*अग्रवाल समाज के चुनाव स्थगित, अब नए सिरे से प्रक्रिया होगी, सिख, पाल, जैन श्वेतांबर ट्रस्ट में भी चुनाव नहीं हो पा रहे*
इंदौर लोगों को जोड़ने, साथ लाने और सेवा के उद्देश्य से बने समाज संगठनों में धीरे-धीरे विवाद हावी हो रहे हैं। सेवा की मिसाल बन्ना चुके इन संगठनों में पद और प्रतिष्ठा की लड़ाई इस स्तर तक पहुंच गई है कि इन्हें सुलझाने के लिए पुलिस और कोर्ट को दखल देनी पड़ रही है। जिन पर समाजजन को संभालने का दारोमदार था, वे खुद विवादों में उलझे हैं। सिख, अग्रवाल, जैन, पाल जैसे हजारों सदस्यों वाले समाजों में विवादों के चलते चुनाव तक नहीं हो पा रहे हैं।
ताजा मामला अग्रवाल समाज केंद्रीय समिति का है, जिसमें चल रही तनातनी से फिलहाल चुनाव ही स्थगित हो गए हैं। अब नए सिरे से चुनाव होंगे। आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है। कई बार मध्यस्थता की कोशिशें हो चुकीं, लेकिन कोई पैनल पीछे हटने को तैयार नहीं। सिख समाज में 12 साल से चुनाव टल रहे हैं। पाल और खंडेलवाल समाज के विवाद का मामला पुलिस थाने तक पहुंच चुका है। श्वेतांबर जैन ट्रस्ट के चुनाव कोर्ट के आदेश के बाद अब करवाए जाएंगे। खंडेलवाल समाज के दो धड़ों में विवाद तो मारपीट तक हो चुकी है।
10 से ज्यादा संस्थाओं में यह स्थिति, इनमें विवाद के ये हैं प्रमुख कारण
अग्रवाल समाज- 11 अगस्त को होने वाले चुनाव स्थगित हो चुके हैं। इसके पीछे बड़ा कारण यह था कि चुनाव नियमानुसार नहीं करवाए जाने की शिकायत रजिस्ट्रार फर्म्स और सोसायटी तक पहुंची थी। इसके बाद सब रजिस्ट्रार ने नियमानुसार चुनाव करवाए जाने का आदेश दिया था।
क्षत्रिय धनगर पाल समाज- पाल समाज ट्रस्ट में चुनाव को लेकर विवाद चल रहा है। एक पक्ष चुनाव करवाने के लिए कह रहा है। इसके बाद जब चुनाव की प्रक्रिया शुरू हुई तो चुनाव के लिए बनी कमेटी को चार्ज नहीं देने पर विवाद हो गया। समाजजन के बीच झूमाझटकी तक हुई। थाने और एसडीएम कोर्ट तक मामला पहुंचा। चुनाव को लेकर विवाद चल रहा है।
श्वेतांबर जैन महासंघ ट्रस्ट- ट्रस्ट में चल रहे विवादों के बीच छह सप्ताह में चुनाव करवाने का आदेश कोर्ट ने जारी किया है। चार नए ट्रस्टी के चुनाव होना हैं। इसे लेकर पूर्व में प्रक्रिया चली थी। हालांकि विवादों के बाद मामला कोर्ट तक पहुंच गया था और चुनाव स्थगित हो गए थे।
खंडेलवाल वैश्य पंचायती सभा-
समाज के दो धड़ों में विवाद बरकरार है। एक बार चुनाव हुए। उसके बाद दूसरे धड़े से जुड़े लोगों ने पूर्व में हुए चुनाव को अवैध करार देते हुए दोबारा चुनाव करवाना चाहा। इस बीच दोनों धड़ों में विवाद हुआ। नौबत मारपीट और थाने तक पहुंची। दोनों पक्षों में जमकर आरोप- प्रत्यारोप हुए।
सिख समाज- सिख समाज की प्रमुख संस्था गुरुसिंघ सभा में 13 साल से अब तक चुनाव नहीं हुए। चुनाव को लेकर प्रक्रिया शुरू हुई, हालांकि फिर आगे बढ़ गए। समाज का यह विवाद अकाल तख्त तक पहुंच गया। चुनाव कब होंगे फिलहाल कुछ भी तय नहीं है। हालांकि समाजजन ने कहा- जल्द चुनाव की प्रक्रिया शुरू होगी।
दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद- यहां विवाद के बाद दो चुनाव हुए। दो अध्यक्ष कार्य भी कर रहे हैं। यह किसी समाज में पहला मौका है जब एक ही संस्था के दो चुनाव हुए हैं और दोनों अध्यक्ष भी अलग हैं। अब यह कार्यकाल खत्म होने वाला है, नए चुनाव होंगे। इस बीच समाज में दोबारा समन्वयक बनाकर एक चुनाव करवाने की कोशिशें भी शुरू हो गई हैं।
आत्मावलोकन जरूरी
• पहले जाति पंचायतों की व्यवस्था थीं। इनमें वरिष्ठजन होते थे, उनका आदर-सम्मान होता था। उनकी कही बात को सभी स्वीकारते थे। इनके चलते न कभी विवाद हुए न ही समाज की बातें बाहर आई। अब कॉम्पीटिशन हावी हो गई है। पद महत्वपूर्ण हो गया है। होड़ होगी तो विवाद होंगे ही। इन्हें दूर करने के लिए आत्मावलोकन जरूरी है। पहले की व्यवस्थाओं पर विचार करें, उन्हें वापस लाएं।





