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पद्मश्री इतिहासकार को एम्बुलेंस न मिली तो क्या हुआ, प्रधानमंत्री की रैली तो हो गई न?

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*कृष्णकांत

 पंचायत चुनाव तो हो रहा है न? चुनाव की ज्यादा जरूरत है, दवाई की जरूरत नहीं है। हमें इतिहासकार की भी क्या जरूरत है? जितने उचक्के थे, अब सब इतिहासकार हो ही गए हैं। फिर इतिहासकार को एम्बुलेंस की क्या जरूरत है? हमें एम्बुलेंस और दवाई की नहीं, नौटंकी की जरूरत है। लाशों के ढेर पर हम टीकोत्सव मना रहे हैं। ये दिया, थाली, ताली का एक्सटेंशन है। दवाई न मिले, अस्पताल न मिले, बिस्तर न मिले, वैक्सीन न मिले, लोग मरें, श्मशान में जगह न मिले, ये सब कोई मसला नहीं है। अभी हिंदू खतरे में चल रहा है और हिंदू खतरे से सिर्फ तभी निकल सकता है जब मोदी जी प्रधानमंत्री से लेकर परधानी तक का सब चुनाव जीत लें। 
महामारी एक साल पुरानी हो गई है लेकिन हमने इतना भी इंतजाम नहीं किया कि 10 लाख लोग एक साथ बीमार हों तो उन्हें संभाल लिया जाए। हमें इसकी जरूरत नहीं है। हमें सड़कों पर मरते लोगों को देखकर शर्म नहीं आती। हमारी राजधानी में भी एम्बुलेंस न मिल पाना गर्व की बात है। गर्व कीजिए। 
डीएम ने सच कह दिया कि अब लोग सड़कों पर मर रहे हैं तो महामानव योगी जी बुरा मान गए। डीएम पर जांच बैठा दी। लोग सड़कों पर मर रहे हैं तो डीएम ने कह क्यों दिया? लाशें उठा कर ठिकाने लगा देना चाहिए। कहना नहीं चाहिए था। लाशों के ढेर के वीडियो आ रहे हैं, उन्हें देखिए और गर्व कीजिए कि हम कीड़े-मकोड़े की मर सकते हैं। जो सरकार मुर्दे पर मुकदमा कर सकती है वह जिंदा डीएम के खिलाफ जांच क्यों नहीं कर सकती? डीएम साहेब को समझना चाहिए कि खतरे में आये हिंदू को अस्पताल नहीं चाहिए, स्कूल नहीं चाहिए, उसे रोटी, कपड़ा और मकान नहीं चाहिए। हिंदू अब जाग गया है। जागे हुए हिंदू को अच्छी गरिमापूर्ण जिन्दगी नहीं चाहिए। उसे तो चाहिए कि व्हाट्सएप विष-विद्यालय की कल्पना में मुल्ले टाइट रहें। मुल्ले टाइट हैं तो बिना एम्बुलेंस या बिना दवाई के मरने वाला हर हिंदू सशरीर बैकुंठ जाएगा, इसकी गारंटी है। 
धर्म के उन्माद और सनकीपन ने हमसे पहले तमाम दुनिया वालों को बहुत मूर्ख बनाया है। इस दुनिया मे  हमारा प्रवेश नया है। हमारा उत्साह भी नया है। हम भी प्रचंड मूर्ख बनने को तैयार हैं। हम सवाल करने को तैयार नहीं हैं, जान दे देने को तैयार हैं। हम दवाई मांगने को तैयार नहीं हैं, हम एक निकृष्ट मौत मरने को तैयार हैं। हमारी दुर्दशा ही हमारा गौरव है। हम अपनी नीचता के दम पर विश्वगुरु होने का दावा ठोंक रहे हैं। कोई माने या न माने, हम स्वनामधन्य विश्वगुरु हैं। हम वादा करते हैं कि इस पागलपन में हम पूरी दुनिया को हरा देंगे।
*कृष्णकांत*

Ramswaroop Mantri

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