मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने इंदौर के दवा बाजार, गीता भवन, जावरा कपाउंड की मेडिकल दुकानों पर छापे मारे और कफ सिरप के सैंपल लिए। जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अलग-अलग टीमें बनाई है। सैंपल को जांच के लिए प्रयोगशाला में भेजा गया है।
मध्य प्रदेश और राजस्थान में कफ सिरप पीने से हुए बच्चों की मौत के बाद प्रदेश सरकार सर्तकता बरत रही है। जिन कफ सिरप के पीने से बच्चों की मौत हुई है। उसे सरकार ने प्रतिबंधित कर दिया है। इंदौर में उस कंपनी का कफ सिरप नहीं मिला, लेकिन दूसरे कफ सिरपों को लेकर भी अब विभाग कोई जोखिम नहीं लेना चाहता है।
इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देश पर ड्रग कंट्रोलर विभाग ने कार्रवाई करते हुए दावा बाजार की गुप्ता मेडिकल स्टोर, लक्ष्मी ड्रग हाउस और एक अन्य दुकान पर कार्रवाई करते हुए पचास से अधिक सेंपल जब्त किए।यह कार्रवाई ड्रग इंस्पेक्टर कमल अहिरवार के नेतृत्व में की गई, जिसमें टीम ने अचानक छापामार जांच शुरू की तो दुकानदारों में अफरा-तफरी मच गई।
इंदौर शहर में भी दवा कंपनियों के बड़े डीलर और स्टाकिस्ट है। इंदौर से कई शहरों में दवाएं सप्लाई होती है। प्रशासन ने यह पता लगाया था कि प्रतिबंधित किए गए कफ सिरप का स्टाॅक इंदौर में तो नहीं है, लेकिन यहां वह सिरप नहीं आया। कलेक्टर ने कहा कि प्रतिबंधित ड्रग्स वाला कफ सिरप यदि डाॅक्टरों ने मरीजों को लिखा तो प्रकरण दर्ज किए जाएंगे। सोमवार को विभाग के अफसरों को कहा गया था कि वे दवा की दुकानों पर भी जांच कर यह सुनिश्चित करें कि स्टाॅक में रखे गए कफ सिरप की क्या स्थिति है। इसके बाद विभाग मेडिकल दुकानों पर पहुंचा।
जानकारी के मुताबिक, कई दुकानों पर बिना बिल और बिना बैच नंबर के कफ सीरप रखे पाए गए। अधिकारियों ने संदिग्ध दवाओं के सैंपल लेकर लैब जांच के लिए भेजने की तैयारी की है। अब यह पता लगाया जा रहा है कि कहीं इंदौर बाजार में भी वही घातक कफ सीरप तो नहीं बेचा जा रहा था, जिससे छिंदवाड़ा में बच्चों की जान गई।
ड्रग इंस्पेक्टर कमल अहिरवार ने बताया कि यह कार्रवाई कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देश पर की गई है। जिले में किसी भी सूरत में मिलावटी या प्रतिबंधित कफ सीरप की बिक्री बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिन दुकानदारों की दवाओं में गड़बड़ी पाई जाएगी, उनके खिलाफ एफआईआर की जाएगी।
वहीं ड्रग एंड केमिस्ट एसोसिएशन के उपाध्यक्ष धर्मेंद्र कोठारी का कहना है कि यह कार्रवाई हर महीने की जाती है लेकिन छिंदवाड़ा की घटना के बाद जिला प्रशासन द्वारा शक्ति से यह कार्रवाई की जा रही है जिसका संगठन भी समर्थन कर रही है यदि किसी दवा का सैंपल फेल होता है तो उसे कंपनी पर और दुकानदार पर जिला प्रशासन कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है।





