं कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी के बड़े नेता गिरफ्तार हुए हैं, लेकिन उनकी गिरफ्तारी पर दिल्ली की जनता ने कोई आंदोलन नहीं किया। क्योंकि लोगों को गली नुक्कड़ पर अनगिनत शराब की दुकानें दिख रही हैं और अरविंद केजरीवाल की सरकार ने खुद शराब की नीतियों को वापस भी लिया। शराब की नीति को वापस लेने की जानकारी देश की जनता को भी है। सूत्र का कहना है कि यह एक ऐसा मुद्दा है, जिसमें देश की जनता अरविंद केजरीवाल और उनकी सरकार को माफ नहीं कर सकती।
भाजपा दागी नेताओं को पार्टी में इंट्री कराती है और विरोधियों को ईडी का डर दिखाती…
अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी पर देश भर में हलचल है। हालांकि यह अनुमान था कि वह जल्द गिरफ्तार हो सकते हैं। इस पर कांग्रेस पार्टी की महासचिव ने प्रतिक्रिया दे दी है। समाजवादी पार्टी के संजय लाठर तंज कसते हुए कहते हैं कि भाजपा की वाशिंग मशीन बहुत तेज काम कर रही है। दूसरे दलों पर झूठे आरोप मढ़कर भाजपा उन्हें ईडी, सीबीआई का डर दिखाकर पार्टी ज्वाइन कराती है। जो भाजपा में शामिल हो जाता है, उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती। जो भाजपा के अनुसार नहीं चलता उसे ईडी और सीबीआई गिरफ्तार कर लेती है। विपक्ष में मची हलचल से साफ है कि वह 2024 के लोकसभा चुनाव में ईडी, सीबीआई के दुरुपयोग को अब आक्रामक मुद्दा बनाएगा
भाजपा के खिलाफ वाशिंग मशीन वाला प्रचार कितना चलेगा?
एसपी सिंह समाजशास्त्र के विशेषज्ञ हैं। सिंह का कहना है कि यह तो देखने की बात है कि देश की जनता चुनाव में भाजपा के खिलाफ उसके वाशिंग मशीन वाले प्रचार को कितनी अहमियत देती है। एसपी सिंह कहते हैं कि उन्हें इससे केंद्र की मोदी सरकार को ही फायदा मिलता दिखाई दे रहा है। एसपी सिंह का कहना है कि प्रवर्तन निदेशालय हो या सीबीआई, गिरफ्तार करके आरोपी को अदालत में पेश करते हैं। अदालत में आरोपी जमानत याचिका दायर करता है और उसे जमानत नहीं मिलती। इससे सामान्य जनता में यही संदेश जाता है कि दाल में कुछ काला था। सिंह कहते हैं कि नकारात्मकता समाज में तेजी से जगह बनाती है। दूसरे, जांच एजेंसियों ने जिस किसी पर भी कार्रवाई की है, उनके खिलाफ मामले हैं। हालांकि देश की जनता को पता है कि इस तरह की सभी कार्रवाई विपक्ष के नेताओं के ही खिलाफ हो रही है। यह समाज में सरकार की नैतिकता पर सवाल खड़ा करता है। यही देखने वाली बात होगी कि जनता चुनाव में इस पर मतों के जरिए क्या प्रतिक्रिया देती है।
कड़े इम्तिहान से गुजर रही सपा की प्रयोगशाला, कांग्रेस ही सहारा; अखिलेश के कौशल की परीक्षा

प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी सपा कड़े इम्तिहान के दौर से गुजर रही है। सपा ने 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के कई साथियों को तोड़कर और दूसरे दलों के कई दिग्गज नेताओं को शामिल कर बड़ी हलचल पैदा की थी। पर, सत्ता परिवर्तन का उसका सपना अधूरा ही रहा। अलबत्ता कुछ सीटें जरूर बढ़ीं। वोट शेयर भी बढ़ा। पर, सरकार भाजपा की बनी। करीब एक साल पहले जब सियासी पार्टियां लोकसभा चुनाव की तैयारियां शुरू कर रही थीं, सपा के सहयोगियों-साथियों का साथ छोड़ने का सिलसिला शुरू हो गया। यह सिलसिला लोकसभा चुनाव के एलान के बाद भी जारी है।सपा ने 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के कई साथियों को तोड़कर और दूसरे दलों के कई दिग्गज नेताओं को शामिल कर बड़ी हलचल पैदा की थी। पर, सत्ता परिवर्तन का उसका सपना अधूरा ही रहा।
