अग्नि आलोक


स्वतंत्रता सेनानी समाजवादी विचारक बद्री विशाल पित्ती

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। 28 मार्च को जन्म जयंती के अवसर पर विशेष।

कैलाश रावत

              अंग्रेज भी यही सोचते थे

             आंदोलन से कुछ नहीं होता

गुलामी के घी से आजादी की घास बेहतर है

                  पराधीन भारत की गुलामी स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में सिकंदराबाद हैदराबाद में व्याप्त निजामशाही सामंती सोच और सामंती विचारधारा बेगारी प्रथा के विरुद्ध लोगों को जोड़कर समाज में नई चेतना लाना और डर भय खत्म करने का हमेशा प्रयास किया सच को सच कहने का मार्ग दिखाया नवाबी दौर में जनसाधारण के साथ हो रहे अत्याचारों के खिलाफ संगठित होकर आंदोलन प्रारंभ किया हालाकी बद्री विशाल पित्ती जी बहुत बड़े उद्योगपति घराने से आते थे उनके पिता राजा पन्नालाल जी पिती निजाम हैदराबाद सरकार में। ऑलरेरी। वित्त परामर्शदाता थे उन्होंने भारतीय सेना के समक्ष  निजामहैदराबाद क समर्पण में प्रमुख भूमिका का निर्वहन किया था पित्ती परिवार इतना संपन्न था कि निजाम हैदराबाद की आर्थिक व कार्य में प्रमुखता रखता था उनके पिततामह राजा मोती लाल को उनके सामाजिक योगदान के कारण राजा बहादुर की उपाधि से अलंकृत किया गया था उनके पितामह राजा बंसीलाल को भी रायबहादुर की उपाधि दी गई इसके अतिरिक्त बंसीलाल को सर। नाइट हूड की उपाधि से ब्रिटिश सरकार ने अंकित किया था लेकिन उन्होंने हमेशा नवाबी बाद नवाबी बाद सामंतवाद पर चोट की स्वतंत्र संग्राम आंदोलन के कारण उन्हें भूमिगत रहना पड़ा और गिरफ्तारी भी हुई

तेलगाना में सांबा दी प्रभाव के विरुद्ध भूमिहीनों किसको की समस्या का निवारण नई तमिल राष्ट्रभाषा हिंदी का प्रचार प्रसार मार्क्सवाद श्रम संघवाद शिर्डी समाजवाद जैसी समाजवादी विचार धाराएं केवल श्रमजीवी वर्ग के हित रोटी रोजी के सिद्धांत का अंश का समर्थन किया प्रत्येक व्यक्ति अपने पैरों से भोजन के उपाय व्यक्ति की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर उत्पादन किया जाए समानता की भावना श्रम की महत्वता एवं आवश्यक वस्तुओं का उत्पादन दोनों को प्रोत्साहन प्राप्त होगा

भारत के समाजवादी चिंतक विचार को में बद्री विशाल पित्ती का विशेष स्थान रहा है उनकी गाणना भारत के प्रमुख समाजवादी बुद्धिजीवी तथा प्रचार को में की जाती है लोहिया जी के गणित समर्थक होते हुए भी बे विचारों से मार्क्सवादी थे वैज्ञानिक समाजवाद के समर्थक थे लोकतांत्रिक समाजवाद के समर्थक भी वर्ग संघर्ष के सिद्धांत के माध्यम से उन्होंने भारत की आर्थिक और सामाजिक समस्याओं का अध्ययन किया कृषकों बुद्धिजीवियों के सहयोग से श्रमिक वर्ग को साम्राज्यवाद विरोधी संघर्ष का अग्रगामी मानते थे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को आर्थिक आधार प्रदान कर उसका सामाजिकरण चाहते थे वे किसानों को समाजवादी विचारधारा से अनुगूणित करना चाहते थे बद्री विशाल जी के ऊपर डॉक्टर लोहिया के व्यक्तित्व का काफी प्रभाव पड़ा स्वतंत्रता का आकाशदीप पित्ती 14 वर्ष की अवस्था में तभी मिल गया जब उन्होंने1942 भारत छोड़ो आंदोलन के अंतर्गत सत्याग्रह का आयोजन किया था

