ऑपरेशन सिंदूर से शुरू हुआ भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष शनिवार शाम थम जाने की घोषणा के चंद मिनटों बाद ही टूट गया। पाकिस्तान अपनी नापाक करतूताें से बाज नहीं आया। दिल्ली में सहमति की घोषणा के चंद मिनटों बाद ही जम्मू-कश्मीर में सीमापार से गोलाबारी और ड्रोन हमले फिर शुरू हो गए। श्रीनगर में 40 धमाके हुए, वहीं आरएसपुरा, सांबा, ललियान और रामगढ़ में भी देर रात तक धमाके होते रहे। इन हमलों में कई जगह नुकसान होने की सूचनाएं हैं। मिसाइलों और ड्रोन के टुकड़े गिरने से लोगों में दहशत का माहौल रहा…

जम्मू:दिन चढ़ने तक गूंजे धमाके और सायरन
शहर जम्मू का मिजाज शनिवार की सुबह कुछ अशांत सा था। एक और रात आंखों में काटने वाले लोगों की नींद लगातार गूंजते धमाके और सायरन की आवाजों से नींद तो उड़ चुकी थी, पर सुबह इतनी बेचैनी दे जाएगी, ये किसी ने सोचा नहीं था। रात करीब तीन बजे जेट की गड़गड़ाहट ने लोगों को परेशान किया। लगा कि सुबह होने के साथ ये सब थम जाएगा, पर तड़के 5.30 बजे के करीब एक फिर धमाके, एयर रेड अलर्ट की सूचना ने कई आशंकाओं को जन्म दे दिया। देखते ही देखते चारों तरफ से धमाके गूंजने लगे।
जम्मू के अतिव्यस्त घनी बस्ती वाले रिहायशी इलाके रिहाड़ी, जानीपुर और रूपनगर में मकानों-कारों की क्षतिग्रस्त तस्वीरें वायरल होने लगीं। सुबह रेलवे स्टेशन पर लोगों की भीड़ दिखी। सुरक्षित स्थानों पर जाने को लेकर लोगों में चर्चाएं रहीं। इस सबके बीच पाकिस्तान के दुस्साहस के खिलाफ आक्रोश भी दिखा।
शुक्रवार से शनिवार की सुबह तक चार बार शहर में ब्लैकआउट किया गया। रात 12 से एक बजे के बीच हुए धमाकों के बाद भोर में चार बजे तक शांति थी। पर, उसके बाद एक-एक कर धमाकों का सिलसिला शुरू हुआ, तो कभी एक बार में चार-चार तो कभी लगातार होता ही रहा। सुबह 11 बजे तक धमाकों की गूंज सुनाई देती रही। दुकानें कम खुल रही हैं। माहौल के सवाल पर बलजीत मगोत्रा कहते हैं, डरना क्या है जी…ये पाकिस्तान है, इससे तो हमारी सेना निपट लेगी। बस इन्हें घुसने की इजाजत नहीं देनी चाहिए। पक्का डंगा पर भी सन्नाटा पसरा था। आधी से ज्यादा दुकानें बंद थीं। पुस्तक विक्रेता राहुल महाजन कहते हैं, सुबह से जो भी खबरें मिली हैं, उसने लोगों को परेशान किया है। इसलिए लोगों ने खुद ही दुकान बंद करने का फैसला कर लिया।

यह शहर ही सबकुछ है…यहां से जाने की सोच नहीं सकते : तमाम चिंताओं के बीच रुचिका गुप्ता की चिंता एकदम अलग है। रेजीडेंसी रोड पर उनसे मुलाकात हुई। कहती हैं कि मेरे जानने वाले कई परिवार जम्मू से चले गए। पर, ये कोई समाधान नहीं। हम तो अपना सबकुछ छोड़कर और लेकर शादी के बाद यहां आकर बस गए। यह शहर हमारा सबकुछ है। रुचिका कहती हैं, जो कुछ हो रहा है, उसके पल-पल के गवाह हैं हम लोग। पर कुछ पाकिस्तान का प्रोपेगंडा भी है, झूठी खबरों से बचने की जरूरत है। वरना पैनिक बढ़ेगा।
युवा बोले-बहुत समझा लिया, अब सबक सिखा दो