सपा का साथ पहले सुभासपा और फिर रालोद ने छोड़ा। अब सपा के पीडीए फाॅर्मूले की सबसे मजबूत पैरोकार अपना दल (कमेरावादी) ने अलग चुनाव लड़ने का एलान कर पार्टी की चुनौतियां और बढ़ा दी हैं। खास बात है कि सपा के जिन सहयोगियों ने अब तक साथ छोड़ा है, उनका असर पूरब से पश्चिम तक महसूस होने वाला है। किसी का असर पूरब में ठीकठाक है, तो किसी का पश्चिम में आधार माना जाता है।
लोकसभा चुनाव में फिलहाल सपा के साथ सिर्फ कांग्रेस ही खड़ी नजर आ रही है। सपा-कांग्रेस का 2017 में भी गठबंधन हुआ था, लेकिन उसका खास फायदा नहीं मिला। 2024 में सिर्फ कांग्रेस के सहारे अखिलेश यादव कैसे सफलता की पटकथा लिखेंगे, उनके इस कौशल पर सबकी निगाहें जरूर रहेंगी।
सत्ता से बाहर प्रयोग का विस्तार
- 2014 : जब अकेले लड़े, परिवार के पांच सदस्य जीते
वर्ष 2012 के बाद से ही समाजवादी पार्टी उम्मीद के हिसाब से सियासी सफलता हासिल नहीं कर पा रही है। वर्ष 2014 में सपा ने सभी सीटों (दो कांग्रेस के लिए छोड़ी थीं) पर अकेले लोकसभा चुनाव लड़ा। पांच सीटें जीतीं। सभी परिवार के सदस्य थे। आजमगढ़ में मुलायम सिंह यादव, फिरोजाबाद में अक्षय यादव, बदायूं में धर्मेंद्र यादव, कन्नौज में डिंपल यादव, मैनपुरी में भी मुलायम सिंह यादव जीते। बाद में उपचुनाव में मैनपुरी से तेजप्रताप यादव जीते। पार्टी को 22.20 प्रतिशत वोट मिले।
- 2019: बसपा-रालोद के साथ मिलकर चुनाव लड़े, सीटें पांच ही मिलीं, वोट भी घट गया
वर्ष 2019 में बसपा और रालोद के साथ गठबंधन कर सपा चुनाव लड़ी। गठबंधन को 15 सीटें मिलीं। सपा के हिस्से फिर पांच सीटें ही आईं। मुलायम सिंह यादव मैनपुरी और अखिलेश यादव आजमगढ़ से चुनाव जीते। परिवार के अन्य सदस्य चुनाव हार गए। तीन अन्य सदस्यों में रामपुर से आजम खां, मुरादाबाद से एसटी हसन और संभल से शफीकुर्रहमान बर्क जीते। वोट शेयर घटकर 18.11 फीसदी पर पहुंच गया। सारी मलाई बसपा के हिस्से आई। 2014 में एक भी सीट नहीं जीत सकी बसपा ने 10 सीटों पर कब्जा कर लिया। कुल मिलाकर सपा का प्रयोग उलटा पड़ा।
- 2022 : नए सहयोगी बनाए तो सीटें भी बढ़ीं, वोट शेयर भी बढ़ा
2019 के लोकसभा चुनाव के बाद बसपा ने सपा से गठबंधन तोड़ लिया। अलबत्ता रालोद साथ बना रहा। सपा मुखिया अखिलेश यादव ने 2022 में यूपी की सत्ता में वापसी के लिए ताना-बाना बुनना शुरू किया। नए प्रयोग के तौर पर योगी-01 सरकार में मंत्री रहे ओम प्रकाश राजभर की पार्टी सुभासपा से हाथ मिलाया। वह यहीं नहीं रुके। सरकार में शामिल तीन अन्य मंत्रियों-दारा सिंह चौहान, धर्म सिंह सैनी और स्वामी प्रसाद मौर्य को पार्टी में शामिल कर तहलका मचा दिया। अपना दल कमेरावादी को भी साथ जोड़ा। दूसरे दलों के तत्कालीन कई विधायक भी शामिल हुए थे।
- सपा सत्ता में वापसी तो नहीं कर पाई, लेकिन इस माहौल का तगड़ा फायदा हुआ। 2017 के विधानसभा चुनाव में जब सपा का कांग्रेस से गठबंधन था, तब उसको 47 सीटें और 21.81 फीसदी वोट मिले थे। 2022 के चुनाव में 64 सीटें बढ़ीं और विधायकों की संख्या 111 हो गई। वोट शेयर भी बढ़कर 32.06 प्रतिशत हो गया। सीधे-सीधे 10.24 फीसदी वोट शेयर बढ़ गया।
