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हिमाचल में रिवाज बदलेगा या राज, फैसला आज,चंद घंटे में गुजरात में नई सरकार

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हिमाचल प्रदेश की 68 विधानसभा सीटों के आज नतीजे आएंगे। प्रदेश में 37 साल पुरानी परंपरा कायम रहेगी या नया इतिहास बनेगा, ये आज दोपहर तक साफ हो जाएगा। राज्य में 1985 के बाद कोई पार्टी अपनी सरकार रिपीट नहीं कर पाई है। तब कांग्रेस की सरकार थी और मुख्यमंत्री थे वीरभद्र सिंह। इस बार सबकी नजर इसी बात पर है कि क्या पहाड़ पर सरकार बदलने का ट्रेंड जारी रहेगा या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे के सहारे भाजपा इस रिवाज को बदलने में कामयाब रहेगी।

क्या गुजरात में भाजपा लगातार सातवीं बार सरकार बनाकर वाम मोर्चा के सबसे लंबे कार्यकाल के रिकॉर्ड की बराबरी कर लेगी? या कांग्रेस 27 साल के वनवास से वापस लौटेगी… या फिर आप दिल्ली एमसीडी की तरह गुजरात में झाड़ू फेरेगी? इन तीन सवालों के बीच अगले कुछ घंटे गुजरात के साथ देश की राजनीति के लिए भी अहम हैं।

आज यानी गुरुवार को 8 बजे से काउंटिंग की शुरुआत में एक घंटे तक पोस्टल बैलेट की गिनती होगी। इसके बाद आधे से एक घंटे में EVM के शुरुआती आंकड़ों से हार-जीत के रुझान आने लगेंगे। दोपहर 12 बजे तक राज्य में नई सरकार की तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।

11 में से 7 मंत्री कांटे के मुकाबले में फंसे
हिमाचल प्रदेश में हर बार 45 से 75% मंत्रियों के चुनाव हारने का भी ट्रेंड रहा है। इस बार भी जयराम ठाकुर के 11 में से 7 मंत्री कांटे के मुकाबले में फंसे हैं। दो मंत्रियों के तो सीट भी बदले गए। इनमें शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज को शिमला शहरी सीट की जगह कसुम्पटी से और वनमंत्री राकेश पठानिया को कांगड़ा जिले की नूरपुर सीट की जगह फतेहपुर से उतारा गया।

गुजरात की 8 हॉट सीट, इनमें मोदी-शाह और रीवाबा की सीटें

1. जामनगर नॉर्थ: यहां क्रिकेटर रवींद्र जडेजा की पत्नी रीवाबा भाजपा के टिकट पर मैदान में हैं। कांग्रेस से दिग्गज नेता बिपेंद्र सिंह जडेजा और AAP ने कर्सन करमोर चुनाव लड़ रहे हैं। खास बात यह है कि रीवाबा की ननद नयनाबा उनके खिलाफ प्रचार कर रही हैं। वे जामनगर जिला कांग्रेस की महामंत्री हैं। रीवाबा के ससुर अनिरुद्ध जडेजा भी कांग्रेस कैंडिडेट के समर्धन में ही प्रचार कर रहे हैं।

2. मणिनगर (अहमदाबाद): राजकोट-पश्चिम से नरेंद्र मोदी ने 2002 में अपना पहला चुनाव लड़ा था। इसके बाद 2007 और 2012 के चुनाव उन्होंने अहमदाबाद की मणिनगर की सीट से जीते। इस सीट पर पिछले 8 चुनाव से भाजपा का कब्दा है। पार्टी ने यहां से अमूल भट्ट को टिकट दिया है। AAP ने विपुलभाई पटेल और कांग्रेस ने सीएम राजपूत को मैदान में उतारा है।

3. नारणपुरा (अहमदाबाद): अहमदाबाद की नारणपुरा विधानसभा सीट 2008 में हुए परिसीमन के बाद 2012 में अस्तित्व में आई। पहली बार यहां से अमित शाह ने बड़ी जीत दर्ज की थी। इसके बाद 2017 में बीजेपी के कौशिकभाई पटेल ने यह सीट जीती। इस बार भाजपा ने जितेंद्र भाई पटेल को उतारा है। कांग्रेस से सोनल पटेल और AAP से पंकज पटेल मैदान में हैं।

4. घाटलोडिया (अहमदाबाद): गुजरात को दो मुख्यमंत्री (भूपेंद्र पटेल और आनंदीबेन पटेल) देने वाली घाटलोदिया सीट से इस बार राज्य के CM भूपेंद्र पटेल मैदान में हैं। पाटीदार वोटर्स के असर वाली इस सीट पर कांग्रेस ने राज्यसभा सांसद अमी बेन याग्निक को टिकट दिया है। AAP से विजय पटेल चुनाव लड़ रहे हैं।

चुनाव प्रचार के दौरान क्रिकेटर रवींद्र जडेजा के साथ भाजपा कैंडिडेट रीवाबा जडेजा।

चुनाव प्रचार के दौरान क्रिकेटर रवींद्र जडेजा के साथ भाजपा कैंडिडेट रीवाबा जडेजा।

5. वीरमगाम (अहमदाबाद): कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए हार्दिक पटेल वीरमगाम सीट से कैंडिडेट हैं। पिछले दो टर्म से इस सीट पर कांग्रेस का कब्जा है। 2002 और 2007 में यह सीट जीतने वाली कांग्रेस ने पुराने दिग्गज लाखाभाई भारवाड़ को टिकट दिया है। AAP ने अमर सिंह ठाकोर को चुनाव में उतारा है।

