प्रशासन की इस कार्यवाही से राज्य सरकार के मंत्री ही सहमत नहीं, आखिर क्यों लगा रखी है प्रशासन के अफसरों ने इन बेशकीमती जमीनों पर निगाहें
रामस्वरूप मंत्री
इंदौर। मध्य प्रदेश के कुछ अधिकारियों ने मुख्यमंत्री और सरकार को उसके खाली खजाने को भरने के लिए जो तरीका सुझाया है, वह न केवल प्रदेश में भयंकर बेरोजगारी का कारण बनेगा ,साथ ही यहां से उद्योग और रोजगार के अवसर पैदा होना बंद हो जाएंगे तथा उद्योगपति राज्य से मुंह मोड़ लेंगे। सरकार में बैठे कुछ अधिकारियों ने सरकार को सुझाव दिया है किलीज डीड के उल्लंघन को लेकर उद्योगों सार्वजनिक काम करने वाले संस्थाओं और व्यवसाय करने वाले लोगों से 10 से लेकर 50 साल पूर्व दी गई जमीन छीन ली जाए । उसी के तहत इंदौर के प्रेस कांप्लेक्स, टीसीएस और इंफोसिस जैसी बड़ी कंपनियों व अन्य कई उद्योगों को दी गई जमीन वापस लिए जाने की साजिश रची जा रही है । इसी के साथ कुष्ठ सेवा में जुटी संस्था और ऐसी ही अन्य संस्थाओं को भी वर्षों पूर्व दी गई जमीन से बेदखल करने की साजिश रची गई है, उन्हें नोटिस दिए गए हैं।

गौरतलब है कि इंदौर के प्रशासन ने कुछ दिनों पूर्व देश की प्रमुख आईटी कंपनी टीसीएस और इंफोसिस सहित प्रेस कांप्लेक्स में स्थित अखबार मालिकों के साथ ही कुष्ठ सेवा संस्था सहित अन्य एनजीओ के रूप में समाज सेवा का काम कर रही संस्थाओं को नोटिस देकर उन्हें 30 -40 साल पूर्व दी गई जमीन से बेदखल करने का आदेश दिया है। टीसीएस और इंफोसिस पर आरोप लगाया गया है कि वह समय सीमा में ना तो अपना काम चालू कर पाई है और ना ही लोगों को रोजगार ही उपलब्ध करा पाई है । इसी तरह से प्रेस कांप्लेक्स पर भूखंड धारकों को कहा गया है कि वे अपने भूखंड में प्रेस का संचालन ना करते हुए किराए पर उठा दिया गया है । प्रेस कांप्लेक्स के मामले में एक बात और गौर करने लायक है कि जिस बिल्डिंग में सबसे ज्यादा किराएदार है ।उस बिल्डिंग के मालिक को इसलिए इस बेदखली की कार्यवाही से छोड़ दिया गया है क्योंकि वह वर्तमान सत्ताधारी दल और उसके मात्र संगठन आर एस एस की विचारधारा का है । इस तरह की दोहरी नीति को लेकर सरकार की और प्रशासन की कार्यवाही पर उंगलियां उठाई जा रही है।