2024 में 17 वाले प्रयोग की वापसी, छिटकते जा रहे साथी
- ओम प्रकाश राजभर, सुभासपा
विधानसभा चुनाव के बाद राजभर सपा का साथ छोड़कर एनडीए में शामिल हो गए। राजभर समाज को साधने के लिए भाजपा ने न सिर्फ सुभासपा मुखिया ओमप्रकाश को योगी कैबिनेट में दोबारा मंत्री बनाया, बल्कि पंचायतीराज जैसा बड़ा महकमा भी दिया। सुभासपा का एक एमएलसी बनाया और लोकसभा की एक सीट भी दे दी।
- जयंत चौधरी, रालोद
सपा की सबसे मजबूत सहयोगी रहा रालोद भी साथ छोड़ गया। पश्चिमी यूपी की ताकतवर माने जानी वाली पार्टी का छिटकना उस इलाके में सपा के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। रालोद भी एनडीए का हिस्सा हो गया है। न सिर्फ रालोद का एक विधायक योगी कैबिनेट में शामिल हो गया है, बल्कि गठबंधन से एक एमएलसी भी बनवा लिया। दो लोकसभा सीटें भी पार्टी को मिली हैं।
- कृष्णा पटेल, अपना दल (कमेरावादी)
पार्टी की अध्यक्ष कृष्णा पटेल की बड़ी बेटी पल्लवी पटेल समझौते के तहत सपा के सिंबल से विधायक चुनी गई हैं। पीडीए फाॅर्मूले की प्रखर पैरोकार पल्लवी ने पहले राज्यसभा चुनाव में सपा के प्रत्याशी के चयन पर खुलेआम सवाल उठाया, फिर अपनी शर्तों पर वोट दिया। अब पार्टी ने फूलपुर, मिर्जापुर और कौशांबी सुरक्षित सीट से चुनाव लड़ने का एलान कर दिया है। सपा ने भी कोई नरमी दिखाए बगैर मिर्जापुर से प्रत्याशी उतार दिया। स्वामी प्रसाद के बाद कृष्णा पटेल का अलग होना, सपा के पीडीए फाॅर्मूले की ताकत कमजोर होने जैसा माना जा रहा है।
- दारा सिंह चौहान
नोनिया समाज के नेता माने जाते हैं। सपा में महत्व नहीं पाने से बेचैन होकर उन्होंने विधायकी और पार्टी की सदस्यता छोड़ दी। चौहान भाजपा में घर वापसी कर पहले एमएलसी बने और उसके बाद योगी सरकार में फिर से मंत्री भी बन गए।
- स्वामी प्रसाद मौर्य, राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी
सपा में लाने के बाद स्वामी प्रसाद को पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया था। विधानसभा चुनाव हारे तो एमएलसी बनाया गया। समाजवादी पार्टी के पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक फॉर्मूले की तगड़ी पैरोकारी करते रहे हैं। सपा का पद और विधान परिषद की सदस्यता छोड़ कर नया राजनीतिक दल राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी बना चुके हैं।
आम चुनाव में सपा का प्रदर्शन
2014 का लोकसभा चुनाव : 05 सीटें
2019 का लोकसभा चुनाव : 05 सीटें
कुल सीटें : 80
2017 का विधानसभा चुनाव
47 सीटें
2022 का विधानसभा चुनाव
111 सीटें
कुल सीटें : 403
बिना लड़े ही यूपी के रण में आप ने मानी हार, निकाय चुनाव के नतीजे भुना नहीं पाई पार्टी

आम आदमी पार्टी ने 2023 में हुए नगर निकाय चुनावों में अपनी धमक दिखाई। जनता के बीच अच्छी पैठ भी बनाई। नगर निकाय चुनावों में 100 स्थानों पर जीत हासिल करके जमीन पर अपनी बढ़ती पकड़ को साबित भी किया। पर, जनता ने उसपर जो भरोसा जताया, उसको वह आगे नहीं बढ़ा पाई। बहरहाल इसे सियासी मजबूरी कहें या फिर कुछ और, लोकसभा चुनाव में पार्टी को प्रदेश में दूसरों का झंडा उठाने को विवश होना पड़ा है।जनता के बीच अच्छी पैठ भी बनाई। नगर निकाय चुनावों में 100 स्थानों पर जीत हासिल करके जमीन पर अपनी बढ़ती पकड़ को साबित भी किया। पर, जनता ने उसपर जो भरोसा जताया, उसको वह आगे नहीं बढ़ा पाई। बहरहाल इसे सियासी मजबूरी कहें या फिर कुछ और, लोकसभा चुनाव में पार्टी को प्रदेश में दूसरों का झंडा उठाने को विवश होना पड़ा है।
