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*दंगों में पारंगत नेतृत्व ने क्या अब आतंक की राह पकड़ी है?*

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-सुसंस्कृति परिहार 

कांग्रेस शासन के दौर में जिस तरह देश में अनेकों दंगों का इतिहास मिलता है उसका यदि गंभीर रुप से अध्ययन हो तो यह बात सामने आती है कि इन तमाम दंगों के पीछे एक ऐसे संगठन की भूमिका रही है जो तकरीबन अपने तीन सौ के लगभग अनुषंगी संगठनों के ज़रिए हिंदू मुस्लिम भाईचारा की आग सुलगाता रहा और परस्पर उनके प्यारे रिश्तों में खलल डालता रहा है।इसकी विभीषिका गुजरात नरसंहार में चरम पर देखी गई। बेवजह बाबरी मस्जिद और राम जन्मभूमि विवाद के नाम पर अल्पसंख्यकों के खिलाफ माहौल बनाया गया। इन दोनों घटनाओं से हिंदु वोट का ध्रुवीकरण हुआ और सत्ता का रास्ता आसान हुआ। हालांकि इसके बीज सौ साल पहले बोए गए थे, जो देश के क्रांतिकारियों के खिलाफ, जिनमें  हिंदु-मुस्लिम थे गद्दार संघ ने बोए थे वे अब कीकर बबूल की तरह खड़े हो गए हैं।

आजकल दंगों से आगे बढ़कर अब अपने मुनाफे के लिए आतंक के ज़रिए ज़ोर आजमाईश चल रही है।हम सबने गौर किया होगा कि माबलिंचिंग, लव-जिहाद,बुलडोज़रिंग और सीएए जब उतने असरकारक नहीं हो पाए तो बक्फ़ बिल ले लाए।आए दिन ये ख़ूंख़्वार लोग देश में आतंक फैलाने की जद्दोजहद में लगे हुए हैं किंतु देशवासियों से मिल रही मोहब्बत और संविधान की ताकत से पीड़ित लोग अपने को संभाले हुए हैं।जो देश की सुदृढ़ता और मजबूती को दर्शाता है।

स्मरण रखें, कि ये लोग कश्मीर में अपनी घुसपैठ बढ़ाने 370 की एक धारा को इसलिए ही हटाए ताकि जन्नते कश्मीर की हसीन वादियों को अपना अड्डा बना सकें। उसे इसीलिए केंद्र  सरकार  के अधीन राज्य बनाया गया। ।दो टुकड़े किए गए। ताकि यहां के उत्पाद को अपने अधिकार में लें और वहां का पर्यटन हथिया लें। इसकी कोशिश कश्मीर में अनेक बार आतंकियों के नाम पर घाटी में हत्या कराके दहशत फैलाने में की गई। कारगिल से लेकर पहलगाम तक जब जब कोई हमला हुआ उससे पहले सरकार जी पाकिस्तान या अमेरिका में रहे। जैसे इस बार सउदी अरब में थे। ऐसा हमेशा क्यों हुआ इसके मूल में गहरी साज़िश ही प्रतीत होती है।

जबकि कश्मीरी मुसलमान आतंक के पूरी तरह ख़िलाफ़ हैं वह पर्यटक प्रेमी है क्योंकि उसके रोजगार का बड़ा जरिया यह उद्यम है। अबकी बार जब उस पर हमला कराया गया तो कश्मीरियों के सेवा भाव की तारीफ रोते बिलखते परिवारों ने खुलकर की। हालांकि जो भी वादिए कश्मीर गया है वह उनसे अभिभूत होकर ही लौटा है।इस बार कश्मीरियों की एका ने जो प्रभाव देशवासियों पर छोड़ा है। उससे उन संगठनों के होश गायब हैं जो धर्म पूछकर या कलमा पढ़ने की मनगढ़ंत बात कर रहे थे। इस प्रतिक्रिया से वे छटपटा रहे हैं। वे आतंकियों को खोजने की जगह पाकिस्तानी अवाम को युद्ध और जल रोकने की धमकी दे रहे हैं।जबकि ऐसा कुछ भी होना असंभव है।

पाकिस्तान हो, अमेरिका हो जहां जहां गुजराती आतंकी गैंग के सदस्य बड़े कारोबार कर रहे हैं वहां ऐसी जुर्रत हरगिज नहीं होगी।शो बाजी ज़रूर हो सकती है।देश का समर्थन जो लेना है।

इसलिए यह कहा जा रहा है अदानी अमेरिका के रिश्वत कांड से बरी होने वाला है।उसके मुंद्रा पोर्ट की हैरोइन और बनाए जा रहे आतंकियों की ख़बरें भी दबी ज़ुबान से अब आ रही हैं।अब तो एक भयानक सच भी सामने आया है कि पहलगाम के बैसरन में सेवन स्टार होटल भी इसी गैंग का निर्माणाधीन अंतिम  चरण में है। वहां के तमाम पर्यटन को मार्डनाइज़ करने के लिए ही यह हत्या कांड हुआ है। ताकि कश्मीरियों से उनका यह व्यवसाय छिन जाए और कारपोरेट के हाथ में हो। देश महत्वपूर्ण मंदिरों की तरह कश्मीर के पर्यटन को हथियाने की यह बड़ी साज़िश है।

आज ज़रूरत कश्मीर के साथ खड़े होने की है। लुटते कश्मीर को कारपोरेट के आतंकियों से बचाने की पहल होनी चाहिए।कल को वादिए कश्मीर की हालत गाज़ा जैसी भी हो सकती है।इसे हर हाल में बचाना होगा। संघ और सरकार की इस नीयत को बेनकाब करें।जन्नत को दोजख होने से बचाने  सभी जन आवाज़ बुलंद करें।

Ramswaroop Mantri

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