एक तरफ धमाके लोगों को डरा रहे हैं, तो दूसरी तरफ युवाओं का गुस्सा इस वक्त एकदम उफान पर है। कच्ची छावनी से गुजरते वक्त हमें अमित साम्याल मिले। उन्हें अपने क्लाइंट से मिलने जाने की जल्दी थी। पर, देश की बात पर बिना कहे वे आगे नहीं बढ़ते। कहते हैं कि पहलगाम-बायसरन के बाद समझाने को कुछ बचता नहीं है, हम चाहते हैं कि पाकिस्तान को सबक सिखाया जाए।
श्रीनगर:दोपहर तक दस धमाके, सभी हमले नाकाम
जम्मू-कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी शनिवार सुबह अंगड़ाई ले ही रही थी कि धमाकों ने शांत माहौल में बेचैनी बढ़ा दी। कुछ ही मिनटों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मिसाइल और ड्रोन हमलों की बातें वायरल होने लगीं। पौने बारह बजे तक एक के बाद एक दस धमाके हुए। दोपहर तक स्थिति साफ हुई कि सारे हमलों को नाकाम कर दिया गया, तो लोगों ने राहत की सांस ली। पहला धमाका सुबह करीब 5:30 बजे हुआ। इसके बाद एक घंटे के अंदर सात और धमाकों की आवाजों से शहर गूंजता रहा। करीब पौने बारह बजे लगातार दो और धमाके सुने गए। अलूचीबाग निवासी मोहिंदर सिंह बताते हैं कि धमाके सुनकर परिवार हड़बड़ाकर उठा। सुरक्षा के लिए ग्राउंड फ्लोर पर आ गया। वह कहते हैं, फिल्मों में ऐसे दृश्य देखने को मिले थे और आज वास्तविक जिंदगी में अनुभव हो रहा है। धमाकों के बाद पैदा हुए माहौल की वजह से श्रीनगर शहर में आधी से ज्यादा दुकानें खुली ही नहीं। सड़कों पर चहल-पहल भी कम रही। लोगों में हमलों के लेकर पाकिस्तान के प्रति गुस्सा दिखा। उनका कहना था पाकिस्तान को हर हमले पर सबक मिल रहा है।
बारामुला के उड़ी सेक्टर :रिहायशी इलाकों में बरस रहे गोले, छोड़ा घर
बारामुला के उड़ी सेक्टर के सलामाबाद, चुरुंडा, सिलिकूट आदि क्षेत्रों में शाम 6 बजे से शुरू हुई गोलाबारी शनिवार सुबह साढ़े आठ बजे तक जारी रही। हमले में कई मकान, दुकान और निर्माण क्षतिग्रस्त हो गए हैं। ज्यादातर लोग घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जा चुके हैं। जो घर छोड़कर नहीं गए, उनके दिन भी बंकरों में कट रहे हैं। मवेशियों को चारा देने या बेहद जरूरी काम पर ही लोग बाहर निकल रहे हैं। सलामाबाद के नदीम अकबर खान बताते हैं कि सारी रात धमाके होते रहे हैं। हम देखभाल के लिए यहां रुके हैं। परिवार को भी बारामुला भेज दिया है। वहीं, सुरक्षित ठिकाने की ओर नहीं जाने के सवाल पर फारूख अहमद शेख कहते हैं, घर छोड़कर कहां जाएं। रात बंकर में कटती है। प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि अधिकतर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। कुछ लोग रह गए हैं। हालात पर नजर रखी जा रही है। गोलाबारी में काफी इमारतों और वाहनों को नुकसान पहुंचा है। कुछ पशु भी मारे गए हैं।
राजस्थान के बाड़मेर व जैसलमेर:धमाका, रोशनी व मिसाइलों के टुकड़े बिखर कर गिरे