6. मोरबी: कांति अमृतिया साल भाजपा के टिकट पर मोरबी से पांच बार जीत चुके हैं। 2017 में उन्हें कांग्रेस के बृजेश मेरजा ने हराया था। चुनाव के बाद मेरजा विधायकी छोड़कर भाजपा में आ गए थे। इस वजह से 2018 में उपचुनाव हुए। इसमें मेरजा ही जीते।
अब भाजपा ने उनका टिकट काटकर एक बार फिर अमृतिया को मैदान में उतारा है। मोरबी पुल हादसे के वक्त वे लोगों की जान बचाने के लिए मच्छू नदी में कूदे थे। कांग्रेस ने जयंति पटेल और AAP ने पंकज रणसरिया को टिकट दिया है।

7. खंभालिया (द्वारका):खंभालिया सीट इसलिए खास है, क्योंकि यहां AAP के CM कैंडिडेट ईशुदान गढ़वी चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा ने मुलुभाई हरदासभाई बेरा और कांग्रेस ने सिटिंग MLA विक्रम माडम को टिकट दिया है। उन्होंने 2017 में भाजपा कैंडिडेट को 11 हजार 46 वोटों से हराया था।
इस सीट पर रोचक बात यह है कि ओवैसी की AIMIM ने भी यहां अपना कैंडिडेट उतारा है। ओवैसी की नजर मछुआरों की मुस्लिम आबादी पर है।

8. बायड (अरावली): यहां से पूर्व मुख्यमंत्री शंकर सिंह वाघेला के बेटे महेंद्र वाघेला मैदान में हैं। महेंद्र सिंह ने 2012 का चुनाव कांग्रेस के टिकट पर जीता था। उन्होंने 2017 का चुनाव नहीं लड़ा था और भाजपा में शामिल हो गए थे। हालांकि, तीन महीने बाद ही वे कांग्रेस में लौट आए थे। यहां भाजपा ने भीखीबेन परमार और AAP ने चुनीभाई पटेल को टिकट दिया है।

इनके अलावा AAP के प्रदेश अध्यक्ष गोपाल इटालिया की सीट कतारगाम (सूरत) और कांग्रेस नेता जिग्नेश मेवाणी वडगाम (बनासकांठा) के चुनाव नतीजों पर भी लोगों की नजर रहेगी। वहीं, सूरत की वराछा से पाटीदार आंदोलन के नेता अल्पेश कथीरिया और वडोदरा की वाघोडिया सीट से भाजपा के बागी मधु श्रीवास्तव के नाम भी चर्चा में हैं।

इस बार 64% वोटिंग, 2017 में 69% मतदान हुआ था
गुजरात में इस बार दोनों फेज को मिलाकर 64.3% वोटिंग हुई। यह पिछली बार के 69.2% से करीब 5% कम है। बीते पांच में से तीन चुनाव में वोट प्रतिशत गिरने पर भाजपा को नुकसान और कांग्रेस को फायदा हुआ है। हालांकि, 2012 के चुनाव में वोटिंग 13% बढ़ी थी इसके बावजूद बीजेपी को दो सीटों का घाटा हुआ था।

पिछले 4 चुनाव में करीब आधे मंत्री हारे

पिछले चार चुनाव का रिकॉर्ड देखें तो हर बार करीब आधे या उससे ज्यादा मंत्री चुनाव हार गए हैं। 2017 के चुनाव में कांग्रेस के CM वीरभद्र सिंह कैबिनेट के 11 में से 5 मंत्री चुनाव हार गए। 2012 में BJP सरकार में CM प्रेम कुमार धूमल के 10 में से 4 मंत्री चुनाव हार गए। 2007 में वीरभद्र सिंह ने एक साल पहले विधानसभा चुनाव कराए लेकिन उनकी कैबिनेट के 10 में से 6 मंत्री अपनी सीट हार गए। इसी तरह 2003 में BJP के CM प्रेम कुमार धूमल की कैबिनेट के 11 में से 6 मंत्री जीत नहीं सके।

2017 में भाजपा के CM फेस धूमल अपने ही चेले से हारे

2017 के चुनाव में प्रेम कुमार धूमल को राजेंद्र सिंह राणा ने करीब 2 हजार वोटों से हरा दिया।

2017 के चुनाव में प्रेम कुमार धूमल को राजेंद्र सिंह राणा ने करीब 2 हजार वोटों से हरा दिया।

2017 के चुनाव में BJP ने 68 में से 44 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया लेकिन उसके मुख्यमंत्री फेस प्रेम कुमार धूमल खुद हार गए। हमीरपुर जिले की सुजानपुर सीट पर धूमल को उन्हीं के ‘हनुमान’ कहे जाने वाले राजेंद्र सिंह राणा ने 1 हजार 919 वोट से हराया। चुनाव से ऐन पहले भाजपा छोड़कर कांग्रेस जॉइन करने वाले राणा का वह पहला विधानसभा चुनाव था। धूमल तब अपनी परंपरागत हमीरपुर सीट छोड़कर सुजानपुर से चुनाव लड़ने उतरे थे। 1984 के बाद धूमल की किसी चुनाव में यह पहली हार थी। धूमल केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के पिता हैं।

Ramswaroop Mantri

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