प्रत्येक समाजवादी का नैतिक कर्तव्य होता है कि समाज का शुभ अध्ययन करें यदि समाज में सामाजिक आर्थिक अथवा किसी प्रकार की क्षमता मौजूद है तो वह समाजवाद के रास्ते में बाधक अवश्य बनेगीवास्तु समाजवादी का प्रथम कर्तव्य और उद्देश होता है कि वह वर्तमान समाज में मौजूदा विषमताओं का निराकरण हेतु एक स्वच्छ सौहार्दपूर्ण सामाजिक नीति का प्रतिपादन करें समाजवादी तभी अपने उद्देश्य में सफल हो सकता है वह सामाजिक विषमताओं का निराकरण करने का प्रयास करें जिससे वर्तमान समाज पूर्णरूपेण ग्रस्त है जब तक सामाजिक समानता ओं को समाप्त नहीं किया जाएगा तब तक समाजवाद की कल्पना अपने देश में निर्मूल है आर्थिक प्रणाली पर ही समाज के प्रणालियां आधारित रहते हैं जैसे समाज में आर्थिक संबंध किस प्रकार के होंगे उसी प्रकार अन्य क्षेत्रों के संबंध होंगे समाज कल्याण की नहीं भी संपत्ति का समाजीकरण पर आधारित होती है संपत्ति के प्रयोग में ही नहीं वरन जीवन मूल्यों मैं बताने की संपत्ति का समाजवाद लक्षण हैबद्री विशाल जी समाजवादी गंभीर चिंता कॉल प्रचारक थे समाजवादी आंदोलन को आगे बढ़ाने में उनका विशेष सहयोग था सचिन हुई आबादी थी और उन्होंने समाजवादी चिंतन में प्रमुखता देने का प्रयास किया स्वतंत्रता के महान समर्थक होने के कारण उन्होंने प्रशासनिक केंद्रीकरण की प्रवृत्ति को विकेंद्रीकरण के साथ सामिनवतकरने का आदर्श प्रस्तुत किया

बद्री विशाल पित्ती जी सोशलिस्ट पार्टी और संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी  कके टिकट से बेगमबाजार विधानसभा महाराजगंज विधानसभा क्षेत्र हैदराबाद से आंध्र प्रदेश विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए

29 व्यापार संगठनों के अध्यक्ष थे

श्री पित्ती  जी ने तदुपरांत जिन जीवन मूल्यों के लिए संघर्ष किया समाजवादी आंदोलन को ही उद्देश्य बनाकर सारा जीवन समर्पित कर दिया निजाम हैदराबाद के नवाबी दौर में परिस्थितिया सिर्फ और सिर्फ जी हजूरी के घेरे में थी स्वयं अपने विचारों को व्यक्त किया जाना पूरी तरह असंगत ही नहीं अपराध होता था ऐसी परिस्थितियों में देश की सबसे बड़ी रियासत निजाम हैदराबाद के विरुद्ध मात्र 14 वर्ष की उम्र में आजादी के दीवाने हुए और निजाम हैदराबाद से ईंट से ईंट बजाने के लिए मैदान-ए-जंग में आ गए महान समाजवादी चिंतक विचारक महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पर कजलम चलाना मेरे जैसे व्यक्ति के लिए संभव नहीं है सिर्फ इतना कहूंगा गुलाम भारत निजाम के नवाबी दौर में उनका जीवन उठना बैठना सोना जागना सभी समाजवादी क्रांतिकारी गतिविधियों को समर्पित था डॉ राम मनोहर लोहिया के समाजवादी सिद्धांत और आंदोलन जनता की स्वतंत्रता पर अधिक बल दिया उन्होंने सत्ता को जनसेवा में प्रयुक्त किए जाने के उद्देश्य के साथ साथ व्यक्ति को सवल और स्वावलंबी बनाना आवश्यक माना भी जनता को स्वावलंबी बनाकर अपनी शक्ति के प्रति जागृति करना चाहते थे जनता स्वयं अपने पैरों पर खड़ा होना व्यक्ति अपनी संपूर्ण शक्ति योगिता समाज के हित में प्रयुक्त करें और समाज व्यक्ति के भरण पोषण का दायित्व निभाए समाजवादी विचारधारा आर्थिक समानता के बिना अच्छे समाज की कल्पना निर्थक आवश्यकता अथवा इच्छाओं को बहुगुणित  करने के स्थान पर उसका परिसीमन करना चाहिए ताकि समाज में समन्वय एवं संतोष का वातावरण बने

