,मुनेश त्यागी
पिछले दिनों दक्षिण अमेरिका के कोलंबिया में गस्तावो पैत्रो राष्ट्रपति और फ्रांसिया मार्क्वेज उपराष्ट्रपति की ऐतिहासिक जीत हुई है।कोलंबिया में इन दोनों पदों पर वामपंथियों की जीत को वहां के लोग और दुनिया भर के लोग एक नई शुरुआत, एक नए युग की शुरुआत बता रहे हैं। उनका कहना है कोलंबिया में यह एक नए समाजवादी युग की शुरुआत है और कोलंबिया में समाजवादी राष्ट्रपति की जीत एक अविश्वसनीय खबर है।
राष्ट्रपति गस्टावो पैत्रो सशस्त्र m19 आंदोलन में शामिल रह चुके हैं जिसे अमेरिका ने कुचल दिया था। पेट्रो ने बहुत लंबा जीवन जेल में बिताया है। वे समाजवादी नीतियों के समर्थक हैं और समाजवादी आधार पर कार्यक्रम बनाकर उन्होंने जनता को एकजुट किया और उसके सामने समाज की मुक्ति और विकास का रास्ता सामने रखा। जिसे जनता ने अपनाया और उन्हें सत्ता में आरूढ़ कर दिया।
दरअसल दक्षिण अमेरिका में साम्राज्यवाद की जन विरोधी नीतियों के खिलाफ समाजवादी और वामपंथी आंदोलन सबसे तेज है। दक्षिण अमेरिका के लोग अमेरिका द्वारा समर्थित हिंसा और दक्षिणपंथी हिंसा से लोग परेशान हैं। वहां के लोग अमेरिकी साम्राज्यवाद की दखलअंदाजी और जनविरोधी नीतियों से गंभीर रूप से प्रभावित हैं। यही आलम कोलंबिया का भी था।
पिछले कई सालों से कोलंबिया की सरकार अमेरिका के इशारों पर अपनी जनविरोधी नीतियों के कारण लगातार बदनाम होती चली गई थी। उसने किसानों, मजदूरों और आम जनता के हितों को सुरक्षित करने के लिए कोई कार्यवाही नहीं की थी। उल्टे उसने जनता की एकता को तोड़ने के लिए सांप्रदायिक हिंसा और विभाजन की नीतियों का पालन किया। अमीरी गरीबी की खाई को और चौड़ा, गहरा और विस्तृत कर दिया।
समाज में अशांति की नीतियों को बढ़ाया और मानवाधिकारों का लगातार उल्लंघन किया। वहां के प्राकृतिक संसाधनों की लूट कर अमेरिका के लुटेरे पूंजीपतियों को मालामाल होने दिया। उसने जनता की बुनियादी सुविधाओं को बढ़ाने का कोई काम नहीं किया, इसलिए वहां की जनता ने और किसानों और मजदूर जनता ने एकजुट होकर, अपनी एकजुटता कायम करके, शोषक और लुटेरे निजाम को सत्ता से बाहर कर दिया और वामपंथी गस्तावो पैत्रो को राष्ट्रपति के रूप सत्ता में आरूढ़ कर दिया।
यह समाजवादी राष्ट्रपति की जीत, संगठित समाज की ताकत की जीत है। उन्होंने लोकप्रिय नीति कार्यक्रम का निर्माण किया है जो जनता के विभाजन का इलाज करेगा और समाज में सामाजिक न्याय का नया सवेरा लाएगा। उनकी जीत एक अद्भुत जीत है, यह पूरी मानवता की जीत है। यह जीत जनता की एकता, अखंडता और संगठित प्रयासों की जीत है। आज सारी दुनिया के जागने और संगठित होने का वक्त है और ऐसे में हमें एक दूसरे की मदद करने की जरूरत है।
कोलंबिया में वामपंथियों की जीत इस बात पर मुहर लगाती है की आम आवाम, साम्राज्यवाद परस्त नवउदारीकरण की लुटेरी नीतियों एवं सांप्रदायिकता के आधार पर नफरत की राजनीति से तंग और तबाह होकर मुक्ति का रास्ता शुरू कर चुकी है। अब उसने समाजवाद का रास्ता चुन लिया है जो असमानता और भेदभाव के खिलाफ, सबको समानता का अवसर मुहैया कराता है। अब राष्ट्रपति पैत्रों की नीतियां कोलंबिया को गृह युद्ध, महंगाई और बेरोजगारी से निजात दिलाने में सफल होंगी।
एक और वामपंथी और समाजवादी सरकार देखकर और सुनकर अच्छा लग रहा है। सारी दुनिया की वामपंथी ताकतों को बल प्रदान करेगी, उनका हौसला प्रदान करेगी और हिम्मत देगी और उन्हें पूंजीवादी लुटेरे निजाम के खिलाफ लड़ने का हौसला और हिम्मत प्रदान करेगी और पूंजीवादी व्यवस्था को यह पूरी तरह से धाराशाही और पराजित करने की जीत है।
