चांदी की कीमतों में आई अचानक भारी गिरावट ने पूरे सराफा बाजार को चौंका दिया है. एक ही दिन में चांदी करीब 1 लाख रुपये टूट गई, जिसे बाजार में ब्लैक फ्राइडे कहा जा रहा है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता और सट्टा कारोबार को इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है. महंगे दामों पर खरीदारी करने वाले निवेशक अब बेचने को मजबूर हो रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि जल्दबाजी से बचें और लंबी अवधि के नजरिए से ही निवेश करें.
लंबे समय से लगातार ऑल टाइम हाई बना रही चांदी ने अचानक ऐसा झटका दिया कि पूरा सराफा बाजार हिल गया. जो चांदी 4 लाख रुपये के पार पहुंच चुकी थी, वह एक ही दिन में करीब 1 लाख रुपये टूटकर सीधे 3 लाख रुपये पर आ गई. हालांकि इसी दिन इसमें करीब 30 हजार रुपये की तेजी भी देखने को मिली, लेकिन तब तक बाजार में हड़कंप मच चुका था. इस तेज गिरावट और उतार-चढ़ाव ने निवेशकों के साथ-साथ सराफा कारोबारियों को भी हैरान कर दिया.
एक दिन में इतिहास की सबसे बड़ी गिरावट
सराफा बाजार में 29 जनवरी को चांदी 4 लाख 10 हजार रुपये पर बंद हुई थी. लेकिन जब बाजार खुला तो दाम सीधे 3 लाख रुपये तक फिसल गए. अगले ही दिन यानी 30 जनवरी को चांदी फिर उछलकर करीब 3 लाख 40 हजार रुपये के आसपास पहुंच गई. करीब 80 हजार रुपये तक की इस भारी गिरावट को बाजार में “चांदी का ब्लैक फ्राइडे” कहा जा रहा है.
क्यों टूटी चांदी? जानिए एक्सपर्ट की राय
सराफा कारोबारी अजय लाहोटिया के मुताबिक चांदी में आई यह बड़ी गिरावट अंतरराष्ट्रीय बाजार की अस्थिरता का नतीजा है. डॉलर और सेंट में नरमी आई, जिसका सीधा असर चांदी की कीमतों पर पड़ा. उनका कहना है कि फिलहाल बाजार में तेजी और मंदी दोनों का माहौल है और यह साफ होने में कुछ दिन लगेंगे कि आगे ट्रेंड किस तरफ जाएगा
महंगे दामों पर खरीदी, अब बेचने की होड़
इस अचानक आई गिरावट की वजह से जिन निवेशकों ने ऊंचे दामों पर चांदी खरीदी थी, वे घबराकर बाजार में बेचने आ रहे हैं. हालांकि कुछ निवेशकों को अच्छा मुनाफा भी हुआ है. लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि जल्दबाजी में फैसला लेना नुकसानदायक हो सकता है. चांदी लंबी अवधि का निवेश है और इसमें धैर्य रखना जरूरी है.
सट्टा और वायदा बाजार ने बढ़ाई हलचल
सराफा बाजार व्यापारी एसोसिएशन के अध्यक्ष हुकुम सोनी का कहना है कि चांदी को लेकर पहले से ही काफी हल्ला मचा हुआ था और बिकवाली बहुत ज्यादा थी. मौजूदा उतार-चढ़ाव की बड़ी वजह सट्टा और वायदा बाजार है. उन्होंने कहा कि इतने सालों में उन्होंने चांदी में इतना तेज उतार-चढ़ाव कभी नहीं देखा. इसका असर सिर्फ निवेशकों पर नहीं, बल्कि सराफा व्यापारियों पर भी पड़ा है.
अब आगे क्या?
हुकुम सोनी के मुताबिक बजट के बाद सोने और चांदी में स्थिरता आने की उम्मीद है. फिलहाल बाजार बेहद संवेदनशील दौर से गुजर रहा है, ऐसे में सोच-समझकर ही निवेश करना बेहतर होगा.





