न्यूयॉर्क
अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद दुनिया को सबसे ज्यादा फिक्र वहां की महिलाओं और लड़कियों की है। अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और यूरोपियन यूनियन समेत 21 देशों ने अफगानिस्तान में महिला सुरक्षा पर गारंटी मांगी है।इन देशों ने एक संयुक्त बयान जारी कर कहा है कि बीते 20 साल में महिलाओं और बेटियों के अधिकारों की रक्षा की गई, उन्हें पढ़ाई और रोजगार की पूरी आजादी थी। अब इस बात की गारंटी मिलनी चाहिए कि नई सरकार इन्हें जारी रखेगी।
महिलाओं के लिए फिक्रमंद
21 देशों की तरफ से जारी बयान में कहा गया- हम अफगानिस्तान में महिलाओं और लड़कियों को लेकर सबसे ज्यादा फिक्रमंद हैं। वो लोग जो इस वक्त सत्ता में हैं, उन्हें इन महिलाओं और लड़कियों को शिक्षा और रोजगार की आजादी देनी होगी। हम इस मामले में वहां की नई सरकार से गारंटी चाहते हैं।
बयान में आगे कहा गया- महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों की रक्षा के मामले में हम मानवीय आधार पर मदद के लिए तैयार हैं। नई सरकार को यह ध्यान रखना होगा कि हम इस मसले पर करीबी नजर रख रहे हैं। 20 साल में जो अधिकार महिलाओं को दिए गए वे उनके जीवन का सबसे अहम हिस्सा हैं।
ये देश भी शामिल
इस बयान का सीधा सा मतलब यह है कि पश्चिमी देश तालिबान पर महिला अधिकार के मुद्दे पर अभी से दबाव बनाना चाहते हैं। दुनिया के ज्यादातर देश इस बात से चिंतित हैं कि तालिबान कहीं पिछली सरकार की तरह महिलाओं पर अत्याचार करके उन्हें घरों में कैद रहने पर मजबूर न करे।
जिन देशों ने इस बयान पर दस्तखत किए हैं, उनमें अमेरिका और ब्रिटेन के अलावा अल्बानिया, अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चिली, कोलंबिया और ऑस्ट्रेलिया समेत कई छोटे बड़े देश शामिल हैं।
यूरोपीय यूनियन भी अमेरिका के साथ
इस बयान पर यूरोपीय यूनियन के ज्यादातर देशों ने हस्ताक्षर किए हैं। तालिबान ने 15 अगस्त को काबुल पर कब्जा किया था। अभी उनकी हुकूमत ठीक तरह से आकार भी नहीं ले पाई है, इसके पहले ही पश्चिमी देशों ने दबाव बनाना शुरू कर दिया है।
बयान में महिलाओं और बच्चियों के अलावा बाकी सभी अफगान नागरिकों के अधिकारों और आजादी का भी जिक्र है। इसमें कहा गया है- सभी अफगान नागरिकों को सम्मान और सुरक्षा मिलनी चाहिए। किसी भी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए। दुनिया के देश इस मामले में मानवीय आधार पर सहायता देने के लिए तैयार हैं।




