डॉ. विकास मानव
पृथ्वी शेषनाग के फण पर खड़ी है यह तो एक हास्यपूर्ण कल्पना है, इस कथन पर काल्पनिक तर्क देना इससे भी ज्यादा हास्यपूर्ण है। विज्ञान तो स्पस्ट प्रमाण सहित इसका खंडन करता ही है, वैदिक दर्शन भी प्रमाणन करता है :
*यदा ते मारूतीर्विशस्तुभ्यमिन्द्र नियेमिरे। आदित्ते विश्वा भुवनानि येमिरे.*
~ऋग्वेद (अ०/६/अ०१/व०६/मं४)
*भाष्य :*
हे पूर्वोक्तेन्द्र!यदा ते तव मारूतीर्मारूत्यो मरणधर्माणो मरूत्प्रधाना वा विशः प्रजास्तुभ्यं येमिरे तवाकर्षणधारणनियमं प्राप्नुवन्ति तदैव सर्वाणि विश्वानि भुवनानि स्थितिं लभन्ते। तथा तवैव गुणैर्नियमेरे।आकर्षणनियमं प्राप्वन्ति सन्ति। अत एव सर्वाणि भुवनानि यथाकक्षं भ्रमन्ति वसन्ति च।
*अर्थ :*
हे प्रभो! जिस प्रकार इस विश्व की उत्पत्ति, स्थिति एवं प्रलय आपकी व्यवस्थानुसार घटित होते है, उसी प्रकार तवाकर्षणेन (आपके आकर्षण नियम से धारित होकर आपके गुण और नियम से स्थिति को प्राप्त हो रहे हैं) और सभी सूर्य्य, प्रृथ्वी, ग्रह, नक्षण, तारे यहाँ तक कि वायु भी (स्वकीय) अपनी-अपनी कक्षा (धूरी) पर स्थित है, अर्थात वास कर रहे हैं।
आगे मंत्र ५ मे भी आकर्षण नियम को विस्तार से बताया गया है।
यजुर्वेद (मंत्र ३३, मंत्र ४३) तथा निरूक्त (अ०४/१९/,९/११,१२/२१) मे स्पष्ट रूप से गुरूत्व-आकर्षण नियम के आधार के आधार पर सभी पञ्चमहाभूतों के स्थापन, संचालन की प्रस्थापना बताई गयी है।
एक रोबोट भी निर्धारित सिस्टम से Govern होता है. जब भी कोई आविष्कार होता है तो उसके संचालन,नियमन की प्रक्रिया भी बनाई जाती है। तो इसने बड़े आविष्कार का आविष्कारक यदि नियम नही बनाएगा तो सब आपस मे टकराकर और नष्ट हो जाएंगे यह सामान्य ज्ञान का विषय है।