बेदखली की इस नोटिस बाजी और कार्यवाही से वर्तमान शिवराज सिंह सरकार के मंत्री ही असहमत नजर आ रहे हैं। गत दिनों शिवराज मंत्रिमंडल के वरिष्ठ मंत्री ओमप्रकाश सकलेचा इंदौर आए थे और उन्होंने टीसीएस और इंफोसिस कंपनी का दौरा भी किया था तब उन्होंने कहा था कि कोरोना काल के चलते निश्चित ही समय सीमा पर काम नहीं हुआ है, लेकिन रोजगार देने वाली यह कंपनियां है और इनसे जमीन छीना जाना ठीक नहीं है। उनका कहना था कि शासन रोजगार देने वाली दोनों बड़ी कंपनियों से जमीन वापस लेकर इनकी इमेज खराब नहीं कर सकती। उन्होंने दोनों कंपनियों की दलीलें भी सुनी और उसके बाद कहा कि कंपनियों से जमीन छीनने से कुछ हासिल नहीं होगा । हमारे बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार कैसे मिले यह हमारा उद्देश है। इसके लिए दोनों कंपनियों को उनके वादे याद दिलाए गए हैं । कंपनियों को अगले 2 साल में वर्तमान संख्या से डेढ़ गुना रोजगार का लक्ष्य दिया गया है । उनकी कुछ जरूरत है। जिसके लिए अगस्त में रोडमैप तैयार करेंगे । मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा दोनों कंपनियों पर सवाल उठाने के बाद में मामला गरमाया है और सकलेचा के इस बयान के बाद उद्योग जगत में चर्चा है की कम से कम कोई तो पॉजिटिव सोच वाला मंत्री है ।

इसी तरह कुष्ठ सेवा संस्था का मामला है संस्था को नंदा नगर स्थित ईएसआई हॉस्पिटल के पास तथा ग्राम मोरोद माचला में 30हेक्टेयर ज्यादा जमीन आवंटित की गई थी। यह जमीन पिछलेे 40 से ज्यादा सालों से इसी संस्था के पास है ,तथा संस्था द्वारा इस पर करीब 100 कुष्ठ रोगियों के लिए आवास बनाए गए हैं साथ ही संस्था का खेती सेे पैदा होने वाला अनाज व अन्य सामान रखने के लिए गोदाम बनाए गए हैं लेकिन नंदा नगर की भूमि पर तो सत्ता दल से जुड़े भू माफियाओं की नजर है वहीं मोरोद मांचला की जमीन को अधिकारी इसलिए छीननाा चाहते कि वह जमीन लेकर वहां पर नई मंडी शुरू की जा सके हालांकि मंडी की की जगह को लेकर व्यापारियों और किसानों को ही आपत्ति है । फिर भी प्रशासन के लोग कुष्ठ सेवा संस्था से यह जमीन छीन ना चाहते हैं और इसके लिए संस्था को बेदखली का नोटिस भी दिया गया है। उसमें भी कहा गया है कि संस्था द्वारा लीज शर्तों का उल्लंघन किया जा रहाा है संस्था को यह जमीन खेती के लिए दी गई थी लेकिन वहां खेती नहींं हो रही है।

संस्था के अध्यक्ष श्रीनिवास सोनी ने बताया कि 5 अगस्त को संस्था को नोटिस दिया गया और 6 अगस्त तक उसका जवाब मांगा गया जोकि संभव नहीं था संस्था की ओर से कलेक्टर से कहा गया है कि प्रदेश के एकमात्र ऐसी संस्था है जो वास्तविक रूप से कुष्ठ रोगियों की सेवा कर रही है आज भी हमारी संस्था के आश्रम में 70 से ज्यादा कुष्ठ रोगी रह रहे हैं साथ ही जो जमीन उपजाऊ है उसमें खेती भी की जा रही है और वही इस आश्रम की आय का एकमात्र साधन है बावजूद इसके प्रशासन बात मानने को तैयार नहीं है लेकिन हम इतनी आसानी से जमीन छोड़ने को तैयार नहीं है बल्कि हमें जो जमीन दी गई है वह मोरम वाली जमीन है और हमने कई बार कलेक्टर से कहा कि आप खनिज विभाग का अधिकारी यहां नियुक्त कर दीजिए और हमें मोरम की खुदाई करने की अनुमति दें ताकि हम इससे होने वाली आय से आश्रम को व्यवस्थित कर सके साथ ही प्रशासन और शासन को भी खनिज शुल्क के रूप में रॉयल्टी के रूप में एक बड़ी राशि का योगदान दे सकें लेकिन आज तक उस पर कोई सुनवाई नहीं हुई है





