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कांग्रेस और INDIA ब्लॉक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ शीतकालीन सत्र में प्रस्ताव लाने की तैयारी में 

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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस बड़ा कदम उठाने का प्लान कर रही है. सूत्रों का कहना है कि इंडिया ब्लॉक ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए उनके खिलाफ शीतकालीन सत्र में प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है. कांग्रेस ने सहयोगी दलों से इस बाबत चर्चा शुरू की है. इसके जरिए कांग्रेस ने इंडिया ब्लॉक को एकजुट रखने और सत्ता पक्ष को चुनाव आयोग के खड़ा दिखाने का दांव चला है.

सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ संभावित महाभियोग प्रस्ताव पर राजनीतिक दलों के बीच एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है. संसद के पिछले सत्र में इस पर सभी दलों के बीच व्यापक चर्चा हुई थी. अब संसद के शीतकालीन सत्र से पहले यह गंभीर रूप ले चुका है.
‘मशीन घुमाओ – चुनाव चुराओ
कांग्रेस लगातार चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा कर रहा है. कमोबेश हर दिन कांग्रेस चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़ी कर रही है. आज ही एक पोस्ट में कांग्रेस ने लिखा, ‘चुनाव आयोग का खेला, मशीन घुमाओ – चुनाव चुराओ’.वहीं, कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, कुछ लोगों ने चुनाव आयोग की धांधली का पर्दाफाश करने पर राहुल गांधी की निंदा की है.

उन्होंने कहा, 140 करोड़ के देश में यह 272 लोग कितने प्रतिष्ठित हैं. यह तो नहीं पता लेकिन बीजेपी रोजगार एक्सचेंज में आवेदनकर्ता जरूर है. वरना ‘वोट चोरी’ के इतने सारे सबूत देखकर भी आंखों पर पट्टी बांधकर उल्टी बात करने वालों में कोई भी पूर्व चुनाव आयुक्त क्यों नहीं है? पुलिस वाले कानून व्यवस्था पर बात नहीं कर रहे हैं. पूर्व उच्चायुक्त फेल्ड विदेश नीति पर नहीं बोल रहे हैं.

RAW वाले विफल इंटेलिजेंस पर नहीं बोल रहे
कांग्रेस नेता ने कहा, RAW वाले पहलगाम से लेकर दिल्ली बम ब्लास्ट की विफल इंटेलिजेंस पर नहीं बोल रहे हैं. मगर, सब के सब चुनाव आयोग की पैरवी कर रहे हैं. इन लोगों में से कितनों के अंदर हिम्मत है कि फर्जी पते, फेक आईडी, फर्जी फोटो, एक छोटे से घर में सैकड़ों लोगों के रजिस्टर होने पर सवाल उठाएं?

श्रीनेत ने आगे कहा, इनमें से कितनों के पास यह पूछने की हिम्मत है कि जब बिहार चुनाव के बीच सरकार पैसे बांटती रही, तब चुनाव आयोग मूकदर्शक क्यों बना रहा? इनमें से कितनों के पास हिम्मत है कि बीजेपी के नेताओं के अलग-अलग जगहों पर एक से ज़्यादा वोट डालने पर सवाल उठाएं? असलियत यह है कि 2014 के पहले जिम्मेदार प्रतिष्ठित नागरिक चुनी हुई सरकार से सवाल पूछते थे. आखिर जिसके पास सत्ता संसाधन संस्थाएं हैं – सवाल भी तो उन्हीं से होगा.

Ramswaroop Mantri

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