भागवत ज्ञानयज्ञ में धूमधाम से मने राम-कृष्ण जन्मोत्सव
इन्दौर हमारी भक्ति निश्छल और निष्काम होना चाहिए। भक्ति दर्शन का विषय है, प्रदर्शन का नहीं। कलयुग में भक्ति के नाम पर प्रदर्शन ज्यादा होने लगे हैं। भक्ति वही सार्थक होगी, जिसमें प्रदर्शन और पाखंड नहीं हों। यदि हमारी भक्ति सच्ची होगी तो भगवान स्वयं दौड़े चले आएंगे। अपने मन के आंगन को हम जिस दिन अयोध्या और वृंदावन बना लेंगे, भगवान राम एवं कृष्ण भी स्वयं वहां आ कर रहने लगेंगे। राम और कृष्ण भारत भूमि के आधार स्तंभ हैं, जिनके बिना हम भारतीय समाज की कल्पना भी नहीं कर सकते ।

यह प्रेरक विचार है प्रख्यात भागवत मनीषी पं. पुष्पानंदन पवन तिवारी के, जो उन्होंने खंडवा रोड स्थित अखंड परमधाम आश्रम पर चल रहे श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव प्रसंग के दौरान व्यक्त किए। कथा में सोमवार को भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। पूरे सभागृह को विशेष रूप से फूलों एवं गुब्बारों से सजाया गया था। जैसे ही नन्हे बालक कृष्ण को वासुदेव (रामबाबू) और देवकी (लक्ष्मी देवी) पुष्पों से श्रृंगारित टोकनी में लेकर कथा स्थल पहुंचे, समूचा सभागृह ज्नंद में आनंद भयो जय कन्हैया लाल की…. हाथी-घोड़ा पालकी जय कन्हैया लाल की. ज… जैसे भजनों पर झूम उठा। माखन मिश्री के प्रसाद वितरण के बीच भक्तों ने भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव का आनंद लिया। इसके पूर्व प्रभु श्रीराम का भी जन्मोत्सव मनाया गया। व्यासपीठ का पूजन विधायक गोलू शुक्ला, रामबाबू अग्रवाल, राजेश अग्रवाल, राजेश बंसल, मनीष अग्रवाल, रत्नेश अग्रवाल, योगेश, आशीष अग्रवाल आदि ने किया।
संयोजक राजेश रामबाबू अग्रवाल ने बताया कि अखंड परमधाम पर भागवत ज्ञान यज्ञ का यह
संगीतमय आयोजन 13 फरवरी तक प्रतिदिन दोपहर 3 से 6.30 बजे तक जारी रहेगा। मंगलवार, 11 फरवरी को कथा में गोवर्धन पूजा एवं 56 भोग का उत्सव मनाया जाएगा । श्रीकृष्ण-रुक्मणी विवाह 12 फरवरी को होगा। पं. तिवारी ने कहा कि धर्म समाज को चैतन्य बनाता है। दुर्लभमानव जीवन का लक्ष्य सत्य के आचरण से ही प्राप्त होगा। सत्य ही धर्म है, धर्म ही सत्य है। कलियुग में प्रदर्शन और पाखंड जैसी विकृतियों से बचने के लिए भागवत का आश्रय लेना होगा। भागवत ग्रंथ और कथा नहीं, एक प्रकाश स्तंभ है, जो अंधकार में जीवन के चौराहे पर भटक रहे मनुष्य को सही राह दिखाने का काम करती है।