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*भोपाल में बढ़ते अपराधों ने राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल , पुलिस सिस्टम पर सवाल डर का माहौल*

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भोपाल.  मध्‍य प्रदेश की राजधानी भोपाल में लगातार बढ़ रही आपराधिक घटनाओं ने पुलिस की क्षमता, व्यवस्था और तैयारियों पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. प्रदेश की राजधानी होने के बावजूद शहर में वही समस्या सबसे अधिक झकझोरती है जिसमें सुरक्षा संसाधन उपलब्ध होने के बावजूद अपराधियों के हौसले कम नहीं हो रहे हैं. राजधानी में 3500 पुलिसकर्मी तैनात हैं, लेकिन इनमें से भी लगभग 600 जवान हर दिन वीआईपी ड्यूटी में लग जाते हैं. ऐसे में करीब 24 लाख की आबादी की सुरक्षा की जिम्मेदारी बाकी बचे जवानों पर आ जाती है. उधर, अपराधियों की तरफ से खुले आम हथियार लहराने, घरों में घुसकर चोरी करने, सड़क पर हमला करने और वीडियो बनाते हुए चुनौती देने जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं. इन सबने राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था को कठघरे में ला दिया है.

दूसरी तरफ पुलिस का दावा है कि कमिश्नरेट सिस्टम लागू होने के बाद अपराध पर नियंत्रण की कोशिशों में सुधार हुआ है. लेकिन हाल के मामलों को देखें तो तस्वीर उलट दिखती है. पिछले कुछ महीनों में राजधानी के अलग-अलग इलाकों में छुरीबाजी, लूट, चोरी, तोड़फोड़, महिलाओं से मारपीट और कवर्ड कैंपस में घुसकर हमले जैसी वारदातें लगातार चर्चाओं में रहीं. अपराध बढ़ने पर चिंता व्यक्त करते हुए पुलिस ने हाल ही में हाई लेवल समीक्षा बैठक भी बुलाई. बैठक में शहर के दस संवेदनशील थानों, बल की कमी, डिप्लॉयमेंट और हालिया वारदातों पर विस्तृत चर्चा की गई. इसके बाद ग्यारहवीं बटालियन से 250 जवानों को अलग-अलग थानों में भेजने का निर्णय लिया गया. बावजूद इसके शहर में अपराध की रफ्तार थमती नहीं दिख रही.

संवेदनशील थानों में बढ़ रही घटनाएं
पुलिस कमिश्नर हरिनारायणचारी मिश्र ने अधिकारियों और थानों के स्टाफ के साथ बैठक कर तेजी से कार्रवाई करने का नया एक्शन प्लान तैयार किया है. लेकिन घटनाओं की बढ़ रही संख्‍या साफ बताती है कि जमीनी स्तर पर पुलिस स्टाफ को संसाधन और पर्याप्त बल की जरूरत अब भी बनी हुई है. कई थानों में स्वीकृत पदों की तुलना में बल आधे से भी कम है, जिससे क्षेत्रीय गश्त और तत्काल प्रतिक्रिया प्रभावित होती है. वहीं थानों की रिपोर्ट भी बेहद खराब है.

हाल की प्रमुख वारदातें  

  1. शहर के कई इलाकों में छुरीबाजी और तलवारबाजी के मामले.
  2. हथियार लहराते हुए वीडियो वायरल. रंगदारी की शिकायतें बढ़ीं.
  3. कोलार में रात में घर में घुसकर चोरी. लाखों का नुकसान.
  4. बैरागढ़ सेक्टर-A में सेंधमारी. पुलिस देर से पहुँची.
  5. शाहपुरा में 40 वर्षीय महिला के घर चोरी. सीसीटीवी में बदमाश कैद.
  6. अरेरा कॉलोनी में 20 हजार की ज्वेलरी लूट. बाइक सवार अज्ञात फरार.
  7. गौतम नगर में रात में घर घुसकर नकदी और मोबाइल की लूट.

पुलिस बल की उपलब्धता :  शहर के कई बड़े थाना क्षेत्रों में स्वीकृत पदों की तुलना में उपलब्ध बल काफी कम है. यह कमी गश्त, अपराध रोकथाम और त्वरित प्रतिक्रिया पर सीधा असर डालती है.

  • शाहजहानाबाद: 110 पद, उपलब्ध 62.
  • टीटी नगर: 144 पद, उपलब्ध 75.
  • कमला नगर: 81 पद, उपलब्ध 76.
  • टीला जमालपुरा: 100 पद, उपलब्ध 46.
  • पिपलानी: 98 पद, उपलब्ध 58.

राजनीतिक प्रतिक्रिया:  कांग्रेस का हमला तो भाजपा का दावा 
कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि भोपाल में अपराध लगातार बढ़ रहे हैं और जनता असुरक्षित महसूस कर रही है. उनका आरोप है कि सरकार कानून व्यवस्था पर गंभीर नहीं है. वहीं भाजपा प्रवक्ता अजय सिंह यादव का दावा है कि सरकार अपराध पर सख्त है और पुलिस हर वारदात पर तुरंत कार्रवाई कर रही है. उनका कहना है कि विपक्ष केवल राजनीतिक लाभ के लिए बयान दे रहा है.

पब्लिक का गुस्सा और भरोसे का संकट
मिसरोद के कैफे में नकाबपोश हमले, गांधीनगर में वाहनों में तोड़फोड़, छोला मंदिर क्षेत्र में युवक को निर्वस्त्र कर पीटने और रोहित नगर कवर्ड कैंपस में हमले जैसे मामले सोशल मीडिया पर ट्रेंड हुए. इन वीडियो ने शहर के लोगों में असुरक्षा की भावना बढ़ाई है. लोग मानते हैं कि अपराधियों को पुलिस का डर नहीं है. पुलिस का एक्शन प्लान तैयार है लेकिन असली चुनौती इसे लागू करने और जमीनी हकीकत बदलने की है. सवाल यह है कि क्या 3500 जवानों के मौजूदा ढांचे में 24 लाख की आबादी को पर्याप्त सुरक्षा मिल पाएगी.

Ramswaroop Mantri

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