सुबह के पौने पांच बजे एक के बाद एक दो धमाके हुए। आवाज पांच सौ मीटर दूर घरों तक पहुंची, तेज रोशनी चारों तरफ फैल गई। बाड़मेर के गिदा पारेउ इलाके में रहने वाले मोहन चौधरी ने बताया कि जब मौके पर देखा तो धातु के टुकड़े का कुछ मलबा गिरा हुआ था जिससे धुआं निकल रहा था। इसी तरह का एक टुकड़ा यहां से करीब पांच किलोमीटर दूर मंदिर के पास भी गिरा है। तीसरा मंदिर से डेढ़ किलोमीटर दूर और चौथा दो किलोमीटर दूर गिरा। बाड़मेर में शनिवार सुबह पाकिस्तानी ड्रोन हमले की कोशिश नाकाम किए जाने के कुछ समय बाद सीमावर्ती क्षेत्र में गिरे मलबे को हटाए जाने में शामिल एक पुलिस अधिकारी ने इस टुकड़े को मिसाइल का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा, हमने जो मलबा बरामद किया वह 3 फीट (व्यास में) का था और पंखे जैसा दिख रहा था। बाड़मेर के अलावा जैसलमेर में भी इसी तरह प्रक्षेपास्त्रों के टुकड़े बरामद किए गए हैं, जो राजस्थान में सैन्य और नागरिक क्षेत्रों को निशाना बनाने के पाकिस्तानी मंसूबों को दर्शाता है।
बाड़मेर के जालीपा सैन्य स्टेशन के पास स्थित बलदेव नगर के रहने वाले देवराज और राजू ने भी बताया कि सुबह करीब सवा पांच बजे कुछ आवाजें सुनाई दीं, और फिर आसमान में ड्रोन जैसी कई चीजें दिखाई दीं। इसके बाद कुछ मलबा सड़क पर आकर गिरा। उधर, जैसलमेर के पोखरण क्षेत्र में शनिवार सुबह कई स्थानों से प्रक्षेपास्त्रों के टुकड़े बरामद किए गए। जिले के बडोदा गांव में सकुर खान के घर के पास इसी तरह के टुकड़े मिले। वहां रहने वाले मनु खान ने बताया, घटना सुबह करीब 4:30 बजे हुई। हालांकि, भारतीय सेना ने उसे हवा में ही मार गिराया। हमें सेना पर पूरा भरोसा है। कोई नुकसान नहीं हुआ है।
जैसलमेर में लॉकडाउन
जैसलमेर जिला प्रशासन ने पूरे क्षेत्र में लॉकडाउन लागू कर दिया है। जिला प्रशासन और पुलिस की तरफ से जारी परामर्श में लोगों से पूर्ण सहयोग की अपील की गई है। सभी निवासियों से घर के अंदर रहने का आग्रह किया गया है। अगले आदेश तक समूहों में इकट्ठा होने या कोई सार्वजनिक कार्यक्रम करने पर रोक लगा दी गई है। अगले आदेश तक दुकानें व बाजार बंद रहेंगे।
पठानकोट , बटाला के शहाबपुरा , गुरदासपुर के गांव राजू बेला
खाने बैठे तभी धमाके…जो सोने की तैैयारी में थे उनकी नींद उड़ी
पठानकोट में लोग रात के खाने की तैयारी कर रहे थे, तभी अचानक धमाके शुरू हो गए। इससे लोगों में दहशत फैल गई। धमाके शुरू होते ही ब्लैक आउट हो गया। जो जहां था, वहीं रुक गया। जो लोग सोने की तैयारी में थे, उनकी आंखों से नींद उड़ चुकी थी। पूरी रात चिंता में गुजरी। यह कहना है पठानकोट के राजेश शर्मा उर्फ सेठी का। दिन निकलने के साथ लगा कि अब पाकिस्तान की ओर से कोई हरकत नहीं होगी। लोग घरों से बाहर निकलने लगे, तभी फिर धमाके शुरू हो गए। दहशत के उन लम्हों को बयां करते हुए सेठी ने कहा कि मेरी मां, पत्नी और बच्चे सभी सहमे हुए थे। ईश्वर का नाम लेते हुए पूरी रात न जाने कैसे गुजरी। दुकानदार नवतेज कहते हैं कि 18 घंटे से ज्यादा बीतने के बाद भी कानों में धमाकों की आवाज गूंज रही है। रिटायर्ड सूबेदार महेश शर्मा कहते हैं कि पाकिस्तान ने पठानकोट एयरबेस की ओर ड्रोन व मिसाइलें दागीं। हालांकि, सेना ने करारा जवाब देते हुए वायु रक्षा प्रणाली एस-400 से मिसाइल व ड्रोन को हवा में ही नष्ट कर दिया। जिस तरीके से पाकिस्तान ने करीब 12 घंटे में 100 से ज्यादा मिसाइल पठानकोट की ओर छोड़ीं, उससे लोगों में भय बढ़ गया। हमने उनकी मिसाइलों को नष्ट कर दिया, लेकिन कई मिसाइलों ने नुकसान भी पहुंचाया।
