पूजा (कोटा)
यह लेख चेतना विकास मिशन के डायरेक्टर डॉ. विकास मानव के संवाद पर आधारित है. वे निःशुल्क परामर्श के लिए सर्वसुलभ है. व्हाट्सप्प 9997741245 पर उनसे कभी भी विमर्श किया जा सकता है. हृदय को स्वस्थ रखने में अहम उपायों की चर्चा से पहले, आइए हम हृदय से जुड़ी कुछ विकृतियों को समझ लें :_
धमनी-काठिन्य (एथेरोस्क्लेरासिस) :
इसमें धमनियाँ संकुचित हो जाती हैं एवं इनके लचीलेपन में कमी आ जाती है, विशेषतया माँसाहार, धूम्रपान व कोलेस्टॅराल के कारण ऐसा होता है।
अन्य कारणों में आरामतलब दिनचर्या होने, लाभप्रद कोलेस्टॅराल (हाई डेन्सिटी लिपिड) का स्तर कम होने व बुढ़ापे को गिना जाता है।
एब्डोमिनल एआर्टिक एनियुरिज़्म :
इसमें ‘उदरीय महाधमनी’ (एब्डामिनल एआर्टा) का व्यास सामान्य से 50 प्रतिशत् अधिक हो जाता है।
इसमें प्रायः लक्षण नहीं देखे गये हैं, बस स्फुटन (रप्चर) में ही पता चलता है.
धूम्रपान से यह आशंका बढ़ जाती है। अन्य कारणों में धमनी-काठिन्य, उच्चरक्तचाप, रक्तवाहिका रोग (जिनमें इन वाहिकाओं में सूजन आ जाती है), महाधमनी एआर्टा) में संक्रमण, अभिघात् (किसी वाहन-दुर्घटना इत्यादि में हुआ ट्रामा), तम्बाकू-प्रयोग, घुटने के पीछे अथवा सीने में महाधमनी जैसी किसी अन्य बड़ी रक्तवाहिनी में एन्यूरिज़्म होना सम्मिलित है।
पेरिफ़ेरल आर्टेरियल डिसीस :
इसमें रक्तवाहिनियाँ संकीर्ण हो जाती हैं एवं हाथ-पैरों में रक्तसंचार घट जाता है।
इसमें प्रभावित अंगों की कोशिकाओं व ऊतकों में पर्याप्त आक्सीजन न पहुँच पाने से कभी-कभी उस अंग को काटने की आवश्यकता भी आन पड़ सकती है, इसका भी मुख्य कारण धूम्रपान रहा है।
अन्य कारणों में मधुमेह, मोटापा, उच्चरक्तचाप, बढ़ा कोलेस्टॅराल, ढलती उमर एवं पेरिफ़ेरल आर्टेरियल डिसीस हृदयरोग अथवा स्ट्रोक का पारिवारिक अतीत, होमोसिस्टॅईन के उच्च स्तर सम्मिलित हैं।
स्ट्रोक :
इसमें मस्तिष्क ठीक से कार्य नहीं कर पाता जब मस्तिष्क में रक्त-प्रवाह में विघ्न पड़ जाता है। स्ट्रोक्स से स्थायी मस्तिष्क-क्षति व मृत्यु सम्भव है।
स्ट्रोक्स की आशंका धूम्रपान करने व ऐसे माहौल में रहने इत्यादि हानिप्रद आदतों से बढ़ जाती है। अन्य कारकों में विभिन्न अन्य प्रकारों के स्ट्रोक्स, मद्य व अन्य ड्रग्स व्यसन, अधिक दैहिक भार सम्मिलित हैं।
कोरोनरी हृदयरोग :
इस चिकित्सात्मक स्थिति में हृदयक पेशी में रक्त ले जा रही धमनियों में प्लॅक द्वारा संकुचन हो जाता है अथवा क्लाट्स से ये अवरुद्ध हो जाती हैं। धूम्रपान से शरीर में आये रसायनों से रक्त गाढ़ा होने लगता है एवं शिराओं व धमनियों में स्कन्द (थक्के) जमने लगते हैं।
इन आन्तरिक स्कन्दों से हुए अवरोध से हृदयाघात् एवं आकस्मिक मृत्यु सम्भव है।
कोरोनरी हृदयरोग की ओर ढकेलने वाले अन्य कारकों में उच्चरक्तचाप, मधुमेह अथवा इन्स्युलिन-प्रतिरोध, मदिरापान, बैठे रहने अथवा आराम करने की प्रवृत्ति, तनाव, स्वास्थ्यहर आहार, तोंद व हानिप्रद कोलेस्टॅराल के बढ़े स्तर सम्मिलित हैं।
★हृदय को स्वस्थ रखने हेतु 07 उपाय :
1.
धूम्रपान, मद्यपान व माँसाहार से दूर रहें ।
2.