फ्लैशबैक में जाएं तो आम आदमी पार्टी 2014 के लोकसभा चुनाव में मैदान में उतरी थी। तब पार्टी मुखिया अरविंद केजरीवाल भाजपा के पीएम पद के दावेदार नरेंद्र मोदी को चुनौती देने के लिए वाराणसी के चुनावी मैदान में उतरे थे। पैराशूट प्रत्याशी होने के तोहमत के बावजूद केजरीवाल को 2,09,238 वोट मिले। पर, केजरीवाल को मिली शिकस्त के बाद पार्टी 2019 के लोकसभा चुनाव में उतरने की हिम्मत भी नहीं दिखा सकी।
आम आदमी पार्टी ने 2022 के विधानसभा के चुनावों में एक बार फिर अपने दमखम को परखने की कोशिश की। 380 सीटों पर पार्टी ने प्रत्याशी उतारे। पर, इस बार भी उसे कोई कामयाबी तो नहीं मिली, पर उसका संगठन बूथ स्तर तक जरूर पहुंचा। इसका फायदा भी उसे मिला। 2023 के निकाय चुनाव में पार्टी रामपुर, बिजनौर, अलीगढ़ में नगरपालिका अध्यक्ष का चुनाव जीतने में कामयाब रही। नगर निगमों में उसके आठ पार्षद चुने गए, नगर पालिकाओं में 30 सभासद जीते, उसके 61 नगर पंचायत सदस्य भी चुने गए। यूपी की जमीन पर पकड़ मजबूत बनाने में जुटी पार्टी के लिए यह बड़ी उपलबि्ध थी। किंतु पार्टी उस उत्साह को आगे नहीं बढ़ा पाई।
आप के प्रदेश प्रवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि पदाधिकारी व कार्यकर्ता जिला स्तर पर विपक्षी गठबंधन के प्रत्याशियों को जिताने के लिए प्रचार-प्रसार में लगे हैं। आगे चलकर पार्टी प्रदेश में भी लोकसभा चुनाव लड़ेगी।
एआई पर संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव पर मतदान, सुरक्षा के लिए अमेरिका ने मांगा सभी देशों का समर्थन

संयुक्त राष्ट्र महासभा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर मतदान के लिए तैयार है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शक्तिशाली नई तकनीक सभी देशों को लाभान्वित करे, मानवाधिकारों का सम्मान करे और सुरक्षित, संरक्षित व भरोसेमंद साबित हो। इस प्रस्ताव का प्रायोजक अमेरिका है।यूरोपीय संघ के सांसदों ने 13 मार्च को दुनिया के पहले व्यापक एआई नियमों को अंतिम मंजूरी दे दी है, जो कुछ अंतिम औपचारिकताओं के बाद मई या या जूने तक प्रभावी हो जाएंगी। अमेरिका और चीन सहित दुनिया भर के देश तथा 20 प्रमुख औद्योगिक देशों का समूह भी एआई नियम बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
उसने कहा, उम्मीद है कि विश्व निकाय इसे आम सहमति से अपनाएगा और यूएन के सभी 193 देश इसका समर्थन करेंगे। अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) जेक सुलिवन ने कहा कि यदि प्रस्ताव अपनाया गया तो यह एआई के सुरक्षित उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम होगा। उन्होंने कहा, यह संकल्प एआई के विकास-इस्तेमाल में सिद्धांतों के आधारभूत सेट के लिए वैश्विक समर्थन का प्रतिनिधित्व करेगा। यह जोखिमों का प्रबंधन करते हुए एआई सिस्टम का लाभ उठाने का मार्ग भी प्रशस्त करेगा। मसौदा प्रस्ताव का उद्देश्य अमीर विकसित देशों और गरीब विकासशील देशों के बीच डिजिटल विभाजन को खत्म करना है और यह सुनिश्चित करना है कि एआई पर चर्चा में वे सभी शामिल हों। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना भी है कि विकासशील देशों के पास एआई का लाभ उठाने के लिए तकनीक और क्षमताएं हों, ताकि बीमारियों का पता लगाना, बाढ़ की भविष्यवाणी करना, किसानों व श्रमिकों की मदद आसान हो सके।
