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चंद्रशेखर:कई विवादास्पद लोगों से रहा नाता

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प्रवीण मल्होत्रा

17 अप्रैल 2026 से किसी समय के युवा तुर्क चंद्रशेखर जी का जन्म शताब्दी वर्ष आरम्भ हो रहा है. 17 अप्रैल 2026 को उनकी 100वीं जयंती समाजवादी साथी ‘समाजवादी समागम’ के बैनर तले मना रहे हैं. उनका जन्म 17 अप्रैल 1927 को उत्तरप्रदेश के बलिया जिले के इब्राहिमपट्टी गांव में हुआ था. वे जयप्रकाश नारायण जी द्वारा निर्मित जनता पार्टी के पहले अध्यक्ष थे और आजीवन अध्यक्षजी ही कहलाये.

इंदिराजी के विरोध के बावजूद उन्होंने कांग्रेस कार्यसमिति का चुनाव जीता था, जो कि कांग्रेस की सर्वोच्च नीति निर्धारण समिति थी. 1989 में वे जनता दल की और से प्रधानमंत्री बनना चाहते थे लेकिन सांसदों का बहुमत उनके साथ नहीं था. जनता दल संसदीय समूह ने चौधरी देवीलाल को अपना नेता चुन लिया था जिन्होंने नेतृत्व का ताज वीपी सिंह के सिर पर रख दिया. इससे चंद्रशेखरजी बहुत कुपित हुए लेकिन कुछ कर नहीं पाए. वे अवसर की तलाश में रहे. वीपी सिंह ने जब मंडल आयोग की सिफारिशों को स्वीकार किया तब राम मंदिर आंदोलन और आडवाणी जी की बिहार में गिरफ्तारी का बहाना बना कर बीजेपी ने वीपी सिंह सरकार से समर्थन वापस ले लिया. अवसर की ताक में बैठे चंद्रशेखर जी अपने साथ 60 सांसदों को लेकर कांग्रेस और राजीव गांधी जी की शरण में चले गए और उनके समर्थन से प्रधानमंत्री बन गए. कांग्रेस ने अतीत में जो व्यवहार चौधरी चरणसिंह के साथ किया था वही व्यवहार चंद्रशेखर जी के साथ भी किया और चार महीने के भीतर ही सरकार से समर्थन वापस लेकर सरकार गिरा दी. इसके बाद चंद्रशेखरजी कभी सत्ता में वापस नहीं लौट पाए. वे अपने अंतिम समय तक अपनी बनायी हुई समाजवादी जनता पार्टी के अध्यक्ष बने रहे और लोकसभा में भी पार्टी के अकेले सांसद रहे. उत्तरप्रदेश के बलिया संसदीय क्षेत्र के मतदाताओं ने उनका सम्मान बनाये रखा और वे वहां से 1984 की इंदिरा लहर के अलावा कभी पराजित नहीं हुए. उनके पुत्र को वहां से वैसी सफलता नहीं मिली. वे बीजेपी में चले गए और मुलायमसिंह जी की समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार से चुनाव हार गए. बीजेपी ने उन्हें राज्यसभा में भी भेजा. चंद्रशेखरजी अक्खड स्वभाव के स्पष्टवादी नेता थे. लेकिन उनकी मित्रता बहुत विवादस्पद व्यक्तियों से रही और उन्होंने अपनी मित्रताओं को कभी छिपाने की कोशिश भी नहीं की. उनकी घनिष्ठता चंन्द्रास्वामी नाम के एक अत्यंत विवादस्पद तांत्रिक से रही जिनका नाम राजीव गांधी हत्याकांड में भी लिया गया था, लेकिन कोई ठोस सबूत नहीं मिला था, जैसे महात्मा गांधी की हत्या में वीडी सावरकर के विरुद्ध नहीं मिला था. चंद्रशेखर जी का एक और अभिन्न मित्र था धनबाद का कुख्यात कोयला माफिया सूर्यदेव सिंह. अनुराग कश्यप में अपनी फिल्म “गैंग्स ऑफ़ वासेपुर” में इस माफिया चरित्र की झलक दिखलाई है. कुल मिलाकर चंद्रशेखर जी ऐसे ही एक विवादस्पद समाजवादी नेता थे.

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