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*कृषि सिंचाई फीडरों का शेड्यूल बदला, रात में बिजली सप्लाई से किसानों में नाराज़गी—विरोध की चेतावनी*

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*इंदौर क्षेत्र में बिजली कंपनी द्वारा ग्रामीण कृषि फीडरों की सप्लाई का शेड्यूल अचानक बदल दिया गया है। पहले किसानों को दिन के समय 10 घंटे निर्बाध बिजली उपलब्ध कराई जा रही थी, लेकिन पिछले कुछ दिनों से नए शेड्यूल के तहत सप्लाई*समय में बड़ा बदलाव कर दिया गया है*।

*नए शेड्यूल के अनुसार बिजली सप्लाई रात 9 बजे से 1 बजे तक, सुबह 5 बजे तथा दिन में 11 बजे से 5 बजे तक दी जा रही है। रात में सप्लाई मिलने से जिलेभर के किसान भारी नाराज़ हैं*।

*किसानों का कहना है कि कड़ाके की ठंड में रात के समय खेतों में जाकर सिंचाई करना बेहद कठिन और असुरक्षित है*।

*बरोदा पंथ के किसान चंदनसिंह बड़वाया शैलेंद्र पटेल नेनोद दिलीप बोरिया सतीश मकवाना प्रवीण ठाकुर अर्जुन सांखला अरशद पटेल सतीश मोर्य बिचोली हप्सी के किसानों सहित कई किसानों ने बताया कि रात में नंगे पैर खेतों में चलना पड़ता है, जिससे कीड़ों-मकोड़ों साफ़ के काटने का खतरा बढ़ जाता है और ठंड से स्वास्थ्य बिगड़ने की संभावना भी रहती है*।

*किसान नेता बबलू जाधव ने कहा कि बिना किसी पूर्व सलाह-मशविरा के कंपनी द्वारा शेड्यूल बदलना किसानों के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि रात में सिंचाई करना न केवल जोखिम भरा है, बल्कि इससे किसानों की सेहत और मेहनत दोनों पर विपरीत असर पड़ता है। उन्होंने मांग की कि मुख्यमंत्री की दिन में 10 घंटे बिजली देने संबंधी घोषणा का तत्काल प्रभाव से पालन किया जाए*।

*किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि बिजली कंपनी ने जल्द ही शेड्यूल में सुधार नहीं किया और कृषि कार्यों के लिए दिन के समय पर्याप्त बिजली सप्लाई बहाल नहीं की, तो वे बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे*।

नाराजगी और विरोध के प्रमुख कारण:
सुरक्षा चिंताएं: रात के समय खेतों में सिंचाई करने से वन्यजीवों के हमले (जैसे जंगली जानवर या सांप) और अंधेरे में बिजली के झटकों या अन्य दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। हाल ही में रतलाम में ऐसी ही एक घटना में एक किसान की मौत भी हुई है।
व्यवहारिक समस्याएं: किसानों को रात के अंधेरे में खेत तक पहुंचने, मोटर चालू करने और पूरी सिंचाई प्रक्रिया की निगरानी करने में काफी परेशानी होती है।
असुविधाजनक समय: दिन के समय बिजली की मांग लंबे समय से किसानों की मुख्य मांगों में से एक रही है, क्योंकि यह सिंचाई के लिए अधिक सुविधाजनक और सुरक्षित है।
अचानक बदलाव: कई मामलों में, बिजली कंपनियों ने किसानों को बिना किसी पूर्व सूचना या परामर्श के बिजली आपूर्ति के समय में बदलाव किया है।
निर्धारित समय सीमा: राज्य सरकार और बिजली कंपनियों ने कृषि फीडरों पर प्रतिदिन 10 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने का संकल्प लिया है, लेकिन शेड्यूल में बदलाव से किसान असंतुष्ट हैं कि दिन के समय पर्याप्त आपूर्ति नहीं मिल रही।
किसानों की मांग और कार्रवाई:
किसान संगठन लगातार सरकार से दिन के समय, अधिमानतः 8 से 10 घंटे, बिजली आपूर्ति बहाल करने की मांग कर रहे हैं। अपनी मांगों को लेकर वे बिजली कार्यालयों का घेराव कर रहे हैं, ज्ञापन सौंप रहे हैं और विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
इस मुद्दे को लेकर भारतीय किसान संघ जैसे संगठन सक्रिय हैं और उन्होंने सरकार के खिलाफ राज्यव्यापी प्रदर्शनों की चेतावनी दी है।

Ramswaroop Mantri

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