एआई एक उभरता क्षेत्र
अमेरिका द्वारा संयुक्त राष्ट्र में लाया जाने वाला प्रस्ताव एआई विकास व उपयोग में तेजी को मान्यता देता है। साथ ही सुरक्षित और भरोसेमंद एआई प्रणालियों पर वैश्विक सहमति की तात्कालिकता पर जोर देता है। यह मानता है कि एआई प्रणालियों का शासन एक उभरता हुआ क्षेत्र है जिसके लिए संभावित शासन दृष्टिकोण पर और चर्चा की आवश्यकता है। मसौदे में एआई को विनियमित करने की जरूरत का समर्थन किया है।
वैश्विक चर्चा के लिए महासभा का रुख किया
यूरोपीय संघ के सांसदों ने 13 मार्च को दुनिया के पहले व्यापक एआई नियमों को अंतिम मंजूरी दे दी है, जो कुछ अंतिम औपचारिकताओं के बाद मई या या जूने तक प्रभावी हो जाएंगी। अमेरिका और चीन सहित दुनिया भर के देश तथा 20 प्रमुख औद्योगिक देशों का समूह भी एआई नियम बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। अमेरिकी एनएसए ने बताया कि अमेरिका ने एआई की तेजी से आगे बढ़ने वाली प्रौद्योगिकी के निहितार्थों को प्रबंधित करने के तरीके पर वास्तव में वैश्विक बातचीत करने के लिए महासभा का रुख किया है।
2030 तक विकास लक्ष्यों में एआई का इस्तेमाल
मसौदा प्रस्ताव के अनुसार, इसका प्रमुख लक्ष्य 2030 के लिए संयुक्त राष्ट्र के बुरी तरह से पिछड़े विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में प्रगति के लिए एआई का इस्तेमाल करना है। इसमें वैश्विक भूख और गरीबी को खत्म करना, दुनिया भर में स्वास्थ्य में सुधार करना, सभी बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण माध्यमिक शिक्षा सुनिश्चित करना और लैंगिक समानता हासिल करना शामिल है।
डूंगरपुर कांड के एक मामले में सपा नेता आजम खान बरी, सुबूतों के अभाव में अदालत का फैसला

पूर्व मंत्री और समाजवादी पार्टी (सपा) नेता आजम खान और सात अन्य को डूंगरपुर घटना से जुड़े एक मामले में गुरुवार को यहां एक एमपी-एमएलए अदालत ने बरी कर दिया। आजम खान के पक्ष के वकील नासिर सुल्तान ने बताया कि एमपी-एमएलए कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विवेक कुमार ने सबूतों के अभाव में आजम और सात अन्य को बरी कर दिया।आजम खान के पक्ष के वकील नासिर सुल्तान ने बताया कि एमपी-एमएलए कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विवेक कुमार ने सबूतों के अभाव में आजम और सात अन्य को बरी कर दिया।
सीपीआरआई छह साल बाद फिर तैयार करेगा आलू का बीज, केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने दी स्वीकृति

देश के पर्वतीय राज्यों के किसानों के लिए राहत भरी खबर है। केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (सीपीआरआई) छह साल बाद फिर से आलू का बीज तैयार करेगा। 2018 में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर की सरकारी फार्मों में सिस्ट नेमाटोड रोग के कारण कुफरी और फागू फार्म में आलू के बीज उत्पादन पर रोक लग गई थी। अच्छी किस्म का बीज न मिलने से देश में आलू उत्पादन भी प्रभावित हुआ। केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने रोग उपचार का दायित्व भी सीपीआरआई को सौंपा। लंबे परीक्षणों के बाद संस्थान ने उपचार खोजा है। मंजूरी मिलने के बाद अब कृषि मंत्रालय ने सीपीआरआई को आलू बीज तैयार करने की स्वीकृति दी है।2018 में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर की सरकारी फार्मों में सिस्ट नेमाटोड रोग के कारण कुफरी और फागू फार्म में आलू के बीज उत्पादन पर रोक लग गई थी।
