अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

सिंधिया परिवार से छिटक रही ग्वालियर लोकसभा सीट?

Share

ग्वालियर: लोकसभा चुनाव के इतिहास में मध्यप्रदेश की ग्वालियर सीट का एक अलग ही वर्चस्व रहा है। इस सीट ने देश को अधिकांश बड़े नेता दिए हैं। फिर चाहे वो पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेई हों या देश की राजनीति में अलग छाप छोड़ने वाली स्वर्गीय राजमाता सिंधिया। इस सबके बीच एक खास बात यह भी है कि इस सीट का इतिहास कहीं ना कहीं ग्वालियर की राजघराना सिंधिया परिवार के इर्द-गिर घूमता नजर आता है।

अब तक हुए लोकसभा चुनावों में से अधिकांश में इस सीट पर सिंधिया परिवार की दावेदारी देखी गई है। फिर चाहे वह उनके परिवारीजनों के रूप में हो या फिर उनके समर्थकों के रूप में। इस सीट पर सिंधिया परिवार का वर्चस्व ही देखा गया है।

गौरतलब है कि सिंधिया परिवार ने लंबे समय तक ग्वालियर की पृष्ठभूमि पर अपना शासन चलाया है। यह शासन उस समय के हिसाब से काफी विकसित शासन में शुमार था। इस कारण ग्वालियर लोकसभा सीट की जनता का भी सिंधिया परिवार को लेकर एक अलग ही रुझान है। लोगों की मानें तो एक लंबे समय तक उन्होंने महल के नाम पर ही वोट दिए हैं, क्योंकि कहीं ना कहीं उनका विश्वास इस सीट पर और सिंधिया परिवार पर जमा हुआ था।

वर्षविजेतादल
1952वीजी देशपांडेहिंदू महासभा
1952नारायण भास्कर खरेहिंदू महासभा
1957सूरज प्रसादकांग्रेस
1962विजया राजे सिंधियाकांग्रेस
1967रामअवतार शर्माजनसंघ
1971अटल बिहारी बाजपेयीजनसंघ
1977नारायण शेजवलकरजनता पार्टी
1980नारायण शेजवलकरजनता पार्टी
1984माधवराव सिंधियाकांग्रेस
1989कांग्रेस
1991कांग्रेस
1996माधवराव सिंधियामध्य प्रदेश विकास कांग्रेस
1998माधवराव सिंधियाकांग्रेस
1999जयभान सिंह पवैयाबीजेपी
2004रामसेवक सिंहकांग्रेस
2007यशोधरा राजे सिंधियाबीजेपी
2009यशोधरा राजे सिंधियाबीजेपी
2014नरेंद्र सिंह तोमरबीजेपी
2019विवेक शेजवलकरबीजेपी

हालांकि बीते कुछ दशकों में यह मैसेज अब टूटा हुआ नजर आ रहा है। क्योंकि एक लंबे समय से सिंधिया परिवार के लोगों की पकड़ से यह सीट दूर है। हाल ही में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को लेकर कयास लगाए जा रहे थे कि वह इस सीट से चुनाव लड़कर एक बार फिर महल के नाम इस सीट को करेंगे। लेकिन गुना से चुनाव होने की घोषणा के बाद लोगों की यह उम्मीद अभी टूट गई है। ग्वालियर लोकसभा सीट से भरत सिंह कुशवाहा को बीजेपी ने उम्मीदवार बनाया है। कुशवाहा को नरेंद्र सिंह तोमर का करीबी माना जाता है।

इस मामले को लेकर कांग्रेस मीडिया विभाग के प्रदेश उपाध्यक्ष आरपी सिंह का कहना है कि निश्चित ही सिंधिया परिवार ने एक लंबा समय ग्वालियर की जनता के साथ गुजारा है। उनका तालमेल भी काफी अच्छा रहा है। हालांकि लोगों की सोच और विचारधारा अब बदल चुकी है। अब लोग विकास और प्रगति पर अपनी मोहर लगाते हैं।

भाजपा के प्रदेश मंत्री लोकेंद्र पाराशर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहते हैं कि सिंधिया परिवार सदैव से ही एक विकास और दूरगामी सोच रखने वाला परिवार रहा है। ऐसे में लोगों ने उनकी इस सोच का लाभ भी एक लंबे समय तक उठाया है। ग्वालियर में मेट्रो जैसी रेल सुविधा सिंधिया स्टेट के टाइम पर हुआ करती थी। जनता वहीं मोहर लगाती है, जहां उन्हें अपने नेता पर विश्वास होता है और सिंधिया परिवार ने यह विश्वास सदैव कायम रखा है।

Ramswaroop Mantri

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें