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संशय

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डॉ.राजीव डोगरा

हां मैं लिखता हूं
तुम्हारी मुस्कुराहट में
अपना वजूद लिखता हूं।

हां मैं देखता हूं
तुम्हारी छुपती निगाहों में
अपना अस्तित्व देखता हूं।

हां मैं मुस्कुराता हूं
तुम्हारी स्मृति में खोकर
हृदय तल से मुस्काता हूं।

हां मैं डरता हूं
एक बेनाम रिश्ते को
एक नाम देने से डरता हूं।

डॉ.राजीव डोगरा
कांगड़ा हिमाचल प्रदेश (युवा कवि लेखक)
(हिंदी अध्यापक)
पता-गांव जनयानकड़
पिन कोड -176038
कांगड़ा हिमाचल प्रदेश
rajivdogra1@gmail.com

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