नवनिर्वाचित राष्ट्रपति ने कहा है कि वे देश की समानता और गरीबी को दूर करेंगे, सांप्रदायिक हिंसा और विभाजन, मंहगाई, हिंसा, बेरोजगारी और भुखमरी को दूर कर समाज में अमन शांति और भाईचारे की स्थापना करेंगे। उन्होंने एक अरबपति व्यवसाई को हरा दिया है। अमेरिका इस जीत से खुश नहीं है। वह कोलंबिया की राजनीति में हस्तक्षेप करने की पूरी कोशिश करेगा। इस पर वहां के लोगों का कहना है कि हम अमेरिका के हस्तक्षेपकारी नीतियों का मुकाबला करेंगे और उसे सफल नहीं होने देंगे, अमेरिकी हमलों का मुकाबला करेंगे। उनका मानना है कि आगे का मार्ग बहुत कठिन है, यह सब बहुत आसान नहीं होने जा रहा है मगर हम उनका मुकाबला करेंगे और जनता के सहयोग से कामयाब होंगे।
मानव अधिकारों के बारे हुए हमलों के बारे में वहां के लोगों का कहना है कि हमएकजुट होकर अमेरिका के लुटेरे साम्राज्यवादी घेरे को तोड़ सकते हैं और राजनीति, अर्थशास्त्र और राजनीतिक भूक्षेत्रों में मानवाधिकारों को प्राप्त करेंगे और समाज के विकास को आगे बढ़ाएंगे।
कोलंबिया की कम्युनिस्ट पार्टी ने भी नवनिर्वाचित राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति का समर्थन किया है। उनके गठजोड़ को सामाजिक आंदोलनों का समर्थन प्राप्त था। यह सामाजिक आंदोलनों, मानवाधिकारों और शांति की शानदार और आश्चर्यचकित करने वाली जीत है। यह अमेरिका की लुटेरी नीतियों की करारी हार है।
वहां की पूर्व पराजित सरकार ने जनता का प्राकृतिक संसाधनों को लूटने और और अमेरिकी पूंजीपतियों के मुनाफे बढ़ाने के अलावा कुछ नहीं किया है। उसने वहां की जनता को गरीब बना दिया है, वहां अमीरी के पहाड़ और गरीबी की गहरी खाईयां पैदा कर दी। उसने सांप्रदायिक तत्वों को आगे बढ़ाया है और सांप्रदायिक सद्भाव और शांति को बेहद नुकसान पहुंचाया है।
अब वहां पर जनता के विकास को आगे बढ़ाने के लिए, समाज में समानता कायम करने के लिए और भाईचारा बढ़ाने के लिए राष्ट्रपति पैत्रों ने राष्ट्रीय नवनिर्माण के लिए विपक्षियों और आलोचकों को एक साथ बुलाया है ताकि आपसी सहयोग और सद्भाव से समाज को विकास के मार्ग पर आगे बढ़ा जा सके और सबको शिक्षा, सबको काम, समानता और भाईचारे के मुद्दों को आगे बढ़ाया जा सके और गरीबी अमीरी की बढ़ती खाई को कम किया जा सके।
पीरु, चिली, अर्जेंटीना, मैक्सिको, बोलिविया, होंडुरास, वेनेजुएला, क्यूबा के बाद अब कोलंबिया में गस्टावो पत्रों ने चुनाव जीतकर वामपंथी मार्ग अपना लिया है। यह दर्शाता है कि दुनिया में पूंजीवादी व्यवस्था के असफल होने पर उसका विकल्प और कोई व्यवस्था नहीं है, उसका विकल्प केवल और केवल वामपंथ और समाजवादी व्यवस्था है।
कोलंबिया की इस समाजवादी जीत में समाजवादी क्यूबा और उसकी नीतियों का बहुत बड़ा हाथ है क्योंकि क्यूबा में समाजवादी व्यवस्था ने वहां की जनता की बुनियादी समस्याओं को हल किया है। सबको रोटी कपड़ा मकान शिक्षा स्वास्थ्य और सुरक्षा प्रदान की है और इसको लेकर क्यूबा के महान क्रांतिकारी फिदेल कास्त्रो ने लेटिन अमेरिकन कंट्रीज में सैकड़ों भाषण दिए हैं, जनता को समाजवाद की बुनियादी नीतियों के बारे में समझाया है और इसी समाजवादी अभियान का नतीजा है कि आज दुनिया में, दक्षिणी अमेरिका में वामपंथी आंदोलन सबसे तेज हैं और वहां पूंजीवादी निजाम के ढहने के बाद, समाजवादी व्यवस्था ही कायम होती है, कोलंबिया भी उसी का एक उदाहरण है।
पिछले 175 सालों में दुनिया भर में यही दोहराया जा रहा है, इसे ही वैज्ञानिक समाजवादी व्यवस्था कहा जाता है। क्योंकि दुनिया में पूंजीवादी व्यवस्था के ढह जाने पर, आने वाली अगली व्यवस्था समाजवादी व्यवस्था ही है। कोलंबिया भी इसी का प्रमाण है और वहां की जनता के अथक प्रयासों का एक सफल परिणाम है। यह जीत पूर्ण रूप से इस तथ्य को साबित करती है कि पूंजीवादी लुटेरी व्यवस्था को जनता की एकता के बल पर ही परास्त किया जा सकता है।





