इस धरती के हर प्राणी मसलन एक नन्हीं चींटी से लेकर इस धरती के सबसे विशालकाय स्तनपायी ह्वेल तक को जीने का उतना ही अधिकार है,जितना स्वयंभू कथित तौर पर सबसे बुद्धिमान मानव को ! इसलिए मानव को यह कतई अधिकार नहीं है कि वह निर्धारण करे कि इस धरती पर कौन जीव रहे और कौन न रहे !
-निर्मल कुमार शर्मा, ‘गौरैया एवम् पर्यावरण संरक्षण ‘ ,गाजियाबाद, उप्र