अग्नि आलोक
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*प्रदेश में सहकारिता चुनाव का बिगुल, चुनाव 5 चरणों में*

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इन्दौर। पूरे प्रदेश में सहकारिता चुनाव का बिगुल बजने के साथ ही अब इस चुनाव की हलचल शुरू हो गई है। राज्य सहकारी निर्वाचन अधिकारी ने सभी जिला कार्यालय से सदस्यता सूची मांग ली है। इसके साथ ही इस चुनाव को पांच चरणों में कराने का ऐलान किया गया है। अग्निबाण ने अपने कल के अंक में ही प्रमुखता के साथ यह समाचार प्रकाशित किया था कि पूरे प्रदेश में सहकारिता चुनाव का बिगुल बज गया है। सरकार की ओर से ग्रीन सिग्नल दिए जाने के बाद सहकारी संस्थाओं के चुनाव कराने के लिए बनाए गए राज्य सहकारी निर्वाचन प्राधिकारी द्वारा कल दो प्रमुख कदम उठाए गए हैं।

पहले कदम के तहत तो सहकारिता विभाग के सभी जिला कार्यालय से इस चुनाव के लिए सदस्यता सूची भेजने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही दूसरे कदम के रूप में यह घोषणा की गई है कि सहकारिता के चुनाव पांच चरणों में कराए जाएंगे। इस चुनाव का पहला चरण 1 मई से शुरू होगा, जो 23 जून को समाप्त होगा। दूसरा चरण 13 मई से 4 जुलाई, तीसरा चरण 23 जून से 22 अगस्त, चौथा चरण 5 जुलाई से 31 अगस्त और पांचवां चरण 14 जुलाई से 7 सितंबर तक होगा। इन पांच चरणों में पूरे प्रदेश की 4500 सरकारी समितियों के चुनाव कराए जाएंगे। इस तरह घोषित किए गए चुनाव कार्यक्रम के अनुसार 7 सितंबर तक चुनाव की यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।

38 जिला बैंक के भी होंगे चुनाव
राज्य सहकारी निर्वाचन प्राधिकारी कार्यालय द्वारा यह स्पष्ट किया गया है कि सरकारी समितियों के चुनाव होने के बाद में राज्य में जिला स्तर पर स्थित 38 जिला सहकारी बैंक के चुनाव कराए जाएंगे। इसके साथ में प्रदेश की एकमात्र अपेक्स बैंक के चुनाव भी होंगे।

भाजपा-कांग्रेस को नहीं है भरोसा कि चुनाव होंगे
इस चुनाव के लिए चाहे सहकारिता विभाग द्वारा तैयारी शुरू कर दी गई हो और चुनाव का कार्यक्रम भी घोषित हो गया हो, लेकिन उसके बावजूद दोनों प्रमुख राजनीतिक दल भाजपा और कांग्रेस को इस बात का भरोसा नहीं है कि यह चुनाव हो सकेंगे। कांग्रेस की ओर से अपेक्स बैंक के पूर्व अध्यक्ष भंवरसिंह शेखावत सरकार की नीयत पर सवालिया निशान लगाते हैं। उनका कहना है कि हाल ही में जो सहकारिता अधिनियम में संशोधन किया गया है उसके अनुसार प्रशासक का कार्यकाल अनंत समय के लिए बढ़ा दिया गया है। ऐसे में सरकार चुनाव कराएगी यह संभव नजर नहीं आता है। इसके साथ ही भाजपा के नेता भी दबी जुबान यह कहने से नहीं चूक रहे हैं कि यह चुनाव होना मुश्किल ही नजर आता है। अब यह तो समय ही बताएगा कि यह चुनाव होते हैं या नहीं।

Ramswaroop Mantri

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