बद्री विशाल पित्ती का समाजवादी नेता डॉ राम मनोहर लोहिया के संपर्क में आने से क्रांतिकारी  समाजवाद के सोच के व्यक्ति रहे तथा देश के समाजवादी आंदोलन के प्रमुख का आधार स्तंभ है समाजवादी आंदोलन में उनका जलवा था समाजवादी आंदोलन को धनराशि जमा कराने में प्रमुख भूमिका का निर्वहन भी किया डॉ राम मनोहर लोहिया द्वारा प्रकाशित में ।मैंक काइंड जयंती तेलुगु मासिक पत्रिका पोराटम अनेक पत्रिकाओं के संपादक मंडल में रहे हिंदी अंग्रेजी पुस्तकों के प्रकाशन हेतु चेतना नवहिनद  प्रकाशन की स्थापना की14 वर्ष की आयु में उन्होंने सेंट जॉर्ज ग्रामर स्कूल में 1942 भारत छोड़ो आंदोलन के अंतर्गत  समतामूलक समाज की स्थापना कि1947 में आयोजित हैदराबाद स्टेट कांग्रेस प्रथम अधिवेशन में अपने भाषण में हैदराबाद शासन में प्रजातांत्रिक शासन की मांग की जन आंदोलन भी किया हैदराबाद मुक्तिसंग्राम पुलिस एक्शन कि पूर्व भूमिगत संचार। ब्रॉडकास्टिंग। ऐसा संचालित किया बम बनाए स्वतंत्रता सेनानियों के सहयोग से निजाम हैदराबाद शासन के विरोध में बगावत का बिगुल बजाया 1960 में समाजवादी पार्टी द्वारा शुरू किए गए सिविल नाफरमानी आंदोलन में भाग लेकर बंदी बनाए गए और जेल भी गए 

    पिती जी नेडॉ राम मनोहर लोहिया समता न्यास की स्थापना की और उसके प्रबंध न्यासी थे उन्होंने लगभग 50 चित्र इस न्यास को दान दिए जिन्हें विश्व विख्यात चित्रकार एमएफ हुसैन ने बनाया था अनमोल है क्योंकि विश्व की अपने आप में अलग हैं इस न्यास के लिए उनके पिताजी स्वर्गीय पन्नालाल जी ने भवन वा संग्रहालय निर्माण के लिए 12000 गज भूमि दान की थी चंद्रशेखर जी ने भी अपने प्रधानमंत्री काल में लिस्ट को लगभग 800 वर्ग मीटर जमीन वसंत कुंज नई दिल्ली में लाइट की थी जिस पर भवन निर्माण का कार्य चल रहा है

वे अपने परिवार द्वारा संचालित 9 न्यासो के अध्यक्ष व प्रबंध न्यासी थे

28 मार्च 1928 को जन्मे बद्री विशाल पित्ती डॉ राम मनोहर लोहिया से कई स्तरों पर संबंध कई कामों में उनकी सहयोगी रहे आंदोलनों के लिए साधन जुटाए किताबों का प्रकाशन किया डॉक्टर लोहिया कल्पना के लेखक भी रहे डॉक्टर लोहिया के अभिन्न सहयोगी किशन पटनायक राज नारायण मुलायम सिंह यादव रघुवीर सहाय श्रीकांत वर्मा कमलेश्वर डॉक्टर लोहिया और बद्री विशाल जी की मित्र मंडली  मेंकई महान विभूतियां थी

न्यास अपनी स्थापना के बाद से ही सामाजिक गतिविधियां कल्याणकारी कार्यों में प्रतिवर्ष ₹100लाख से अधिक की राशि खर्च करता हैजिसमें लगभग एक लाख व्यक्ति व उनके परिवार लाभान्वित हुए उत्तराखंड में आई प्राकृतिक आपदा के लिए इस न्यास ने अपनी सेवाएं दी इस परियोजना के लिए तीन करोड़ की धनराशि का लक्ष्य निर्धारित किया गया है

राजनीति में बद्री विशाल जी समाजवादी वामपंथी विचारधारा के थे लोहिया जी के बाद मुलायम सिंह यादव के साथ थे लोहिया उनके विशेष प्रिय समाजवादी विचारक थे हैदराबाद रियासत के भारत में विलय के बाद विश्वम समाजवादी विचारधारा से जुड़ गए भारत के समाजवादी आंदोलन की शान और पहचान थी अपने राजनीतिक जीवन में डॉ राम मनोहर लोहिया चौधरी चरण सिंह राजनारायण चंद्रशेखर कृष्णकांत एन संजीव रैडी मधुलिमय  मुलायम सिंह यादव कर्पूरी ठाकुर जनेश्वर मिश्रा जॉर्ज फर्नांडिस किशन पटनायक आदि से व्यक्तिगत परिवारिक संबंध थे सभी राजनेता समय-समय पर सोमाजीगुडा हैदराबाद में उनके घर आते जाते थे

राष्ट्रीय राजनीति में बहुत बड़ा कद होने के कारण कई बार बद्री विशाल पित्ती को राज्यसभा राज्यपाल बनने का 1977 में जनता पार्टी सरकार जनता दल सरकार और चंद्रशेखर की सरकार में दिया गया उन्होंने विनम्रता पूर्वक अस्वीकार कर दिया

       महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी देश के जाने-माने समाजवादी चिंतक विचारक परम सम्मानीय स्वर्गीय बद्री विशाल पित्ती जी शत शत नमन

कैलाश रावत

ग्राम मडिया जिला निवाड़ी मध्य प्रदेश 472336

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