सारिका श्रीवास्तव
मेरी उनसे पहली मुलाकात चिमनबाग स्थित उनके घर पर ही हुई थी। जया मेहता और विनीत तिवारी के साथ। उन्होंने जया से मेरे बारे में पूछा और मेरी तरफ मुखातिब होकर बोले अपना वजन कुछ कम करो।
जब मैं उनसे मिली वे पक्षाघात की गिरफ्त में आ चुके थे और बोलने, चलने-फिरने में असमर्थ हो चुके थे।
लेकिन दरअसल मैं उनसे सही मायने में पहली बार मिली परदेशीपुरा के मिल क्षेत्र की “लाल गल्ली” में। बहुत सारे मेहनतकशों और मजदूरों के बीच जया उन्हें अपनी गाड़ी में लेकर वहाँ पहुँचीं तो लगा जैसे उनके जाने कितने हाथ और कितने पैर हैं जो उन्हें चला रहे हैं। पूरी “लाल गल्ली” उनके पहुँचने के बाद “लाल सलाम”, “इंक़लाब ज़िंदाबाद” के नारों से काफी देर गूँजती रही। लाल सलाम से यह मेरी पहली मुलाकात थी।
मैंने पहली बार उन्हें जाना अपने कॉमरेड्स के चुनाव प्रचार के दौरान। उम्रदराज लोगों से कपड़ा मिल में अपने हक़ों एवं अधिकारों के लिए लड़े गए संघर्षों की कहानियाँ सुनाते समय सूखी, बूढ़ी आंखों में आई तेज चमक के बीच।
मैं उन्हें पहली बार जान पाई कॉमरेड पेरिन दाजी द्वारा लिखी किताब “यादों की रोशनी” के लिए कॉमरेड पेरिन के साथ बहुत सारी तस्वीरों में से चंद तस्वीरों को छाँटने में मदद करते हुए। जिसमें कॉमरेड पेरिन जो तस्वीर हाथ में लेतीं उससे जुड़ा वाकया सुनाने लगतीं। मैं भी मोह संवरण न कर पाती और सुनती रहती। दिन ढल जाता और दिल्ली में छप रही किताब हेतु विनीत को भेजने के लिए कुल जमा एक-दो तस्वीरें ही हाथ में होतीं।
लेकिन देखा जाए तो मैं अभी भी कॉमरेड होमी एफ दाजी से नहीं मिल पाई। उन्हें मिलने के लिए मुझे इंदौर की कपड़ा मिलों के संघर्षों को और अधिक समझना और जानना होगा। जिसकी कोशिश जारी है।
“कॉमरेड होमी एफ दाजी को लाल सलाम”
5 सितम्बर- कॉमरेड होमी एफ दाजी का जन्मदिन
सारिका श्रीवास्तव