रेड अलर्ट के बाद बाजार बंद
पठानकोट में दुकानों और घरों पर मिसाइल के टुकड़े गिरने से लोगों में दहशत फैल गई थी। रेड अलर्ट जारी कर दिया गया था। जिला प्रशासन की तरफ से तुरंत सभी बाजार बंद करवा दिए गए थे। लोगों को घरों में रहने के निर्देश दिए गए थे। ढांगू रोड निवासी व्यापारी राजेश शर्मा उर्फ सेठी ने कहा कि डर बढ़ गया था। हमलों से रोजगार जरूर प्रभावित हो रहा था। हालांकि प्रशासन हमसे जो भी सहयोग मांगेगा, उसका जरूर पालन करेंगे। स्थानीय निवासी और एक एनजीओ संचालिका रूपा शर्मा ने कहा था कि, हालात खराब हो गए थे, लेकिन युद्धविराम की घोषणा से राहत मिली है।
गुरदासपुर : सायरन बजते ही सड़कों पर पसरा सन्नाटा
गुरदासपुर के ब्लॉक काहनूवान के गांव राजू बेला में धमाके के साथ खेतों में मिसाइल गिरा। धमाका इतना जबरदस्त था कि जिस जगह पर मिसाइल गिरी, वहां पर 40 फीट लंबा और 15 फीट चौड़ा गड्ढा हो गया। आवाज सुनकर गांव वाले इकट्ठे हो गए। गांव के सरदार रुपिंदर सिंह कहते हैं कि सुबह करीब साढ़े दस बजे प्रशासन ने लोगों को सचेत करने के लिए देर तक सायरन बजाया गया। इसके बाद बाजार बंद करवा दिए गए। सड़कों पर सन्नाटा पसर गया। वहीं, बटाला के पास गांव शहाबपुरा में एक किसान के खेत में मिसाइल जैसा हिस्सा मिलने से दहशत है। लोगों का कहना है कि अगर स्थिति खराब हुई, तो वे गांव छोड़ सकते हैं।
फिरोजपुर के गांव चूहड़ी वाला, गांव बुर्ज मक्खन सिंह वाला , जलालाबाद, अबोहर
घर के ऊपर से गुजरीं मिसाइलें दिन में भी रहा हमलों का डर
फिरोजपुर के हुसैनीवाला बॉर्डर की तरफ बसे गांव चूहड़ी वाला में लोगों ने दहशत के कारण गांव छोड़ना शुरू कर दिया है। संतोष सिंह व मलकीत सिंह ने बताया कि बॉर्डर के ऊपर से कई ड्रोन गुजरने के बाद ग्रामीणों में दहशत बढ़ गई है। हालांकि सेना ने इन्हें नष्ट कर दिया, लेकिन उसके टुकड़े जमीन पर आकर गिर रहे थे। ड्रोन हमले और मिसाइल हमले होने के बाद से लोगों ने कीमती सामान पैक करना शुरू कर दिया है। ट्रैक्टर-ट्रालियों पर सामान लादकर सुरक्षित स्थानों पर जाने की तैयारी कर ली है। बहुत से लोग दिल्ली, मुंबई, चंडीगढ़ में अपने रिश्तेदार के पास जाने लगे हैं।
शॉपिंग मॉल्स व सिनेमा हॉल बंद
फाजिल्का के जलालाबाद में दिन में भी मिसाइलें गिरने की आशंका में सभी बाजार बंद कर दिए गए थे। बॉर्डर से सटे गांवों में विशेष एडवाइजरी जारी की गई कि दिन के समय सार्वजनिक स्थानों में इकट्ठा न हों। शॉपिंग मॉल्स व सिनेमा हॉल आदि भी बंद कर दिए गए। अबोहर में सभी बाजारों को शाम सात बजे तक बंद करने के आदेश दिए गए। प्रशासन ने अभी भी लाइटें भी बंद रखने के आदेश दिए हैं।
बच्चों के साथ जोखिम नहीं उठा सकते
