नेशनल हेराल्ड की 64 करोड़ की संपत्ति खाली कराने का लगाया नोटिस
नई दिल्ली । कांग्रेस नेता राहुल गांधीऔर उनकी मां सोनिया गांधीके खिलाफ नेशनल हेराल्ड मामले (में चार्जशीट( पर उठे तूफान के बीच लखनऊ में भी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ा एक्शन लिया है। ईडी ने लखनऊ के कैसरबाग में स्थित नेशनल हेराल्ड से जुड़े एक कामर्शियल काम्पलेक्स को जब्त कर लिया। इसकी कीमत करीब 64 करोड़ रुपये बताई जा रही है। यह कार्रवाई ईडी की दिल्ली टीम ने की है। ईडी ने कार्यालय पर नोटिस चस्पा करते हुए इसे अवैध संपत्ति करार दिया है। यह एक्शन ऐसे मौके पर हुआ है जब ईडी के खिलाफ ही लखनऊ समेत सभी जिला मुख्यालयों पर कांग्रेस का धरना प्रदर्शन हो रहा था।
नेशनल हेराल्ड केस में गांधी परिवार की टेंशन बढ़ने वाली है. क्योंकि चार्जशीट में ईडी ने 661 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त करने की अनुमति मांगी है. जांच के दौरान ईडी ने यह संपत्ति कुर्क की थी. आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय जांच एजेंसी ने चार्जशीट में कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी और राहुल गांधी के बयान भी डाले हैं, जो 2022 में पूछताछ के दौरान दोनों नेताओं ने दर्ज कराए थे.
बताया जाता है कि ईडी की यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 5(1) के तहत की गई है। नोटिस में लिखा गया है कि यह संपत्ति अवैध रूप से अर्जित संपत्ति की श्रेणी में आती है, जिसे ईडी ने जब्त किया है। इस नोटिस पर ईडी के डिप्टी डायरेक्टर नवनीत राणा के हस्ताक्षर हैं और 9 अप्रैल 2025 की तारीख दर्ज की गई है।
इसके साथ ही नेशनल हेराल्ड का लखनऊ कार्यालय बंद कर दिया गया है और पूरे कॉम्प्लेक्स पर ताला लगा दिया गया है। जिस इमारत पर ताला लगा है, वह भी नेशनल हेराल्ड की संपत्ति का हिस्सा है। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई भी ईडी की देशभर में की जा रही उस जांच का हिस्सा है, जो नेशनल हेराल्ड से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में की जा रही है। इससे पहले दिल्ली और महाराष्ट्र में भी इसी तरह की संपत्तियों को अटैच किया जा चुका है। ईडी ने इस मामले से जुड़े आर्थिक लेन-देन की गहन जांच के बाद यह कदम उठाया है। लखनऊ स्थित नेशनल हेराल्ड कार्यालय की संपत्ति को अटैच करने के बाद इस केस में और तेज होती नजर आ रही है।
ईडी ने 9 अप्रैल को राउज एवेन्यू कोर्ट में चार्जशीट दाखिल किया था. इसमें 78 वर्षीय सोनिया गांधी को आरोपी नंबर एक और 54 वर्षीय राहुल गांधी को आरोपी नंबर दो के रूप में नामित किया गया है. इसके अलावा पांच अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया है. सूत्रों के अनुसार, एजेंसी ने सोनिया और राहुल के 2022 में पूछताछ के दौरान दिए गए बयानों को भी आरोपपत्र में जोड़ा है, जिसमें दोनों ने किसी गलत काम से इनकार किया और कहा कि यंग इंडियन द्वारा एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) के अधिग्रहण का मकसद व्यावसायिक लाभ नहीं था.
सूत्रों ने बताया कि ईडी ने पीएमएलए एक्ट के तहत आरोपियों के खिलाफ सजा की मांग की है. साथ ही, नवंबर 2023 में कुर्क की गई 661 करोड़ रुपये की संपत्ति को जब्त करने की अनुमति देने का कोर्ट से अनुरोध किया है. अगर अनुमति मिलती है, तो ये संपत्तियां नीलामी या अन्य प्रक्रिया से सरकारी खजाने में चली जाएंगी. एजेंसी का दावा है कि एजेएल के बहीखाते में 2023 तक 142.67 करोड़ रुपये की किराया आय मिली, जो जांच का हिस्सा है.
गांधी परिवार का क्या जवाब
गांधी परिवार का कहना है कि वे कर्ज में डूबी एजेएल की मदद के लिए आयोजित बैठकों में शामिल थे, और इस मामले को संभालने में मोतीलाल वोरा की मुख्य भूमिका थी. मोतीलाल बोरा 2001-2002 में एजेएल के अध्यक्ष भी रहे. कांग्रेस का कानूनी रुख है कि यंग इंडियन एक धारा-25 कंपनी है, जो व्यावसायिक गतिविधि या शेयरधारकों को व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं बनाई गई. सोनिया और राहुल 38-38% हिस्सेदारी के साथ यंग इंडियन के बहुसंख्यक शेयरधारक हैं. अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 25 अप्रैल के लिए तय की है, जहां वह आरोपपत्र पर संज्ञान ले सकती है या इसे खारिज कर सकती है





