बीपीन पांडेय
कुछ दिनों से तेजोमहालय वाला जो हुडदंग मचा हुआ था, मुझे ऐसा लग रहा था कि मैं ताजमहल ही नहीं देख पाऊंगा । वो तो भला वो न्यायालय का कि 22 बंद कमरों को खोलने की याचिका रद्द हो गयी । नहीं तो पता लगता कि मैं उधर ताजमहल देखने गया और तेजोमहालय का बोर्ड देखकर वापस आ गया ।
यूपी में पिछले आधे दशक में जिस तरह से नाम बदले हैं वैसा देखकर ताजमहल का भी नाम कब बदल जाये भरोसा होता नहीं ।कुछ लोग ताजमहल में बंद 22 कमरों को खुलवाने के लिए इतने उतावले हैं कि जैसे कमरे खुलते ही ऐसे कागजात मिलने वाले हैं जिससे पता लगेगा कि तेजोमहालय ‘जाट शक्ति राष्ट्र शक्ति’ नामक संगठन ने बनाया है । ताला खुल तो सकता है पर अब उसके लिए न्यायालय ने जो रास्ता बताया है वह काफी लम्बा है । पहले इतिहास से पीजी करो फिर कॉमन इंट्रेंस टेस्ट देकर अथवा यूजीसी की फेलोशिप लेकर पी.एच.डी में दाखिला लो और शोध का विषय रखो “ ताजमहल में बंद 22 कमरे और सनातन का इतिहास’ ।
अब बताइये भला इतना लम्बा रास्ता कौन अख्तियार करता है । इससे अच्छा तो whatsapp पर ही बमचख मचाना बेहतर होगा ना ?मैं ताजमहल को तेजोमहालय बनने की खबर से ही डर गया था । कारण यह है कि देश भर के तमाम धरोहरों को देखने के बाद भी मुझे ताजमहल देखने का अवसर नहीं मिला । कश्मीर से कन्याकुमारी तक और कच्छ के रण से बंगाल की खाड़ी तक माप लेने के बाद भी ताजमहल नहीं देख सका इसपर आपको जितना आश्चर्य हो सकता है, उससे दुगुना आश्चर्य मुझे होता है ।ऐसा नहीं है कि मैंने कभी ताजमहल देखने की कोशिश नहीं की । पहली बार 2016 के अगस्त में गया था ।
भरतपुर किसी केस स्ट्डी के सिलसिले में जाना पड़ा था तो ट्रेन पकड़कर, एक दिन की छुट्टी लेकर ताजमहल देखने निकल गया । जाकर टिकट की लाइन में खड़ा हो गया । धूप तेज थी, लाइन लम्बी, इतनी लम्बी कि देखकर ही डर लगने लगा । फिर हुआ यह कि करीबन आधा घंटा खड़ा रहने के बाद वापस आ गया । लाल किला देखा, सदर बाजार घूमा और पंक्षी पेठा खाते हुए भरतपुर वापस आ गया । वही भरतपुर जहाँ के राजा ताजमहल में भूसा भरवाने की बातें किया करते थे ।ताजमहल देखने की अगली योजना 2018 में बनी । ऑफिस के काम से जयपुर में था । ट्रेन पकड़कर आगरा चला गया । मेरी तबियत पहले से थोड़ी नासाज़ थी । शाम को आगरा पहुँचते-पहुँचते इतना तेज बुखार हुआ कि अगले दिन पूरे समय होटल में ही पड़ा रहा ।
तपते बदन के साथ जब जयपुर आकर जांच कराया तो पता लगा कि टाईफाईड जैसा कुछ हो गया है । बुखार के तपन में ताजमहल देखने की मेरी हसरत धुआँ बनकर उड़ गयी ।ताजमहल जाने की तीसरी योजना पर पलीता अभी दो दिन पहले लगा है । पत्नी के साथ जाने के लिए सारा टिकट बुक कर लिया था । लाइन में खड़े रहने के पुराने बुरे अनुभव के चलते इसबार ए.एस.आई. की साईट से जाकर टिकट भी बुक कर लिया था । इसबार की योजना यह थी कि रविवार को गुरुपूर्णिमा के दिन रात में ताज का दीदार करेंगे । जिन्हें ना पता हो उनके लिए बता दूँ कि ताजमहल हर महीने कुल 5 दिन रात में भी खुलता है ।
पूर्णिमा के दो दिन पहले और 2 दिन बाद तक ।तीसरा प्रयास करीबी मित्रों ने बेकार कर दिया । कई महीनों से टीम के साथ घूमने की योजना इसी सप्ताह मुक्कमल हुई और अब हम इस वीकेंड में उत्तराखंड जा रहे हैं । ट्रेन की टिकट,होटल की बुकिंग कैंसिल कराई जा चुकी है । ए.एस.आई. द्वारा बुक टिकट बेकार हो गया है और मन विचार करने लगा है कि अब ना जाने अगली योजना कब और कैसे बेकार होगी ।जाट शक्ति राष्ट्र शक्ति और सनातन बचाओ समिति नामक तमाम संगठनों से मेरा आग्रह है कि कम से कम यह पुरबिया ब्राहमण जबतक ताजमहल देख नहीं लेता तबतक उसे तेजोमहालय बनाने की योजना मुल्तवी की जाए…..





