रीवा. मध्यप्रदेश के रीवा जिले गढ़ थाना अंतर्गत ग्राम पंचायत घुचियारी के गांव बहेरा में आज सुबह 1 अगस्त को पांडे परिवार का कच्चा घर भरभरा जाने से वहां सो रहे परिवार के 6 सदस्यों में से 4 सदस्यों की मलबे में दबने से मौत हो गई . मौत का कारण बरसात के कारण कच्चे घर का धसकना बताया जा रहा है . समाजवादी जन परिषद के नेता अजय खरे ने कहा है कि जिले में हजारों की संख्या में अभी भी कच्चे घर हैं लेकिन जिन घरों की मरम्मत हो जाती है , वह गिरते नहीं है
. बताया जाता है कि अत्यंत गरीबी की वजह से पांडे परिवार अपने कच्चे घर की मरम्मत नहीं करवा पा रहा था . पांडे परिवार में कोई व्यक्ति नौकरी में नहीं था . थोड़ी बहुत खेती बाड़ी से किसी तरह गुजर बसर चल रही थी . घर में परिवार के मुखिया स्वर्गीय रामभाऊ पांडे की पत्नी केमली के साथ बेटा मनोज , पुत्रवधु और तीन पौत्रियां रह रहीं थीं . जिसमें पुत्रवधू और उसकी एक बेटी को छोड़कर शेष सभी सदस्य अकाल मौत के मुंह में समा गए . जिला प्रशासन के द्वारा बताया जा रहा है कि कई दिनों से पानी गिर रहा था जिसके कारण कच्चा घर गिर जाने से ये मौतें हो गईं . श्री खरे ने कहा कि दरअसल दुर्घटना के 1 दिन पहले से पानी गिर रहा था लेकिन उस परिवार के पास अपने घर की मरम्मत कराने की व्यवस्था नहीं थी जिसके चलते कच्चा घर अधिक नमी खाकर भरभरा कर गिर गया . मौत के इस भयावह मंजर के बाद कलेक्टर डॉ इलैया राजा टी के द्वारा मौके की नजाकत को देखते हुए प्रत्येक मृतक के हिसाब से ₹400000 देने का एलान किया है . समाजवादी जन परिषद के नेता श्री खरे ने कहा कि यह भारी विडंबना है कि अभाव के जीवन जीने वाले दुर्घटनाग्रस्त परिवार के लिए जिंदा जी प्रधानमंत्री आवास की व्यवस्था तो दूर कच्चे घर की छप्पर छानी ठीक कराने की कुछ हजार रुपए की व्यवस्था भी नहीं हो पाई . आमतौर पर सभी गांव में आज भी कच्चे घर बने हुए हैं लेकिन बरसात के समय उसकी छप्पर छानी की व्यवस्था ठीक हो जाने से रहने वाले लोग सुरक्षित रहते हैं . देश में करोड़ों लोग ऐसे हैं जिनके पास जगह जमीन घर तो है लेकिन आय का कोई ठोस जरिया न होने से उनका जीवन नारकीय बना हुआ है . शासन प्रशासन के लोगों को ऐसे लोगों के बारे में भी सोचना चाहिए . आखिरकार वास्तविकता से बेखबर प्रशासन हादसे का इंतजार क्यों करता है , यह विचारणीय प्रश्न है . वर्ष वर्ष 2003 में भी रीवा के उपरहटी मोहल्ले में इसी तरह से घर गिर जाने से कई लोग मर गए थे . उस समय विपक्ष भाजपा की नेत्री उमा भारती के द्वारा इस बात को मुद्दा बनाकर तत्कालीन कांग्रेस सरकार की तीखी आलोचना की गई थी लेकिन आज प्रदेश में भाजपा की सरकार है यदि आज कोई व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए विरोध का स्वर मुखर करता है तो उस पर चिता पर रोटी सेकने का आरोप शासन प्रशासन की ओर से लगा दिया जाएगा . श्री खरे ने कहा कि देखने में आ रहा है कि इस सवाल पर मुआवजा देकर केवल वाह वाही लूटने का काम हो रहा है . कच्चे घर गिरने से हुई मौतों को महज हादसा बताकर मामले की गंभीरता को कम नहीं किया जा सकता है . उन्होंने कहा कि इस मामले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच होना चाहिए जिससे यह पता चल सके कि मौत का असली कारण गरीबी है जिसके चलते बरसात के समय भी संबंधित परिवार कच्चे घर में रहने को मजबूर था .




