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धार के असिस्टेंट इंजीनियर घर 10 घंटे तक चली कार्रवाई 10 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति का खुलासा

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इंदौर

लोकायुक्त ने धार के नगर पालिका के सहायक यंत्री डीके जैन के यहां शनिवार को छापा मारा था। - Dainik Bhaskar

लोकायुक्त की छापेमारी में धार नगर पालिका का सहायक यंत्री (असिस्टेंट इंजीनियर) डीके जैन करोड़पति निकला है। जैन के धार स्थित घर के बाहर खड़ी स्कोडा कार से जमीन रजिस्ट्री के 40 और कई अन्य कागजात मिले हैं। इसके अलावा सोना-चांदी मिलाकर करीब 10 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति की जानकारी मिली है। अब इन सभी प्रॉपर्टियों का सत्यापन करवाया जाएगा। वहीं उसके बैंक खातों और लॉकर की जानकारी जुटाने के लिए लोकायुक्त ने बैंकों को पत्र लिखा है। डीके जैन अगले साल अगस्त में रिटायर्ड होगा। 40 साल की नौकरी में 70 लाख रुपए वेतन बना है। जैन के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति रखने के मामले में केस दर्ज किया गया है। डीके जैन के तीन ठिकानों पर लोकायुक्त ने शनिवार सुबह छापा मारा था।

10 घंटे तक चली कार्रवाई

लोकायुक्त ने धार और इंदौर के तीन ठिकानों पर 10 घंटे तक कार्रवाई की। इस दौरान 10 तोला सोना और धार में तीन हजार स्क्वॉयर फीट का एक मकान मिला। डीके जैन को पहली बार 1995 में धार भेजा गया था। यहां वह 2013 तक रहा। फिर 2013 से 2019 तक राऊ नगर पालिका में रहा। 2019 के बाद फिर से डीके जैन धार आ गया। डीके के पास प्रधानमंत्री आवास योजना, बिल्डिंग परमिशन और कब्जे हटाने जैसे मलाईदार विभाग थे।

जैन के तीन लड़के हैं। दो नौकरी करते हैं। इनमें से एक राजदीप इंदौर में पिछले 5 साल से जमीन का कारोबार कर रहा है। छापेमारी में जमीन के कागजात के अलावा 15 बैंक खाते, 20 बाई 50 का प्लाट, मकान, कार, आधा किलो सोना, एक किलो चांदी, नकदी बरामद की गई है।

धार के नगर पालिका के सहायक यंत्री डीके जैन।

धार के नगर पालिका के सहायक यंत्री डीके जैन।

लोकायुक्त एसपी को मिली थी शिकायत

लोकायुक्त एसपी एसएस सर्राफ को डीके जैन के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति की शिकायत मिली थी, जिसके बाद शनिवार को छापा मारा गया। बताया जा रहा है कि पिछले दिनों बिल्डिंग परमिशन को लेकर डीके जैन की किसी से कहासुनी हो गई थी। माना जा रहा है कि उसी ने लोकायुक्त को शिकायत की है। जैन की 40 साल की नौकरी हो चुकी है। वह मूल रूप से सागर का रहने वाला है।

लोकायुक्त में पहले भी दर्ज हुआ था प्रकरण

सूत्रों की माने तो जैन के घर छापे के बाद अफसर भी शक के घेरे में आ गए हैं। जानकारी के मुताबिक, जब डीके जैन राऊ नगर पालिका में इंजीनियर था, तब भी गड़बड़ी की शिकायत दर्ज हुई थी और 13 लोगों को आरोपी बनाया गया था, जिसमें जैन भी शामिल था। यहां से तबादला होने के बाद उसे फिर धार भेज दिया गया और महत्वपूर्ण विभाग मिल गया, इसलिए उसने आधी नौकरी धार में बिता दी। उनका मासिक वेतन 90 हजार रुपए है।

Ramswaroop Mantri

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