रुधिर में हानिप्रद कोलेस्टॅराल घटायें :
कोलेस्टॅराल एक प्रकार का वसीय पदार्थ है जो रक्त में एक आवष्यक घटक होता है परन्तु हानिप्रद कालेस्टॅराल हृद्वाहिका-तन्त्र(कार्डियोवॅस्क्युलर-सिस्टॅम) के लिये ठीक नहीं होता एवं हृदयाघात् अथवा स्ट्रोक की आशंका ले आता है।
चाय व गरम मसाले में दालचीनी की छाल डालने से हानिप्रद कोलेस्टॅराल के स्तर को कम रखा जा सकता है। वैसे भी भारत में चाय व गरम मसालों में डाली जाने वाली कई वनस्पतियाँ विभिन्न एंटिआक्सिडेण्ट्स से युक्त होती हैं जो हृदय में मजबूती लाती हैं एवं रक्तशोधन में सहायता करती हैं।
हानिप्रद कोलेस्टॅराल घटाने में लहसुन भी सहायक है। लाभप्रद कोलेस्टॅराल बढ़ाने के लिये खाना बनाने में नारियल व जैतून का तैल प्रयोग में लायें. साबुत अनाज, रेषेदार फलों, फलियों व दालों का सेवन करें।
3.
रक्तचाप-नियन्त्रण :
रक्तचाप ऐसा विषय होता है जिसे हम साधारणतया अनुभव नहीं कर पाते (इस कारण भी सम्बन्धित समस्याएँ बढ़ जाती हैं). विशेष रूप से उच्चरक्तचाप हृदय की सामान्य कार्यप्रणाली में व्यवधान ला देता है।
चक्कर आने, उनींदापन छाये रहने, चलते-चलते फिसल जाने अथवा धड़कनें असामान्य रूप से बढ़ जाने के प्रकरण में रक्तचाप की जाँच करायें (वैसे आजकल घर में स्वयं जाँच करने में सहायक उपकरण भी उपलब्ध है)।
हृदय सम्बन्धी रोगों की जाँचें भी समय-समय पर कराते रहें जिनमें प्रयोगशाला जाकर अथवा वहाँ के कर्मी को घर बुलाकर उसे रक्त-प्रतिदर्श (ब्लड-सैम्पल) सौंप सकते हैं तथा उसी में कोलेस्टॅराल इत्यादि विविध प्रकार की जाँचों की रिपोर्ट कुछ दिवसों में आपके घर पहुँचा दी जायेगी.
इस प्रकार आपको व आपके पारिवारिक चिकित्सक को पता रहेगा कि आपके हृदय की हालत कैसी है एवं हालातों में किस प्रकार के परिवर्तन करने हैं कि जिनसे हृदय सेहतमंद रहे।
मधुमेह :
मधुमेह से हृदयाघात् अथवा स्ट्रोक की आषंका बढ़ती है। अलसी का सेवन नित्य दिनचर्या में करें।
आजकल गायत्री शक्तिपीठ से सम्बन्धित अथवा अन्य दुकानों में यह भुने रूप में उपलब्ध करायी जा रही है जो मुख में रखते ही घुलने लगती है एवं इससे चबाने के दौरान बेस्वाद अनुभूति से बचाव हो जाता है।
शारीरिक सक्रियता बढ़ायें :
पूरी दिनचर्या में नैसर्गिक रूप से शारीरिक सक्रियता वैसे तो सभी के लिये महत्त्वपूर्ण है परन्तु मोटापे, भार अथवा तोंद से ग्रसित लोगों के लिये यह और अधिक आवष्यक हो जाती है।
समस्त शारीरिक संरचनाओं से परे शारीरिक क्रियाशीलता हृदय-रोगों व अन्य स्वास्थ्य-सम्बन्धी जोख़िमों को दूर रखने में आवश्यक है।
संतुलित आहार :
विविध विटामिन्स व खनिज लवणों की सतत् आपूर्ति के लिये हर प्रकार की सब्जी-भाजी/तरकारी का सेवन करें।
.नमक का सेवन कम करें (चाहें तो सामान्य नमक के बजाय सेंधा नमक आज़मायें)।
कभी-कभी भोजन में अर्जुन की छाल का समावेश करें। अर्जुन (टर्मिनेलिया अर्जुना) की पत्तियों व छाल में फ़ाइटोस्टॅराल्स, लॅक्टान्स, फ़्लेवोनायड्स, फ़िनालिक यौगिक, ग्लाइकोसायड्स सहित ऐसे खनिज होते हैं जो हृद्-स्वास्थ्य के लिये महत्त्वपूर्ण हैं.
दालचीनी के समान इसका भी वृ़क्ष घर में सरलता से लगाया जा सकता है एवं बाजार से क्रय करके इसकी छाल अथवा छाल के चूर्ण को लाया जा सकता है। घर में ताजे व सूखे आँवले का सेवन बढ़ायें।
मानसिक स्वास्थ्य को विशेष ध्यान में रखें :
अवसाद, तनाव इत्यादि मानसिक दशाओं से दूर रहने का प्रयास करें।
हृदयरोग हो अथवा तनाव सम्बन्धी कोई अन्य समस्या प्रायः प्रेमियों, परिजनों इत्यादि में ‘दिल लगा लेने’ के बाद ‘दिल टूटने’ से समस्याएँ बढ़ जाया करती हैं। स्थिति बदतर होती जाती है। ‘विश्वास : विष का वास बन जाता है।
(चेतना विकास मिशन)