फिरोजपुर और उसके आसपास शुक्रवार रात करीब 1:30 बजे मिसाइल दागी गई, जो सीमावर्ती गांव बुर्ज मक्खन सिंह वाला में आकर रिहायशी इलाके के पास खेतों में गिरी। इससे जबरदस्त धमाका हुआ। इससे लोगों में भय व्याप्त रहा। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों के साथ जोखिम नहीं उठाया जा सकता। रेशम सिंह, बलवीर सिंह और फौजा सिंह ने बताया कि ऐसे हालात में खुद को सुरक्षित रखना बड़ी चुनौती है।
सिरसा के गांव खाजाखेड़ा
मिसाइल के टुकड़े देखने उमड़ी भीड़
सेना की ओर से हवा में ही ध्वस्त कर दी गई पाकिस्तानी मिसाइल के टुकड़ों को देखने के लिए सिरसा एयरबेस से ढाई किमी दूर खाजाखेड़ा में भीड़ जुटी रही। लोग सेना की सफलता पर गर्व से भरे नजर आए। उत्साहित ग्रामीणों ने जवानों के साथ मिसाइल के टुकड़ों को वाहन में भी रखवाया।गांव के बीरा ने कहा, रात को बिजली नहीं थी, हम सब जाग रहे थे। तभी आसमान में जहाज का शोर सुनाई दिया और तेज लाइट भी जली। तुरंत बाद बहुत तेज शोर सुनाई दिया। हम सब बच्चों को लेकर घर के अंदर चले गए। ऐसा लगा कि बम गिर गया हो। सब घबरा गए थे।
सुबह पता चला कि किसी को कोई जान-माल का नुकसान नहीं हुआ तो राहत मिली। गांव के ही टिंका सिंह ने कहा कि रात करीब सवा 12 बजे उड़न तश्तरी सी नजर आई और जोरदार धमाका हुआ। लगा जैसे आसमान ही फट गया हो। धमाके बाद बहुत गंदी बदबू चारों तरफ फैल गई। हमें नहीं पता था कि हमारे पास ही कोई मिसाइल गिरी है।
अमृतसर के गांव भिट्टेवड तरनतारन के गांव भट्ठै भैणी गांव झुग्गियां नूर मोहम्मद
आधे घंटे में 25 ड्रोन हमले हुए हरिकेपत्तन पुल उड़ाने की कोशिश
सुबह गुरबाणी की जगह धमाकों की आवाज से हुई। शनिवार सुबह 5 बजे से साढ़े पांच बजे के बीच पाकिस्तान की ओर से अटारी बार्डर के आस-पास के गांव की तरफ 25 ड्रोन दागे गए। वायु रक्षा प्रणाली ने इसे नष्ट कर दिया, जिससे कोई जान-माल का नुकसान न हुआ। नष्ट होने के बाद ड्रोन गांव वडाला, छेहरटा इलाका, गांव भिट्टेवड, गांव मुगलानी कोट राजासांसी सहित कई अन्य जगहों पर गिरे। इससे एक बार तो हड़कंप मच गया। फिर लोग टूटे हुए टुकड़ों को देखने पहुंचने लगे। लोगों के मन में डर का माहौल है, लेकिन वे अपने घर और गांव में डटे हुए हैं। गांव भिट्टेवड के जगबीर सिंह कहते हैं कि वे किसी भी सूरत में अपना आशियाना छोड़ कर जाने को तैयार नहीं हैं। सेना के साये में वे खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। तरनतारन में भी पाकिस्तान ने पट्टी के गांव भट्ठै भैणी के बीएसएफ हेडक्वार्टर को लक्ष्य बनाकर करीब आधे घंटे में 20 से 22 ड्रोन हमले किए। इसे सेना ने विफल कर दिया। यही नहीं, माझा और मालवा को आपस में जोड़ने वाले हरिकेपत्तन पुल को चार से छह मिसाइलों से उड़ाने का प्रयास किया।
सिर के ऊपर से गुजरीं मिसाइलें जान भी देनी पड़ी तो तैयार
वहीं, खडूर साहिब के साथ लगते गांव झुग्गियां नूर मोहम्मद, भंगाला और रामूवाल में भी लोग दहशत में रहे। गांव वालों का कहना है कि हम कई युद्ध देख चुके हैं। हमारे लिए यह संघर्ष कोई बड़ी बात नहीं है। गांव के बलबीर सिंह, जतिंदर सिंह, गुरप्रीत सिंह ने कहा कि मिसाइलें उनके ऊपर से गुजर रहीं हैं। डर तो लगता है, लेकिन हम डटे रहेंगे।