सीपीआरआई के निदेशक ब्रजेश सिंह ने वीरवार को प्रेसवार्ता में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सीपीआरआई इसी साल से उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, सिक्किम, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश सहित अन्य पर्वतीय राज्यों को कुफरी ज्योति, कुफरी गिरधारी, कुफरी हिमालनी, कुफरी करण आदि किस्मों के आलू का बीज देगा। कुफरी, फागू फार्म के प्रबंधक डॉ. अश्वनी शर्मा ने बताया कि अप्रैल के अंत तक बीज तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। बफर सीड स्टॉक तैयार कर लिया है। 5 हेक्टेयर पर 800 से 1000 क्विंटल आलू तैयार होगा जिसमें से 700 क्विंटल बीज नवंबर से राज्यों को देंगे। इस मौके पर संस्थान के सामाजिक विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डाॅ. आलोक कुमार, डाॅ. जगदेव शर्मा, डाॅ. दिनेश, डाॅ. अश्वनी कुमार शर्मा और डॉ. विनोद कुमार भी मौजूद रहे।
उपचार की विधि
सीपीआरआई के डॉ. संजीव शर्मा और डाॅ. आरती बैरवा ने बताया कि सिस्ट नेमाटोड के उपचार के लिए पहले मिथाइल ब्रोमाइड का प्रयोग किया, इसमें 50 फीसदी तक कामयाबी मिली। फिर सोडियम हाइपोक्लोराइट की मदद से परीक्षण किए, जिसे उपचार के लिए उत्तम पाया गया। प्रोटोकॉल के अनुसार आलू बीज को खुदाई के बाद सोडियम हाइपोक्लोराइट एक प्रकार का ब्लीचिंग एजेंट (2 फीसदी) के घोल में 30 मिनट तक डुबोकर रखने के बाद दो बार पानी से धाेकर छाया वाले क्षेत्र में सुखाने के बाद भंडारण किया जा सकता है। इससे आलू बीज की गुणवत्ता और अंकुरण क्षमता पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ता। घोल 30 मिनट की अवधि के लिए 12 बार उपयोग कर सकते हैं।
सीएम अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार करने की है तैयारी- सौरभ भारद्वाज
आज शाम को ईडी की टीम सीएम केजरीवाल के घर पर पहुंची है। जिसके बाद आप नेता सौरभ भारद्वाज ने कहा कि जिस तरह से पुलिस अंदर है ऐसा लग रहा है कि मुख्यमंत्री के यहां पर रेड मारी गई है। उनके मन में क्या है ये तो मालूम नही है लेकिन ऐसा लग रहा है कि सीएम केजरीवाल को गिरफ्तार करने की पूरी तैयारी है।
सीएम केजरीवाल के घर पहुंची ईडी की टीम, कई ACP रैंक के अधिकारी मौजूद
दिल्ली आबकारी नीति मामले में 9 समन भेजने के बाद आज दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के घर ईडी की टीम पहुंच गई है। ईडी के 7 से आठ अधिकारी उनके घर में मौजूद हैं। बता दें कि आज ही हाईकोर्ट ने अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तारी पर राहत देने से इनकार कर दिया था। जिसके बाद अब ईडी के अधिकारी उनके घर पहुंच गए हैं। हाल ही में केसीआर की बेटी कविता की इस मामले में गिरफ्तारी हुई है।
