Site icon अग्नि आलोक

हिरनी बनाम उसका प्रसव बनाम उसके दुश्मन !

Share

जंगल में एक गर्भवती हिरनी बच्चे को जन्म देने को थी वह एकांत जगह की तलाश में घूम रही थी कि उसे नदी किनारे ऊँची और घनी घास दिखी। उसे अपने शिशु को जन्म देने के लिये वह उपयुक्त स्थान लगा,वहां पहुँचते ही उसे प्रसव पीड़ा शुरू हो गयी। उसी समय आसमान में घनघोर बादल वर्षा को आतुर हो उठे और बिजली कड़कने लगी !
उसने दायें देखा तो एक शिकारी तीर का निशाना उस की तरफ साध रहा था ! घबराकर वह दाहिने मुड़ी तो उसने देखा वहां एक भूखा शेर उसपर झपटने को तैयार बैठा था ! सामने सूखी घास आग पकड़ चुकी थी और पीछे मुड़ी तो देखा नदी में बाढ़ जल उसकी तरफ तेजी से बढ़ रहा था !


मादा हिरनी क्या करती ? वह प्रसव पीड़ा से व्याकुल थी। अब क्या होगा ? क्या हिरनी जीवित बचेगी ? क्या वो अपने शावक को जन्म दे पायेगी ? क्या शावक जीवित रहेगा ?
क्या जंगल की आग सब कुछ जला देगी ? क्या मादा हिरनी शिकारी के तीर से बच पायेगी ?क्या मादा हिरनी भूखे शेर का भोजन बनेगी ?
वो एक तरफ आग से घिरी है और पीछे नदी है। क्या करेगी वो ?
हिरनी अपने आप को शून्य में छोड़ अपने बच्चे को जन्म देने में लग गयी। कुदरत का कारिष्मा देखिये। बिजली चमकी और तीर छोडते हुए, शिकारी की आँखे चौंधिया गयीं उसका तीर हिरनी के पास से गुजरते शेर की आँख में जा लगा शेर दहाड़ता हुआ इधर-उधर भागने लगा और शिकारी शेर को घायल ज़ानकर भाग गया। घनघोर बारिश शुरू हो गयी और जंगल की आग बुझ गयी। हिरनी ने शावक को जन्म दिया।
हमारे जीवन में भी कभी -कभी कुछ क्षण ऐसे आते हैं, जब हम चारों तरफ से समस्याओं से घिरे होते हैं और कोई निर्णय नहीं ले पाते। तब सब कुछ नियति के हाथों सौंपकर अपने उत्तरदायित्व व प्राथमिकता पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए।अन्तत: यश, अपयश ,हार ,जीत, जीवन,मृत्यु का अन्तिम निर्णय स्वयं प्रकृति कर देती है। बहुत से लोग इन घटनाओं में कथित भगवान को बीच में ला देते हैं !

संकलन-निर्मल कुमार शर्मा, ‘गौरैया एवम् पर्यावरण संरक्षण तथा देश-विदेश के समाचार पत्र- पत्रिकाओं में पाखंड, अंधविश्वास,राजनैतिक, सामाजिक,आर्थिक,वैज्ञानिक, पर्यावरण आदि सभी विषयों पर बेखौफ,निष्पृह और स्वतंत्र रूप से लेखन ‘, गाजियाबाद, उप्र,

Exit mobile version