डॉ. गीता शुक्ला
_बहुतों से सेक्स, पशु से सेक्स, बार-बार गर्भपात या अधिक प्रजनन अथवा योनि मेँ ऊँगली, खीरा, बैगन या सैक्स्टॉय रूपी डंडे का इस्तेमाल : वजह कोई भी हो, ज़ब योनि ढीली हो जाती है तब औरत को कोई मज़ा नहीं मिलता. वह कितनों का डाले, कुछ भी डाले -- सब व्यर्थ. पुरुष बेचारे को भी कोई सुख नहीं मिलता._
ऎसे में मनोरोग की अवस्था बनती है. मनोरोग तन को भी रोगी बनाता है. अतृप्ति अपराध तक का कारण बनती है.
पैसे वालियों के लिए आधुनिक चिकित्सा मेँ सर्जरी का ऑप्सन है. हाईफन झिल्ली तक निर्मित कर वर्जिन होने का स्तर भी देती है मेडिकल साइन्स. हम यह काम टच/मसाज/मैडिटेटिव थेरेपी और योग से करते हैं, वह भी निःशुल्क. हमारी सेवाएं लेने के लिए व्हाट्सप्प 9997741245 पर संपर्क किया जा सकता है. यहां मैं होम रेमेडी से संबंधित कुछ ऑप्सन दे रही हूँ.
_कल्याणमल्ल ने अपने अनंगरंग में योनि-संकोचन के निम्न योग दिये हैं :_
(1) नाल के सहित कमल के फूल को दूध में पीसकर (सुपाड़ी के बराबर) गोलियाँ बना ले और उसे क्षण भर के लिए भी योनि में रख लेने से वृद्धा स्त्री की योनि कुमारी की जैसी हो जाती है।
(2) देवदारु, हल्दी, दारु हल्दी और कमलकेसर को पीस कर लेप कर देने से योनि बहुत अधिक सिकुड़ जाती है।
(3) त्रिफला, घाय के फूल, जामुन की छाल और लोध इनको समान भाग में पीसकर शहद के साथ लेप करने से वृद्धा स्त्री कन्या जैसी हो जाती है।
(4) लोध के साथ कडुई लौकी के बीजों से योनि में लेप करने से ऐसी स्त्री की योनि भी जिसके हाल में ही बच्चा हुआ है निस्सन्देह कन्या की योनि जैसी हो जाती है।
(5) असगन्ध, खरैटी (बला), सोंठ, मिर्च, पीपल, हल्दी, कमल और कूठ को जल में पीसकर लेप करने से योनि बहुत कसी हुई हो जाती है।
(6) कोमल और हरी महुआ की लकड़ी को पीसकर शहद के साथ योनि को प्रयत्नपूर्वक भर देने से बहुत कसावट आ जाती है।
(7) हरिद्रा, हारुहरिद्रा, कमल (पंकज) केसर, एवं देवदारु (देवद्रुम) को में लेकर लेप करने से युवती का मदन-मन्दिर संकुचित हो जाता है।
(8) धात्री का फूल, त्रिफला, जामुन की छाल, मधु और यष्टीमधु के लेप को राङ्ग में लगाने से वृद्धा स्त्री भी कन्या की तरह हो जाती है।
(9) नील कमल, व्याधि (कुष्ठ), वचा एवं अश्वगन्ध आदि के लेप से स्त्री का वराङ्ग शीघ्र ही संकुचित हो जाता है।
(10) तालमखाने के बीजों को पीसकर मदन-मन्दिर पर लेप लगाकर एक सप्ताह पर्यन्त मैथुन विरत रहने से शीघ्र ही शिथिल वराङ्ग दृढ़ और घन हो जाता है।
(11) कटुतुम्बी (इक्ष्वाकु बीज) को पीसकर वराङ्ग में लेप करने से नवप्रसूता स्त्री की योनि भी गाढ़ी हो जाती है।
(12) कमल (इन्दीवर), अमलतास (व्याधि), त्रिफला (वरा), ऊषण, अश्वगन्धा, आमलकी एवं हरिद्रा के चूर्ण का लेप यदि योनि में किया जाय तो वह गाढ़ी हो जाती है।
{लेखिका चेतना विकास मिशन से संबद्ध स्थापित चिकित्सिका हैं}