बीजेपी नेता शाजिया इल्मी ने सीएम केजरीवाल पर साधा निशाना, कहा- जनता जानती है कि ये नाटक क्यों हो रहा है
दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा शराब नीति मामले में सीएम अरविंद केजरीवाल को ईडी की गिरफ्तारी से अंतरिम राहत देने से इनकार करने पर बीजेपी नेता शाजिया इल्मी ने कहा कि सवाल यह है कि अरविंद केजरीवाल क्यों डरते हैं? वह यह भी जानते हैं कि वह पूरी तरह से शामिल हैं और हैं इतने बड़े घोटाले में न केवल दिल्ली जल बोर्ड का बल्कि उस कंपनी का भी हाथ है जिसे उन्होंने टेंडर दिया था। उसमें भी घोटाला है। अरविंद केजरीवाल जानते हैं कि ये सारे घोटाले उनकी निगरानी में हुए हैं और उनके द्वारा, इसीलिए वह डरे हुए हैं और इसीलिए जब समन पेश किया जा रहा है, तो वह बहाने बना रहे हैं उन्हें राहत चाहिए। वे इतने आश्वस्त क्यों हैं कि उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा। वो जानते हैं कि वो इसमें शामिल हैं और इसी डर के कारण वो ऐसा कर रहे हैं। वह सहानुभूति पाना चाहते हैं। उसके दिमाग में क्या चल रहा है? उसे लगता है कि लोग समझ नहीं सकते लेकिन हर कोई जानता है कि यह पूरा नाटक क्यों हो रहा है।
जो हमें देगा चंदा उसे हम धंधा देंगे – कांग्रेस नेता दीपेंद्र हुड्डा
कांग्रेस नेता दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि भाजपा ने वैक्सीन बनाने वाली कंपनी से करोड़ों रुपए का चंदा मिला है। भाजपा एक तरह से चंदा लूट रही है कि जो हमें देगा चंदा उसे हम धंधा देंगे भाजपा का यही नारा है।वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस के बैंक खाते फ्रीज कर रहे हैं।
विपक्ष को चंदा मिला है, बीजेपी ने जबरन वसूली की है- अखिलेश यादव
बैंक अकाउंट सीज होने पर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि (विपक्ष के) खाते फ्रीज किए जा रहे हैं क्योंकि चंदा चोरी में बीजेपी सबसे आगे है ये चंदा भी नहीं है, ये रंगदारी है। देश की जनता आ गई है, पता है कि उन्होंने (बीजेपी) वैक्सीन कंपनियों से भी पैसा वसूला है। विपक्ष को चंदा मिला है, बीजेपी ने जबरन वसूली की है।
बीजेपी पर जमकर बरसीं सोनिया गांधी
कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने भी भारतीय जनता पार्टी पर प्रेस वार्ता में हमला बोला। सोनिया ने कहा कि इलेक्टोरल बॉन्ड का मुद्दा गंभीर है। बीजेपी से कभी कोई टैक्स नहीं मांगा जाता। सोनिया ने कहा कि लोकतंत्र बचा रहे। मुख्य विपक्षी दल के साथ इस तरह का व्यवहार ठीक नहीं है। यह असंवैधानिक और अनैतिक है। हमारे बैंक खातों पर हमला किया गया।
क्या जेल से सरकार चला सकते हैं अरविंद केजरीवाल? जानें क्या कहता है कानून
दिल्ली शराब घोटाला मामले में जांच की आंच के बाद मामला गिरफ्तारी तक पहुंच ही गया। दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल गुरुवार रात को गिरफ्तार हो गए। दिल्ली हाई कोर्ट की तरफ से एजेंसी की तरफ से दंडात्मक कार्रवाई पर रोक से इनकार के बाद केजरीवाल की गिरफ्तारी का रास्ता साफ हो गया था। हालांकि, कोर्ट ने सीएम की गिरफ्तारी को लेकर ईडी से 22 अप्रैल तक जवाब मांगा था। अब सवाल है कि गिरफ्तारी के बाद केजरीवाल मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे या जेल के भीतर से ही सरकार चलाएंगे। आखिर कानून में इस संबंध में क्या प्रावधान है?
क्या है कानूनी प्रावधान
लीगल एक्सपर्ट का कहना है कि गिरफ्तारी पर इस्तीफा देने की कोई बाध्यता नहीं है। कानून के जानकारों का मानना है कि गिरफ्तारी होने को दोष सिद्धि नहीं माना जा सकता है। इस स्थिति में किसी भी मुख्यमंत्री की गिरफ्तारी होने से तुरंत उनका पद नहीं जा सकता है। दूसरी ओर, एक्सपर्ट यह भी कह रहे हैं कि यह देखना होगा कि जेल से सरकार चलाना कितना प्रैक्टिकल होगा। साथ ही लोकतंत्र की परंपराओं के कितना अनुरूप होगा। इसके लिए जेल के नियमों से लेकर तमाम तरह के पहलुओं पर काफी कुछ डिपेंड करेगा। लोकसभा के पूर्व महासचिव और संविधान विशेषज्ञ पी डी टी आचार्य का कहना है कि विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए भी कैबिनेट मीटिंग होती हैं। हालांकि, जहां तक जेल से कैबिनेट मीटिंग या मंत्रियों के साथ मीटिंग का प्रश्न है तो इसके लिए जेल प्रशासन की मंजूरी की आवश्यकता होगी। बिना जेल प्रशासन की मंजूरी से ऐसा संभव नहीं हो सकेगा। ऐसे में यह पूरी तरह से जेल अथॉरिटी पर निर्भर करेगा। ऐसे में अगर मुख्यमंत्री जेल से सरकार चलाना चाहेंगे और जेल अथॉरिटी इसके लिए इजाजत देगी तो ऐसा संभव हो सकता है। इसके साथ ही करप्शन केस में गिरफ्तारी के बाद मुकदमा चलाने के लिए गवर्नर की मंजूरी लेनी होती है। ऐसे में जेल से सरकार चलाने प्रैक्टिकली कितना संभव होगा इसको लेकर दुविधा बरकरार है। ऐसे में काफी कुछ कोर्ट पर निर्भर करेगा।
इस्तीफा देना जरूरी या मजबूरी?
देश की राजनीति में सीएम रहते गिरफ्तार होने वाले अरविंद केजरीवाल पहले मुख्यमंत्री नहीं हैं। हाल ही में झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन की भी गिरफ्तारी हुई है। गिरफ्तारी के बाद हेमंत ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। हेमंत के बाद चंपई सोरेन मुख्यमंत्री बने। तमिलनाडु में जयललिता भी मुख्यमंत्री पद पर रहते गिरफ्तार हुई थीं। उसके बाद ओ पनीरसेल्वम को मुख्यमंत्री बनाया गया था। बिहार में लालू प्रसाद यादव ने गिरफ्तार होने के बाद अपनी पत्नी राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बनाया था। उन्होंने भी गिरफ्तारी के बाद पद से इस्तीफा दे दिया था। तो क्या अब केजरीवाल भी गिरफ्तारी के बाद इस्तीफा देंगे। हालांकि आम आदमी पार्टी ने केजरीवाल के इस्तीफे से इनकार किया है। दिल्ली सरकार में मंत्री आतिशी ने कहा है कि केजरीवाल जेल के भीतर से ही सरकार चलाएंगे। लीगल एक्सपर्ट्स का कहना है कि कुछ मसले बेशक कानूनी अड़चनों से परे हों, लेकिन परंपराओं और नैतिकता का भी सवाल उठेगा।
इस्तीफा ही आखिरी विकल्प?
लीगल एक्सपर्ट और सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट अश्विनी उपाध्याय कहते हैं कि कोई भी मंत्री या मुख्यमंत्री अगर किसी मामले में गिरफ्तार होते हैं और जेल जाते हैं तो भी उन्हें इस्तीफा देने की बाध्यता नहीं है। उपाध्याय के अनुसार पिछले साल उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में एक अर्जी दी थी कि जो मंत्री जेल जाता है, उसे पद से वंचित किया जाना चाहिए, तब सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि रिप्रजेंटेशन ऑफ पीपल्स एक्ट में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो मंत्री को पद से इस्तीफा देना अनिवार्य करता हो। एडवोकेट उपाध्याय का कहना था कि कि कोई सीएम या मंत्री अगर जेल जाता है तो कानूनी तौर पर इस्तीफा देना अनिवार्य नहीं है। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट ज्ञानंत सिंह का कहना है कि एक्ट में सजायाफ्ता को छह साल तक चुनाव लड़ने पर बैन है, लेकिन कोई आरोपी है और जेल में भी है तो वह एमपी और एमएलए का चुनाव लड़ सकता है। जो चुनाव लड़ सकता है, वह जेल में रहते मंत्री भी रह सकता है।




