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जिनपिंग के सीक्रेट लेटर से बढ़ी भारत-चीन दोस्ती!

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बीजिंग: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसी सप्ताह चीन की यात्रा पर जा रहे हैं। भारतीय प्रधानमंत्री की सात साल बाद होने वाली यात्रा को भारत-चीन संबंधों में एक नई शुरुआत माना जा रहा है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इसकी नींव चीनी राष्ट्रपति के एक सीक्रेट पत्र के साथ पड़ी थी, जिसने दोनों देशों के बीच संबंधों में निर्णायक मोड़ निभाने की भूमिका अदा की। ब्लूमबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में भारतीय अधिकारियों के हवाले बताया कि मार्च में चीन के साथ अमेरिका का व्यापारिक तनाव चरम पर था, उसी समय शी जिनपिंग ने भारत की राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू से संपर्क किया था।एक रिपोर्ट में भारतीय अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि मार्च में चीन के साथ अमेरिका का व्यापारिक तनाव चरम पर था, उसी समय शी जिनपिंग ने भारत की राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू से संपर्क किया था। इसे जिनपिंग का सीक्रेट लेटर कहा जा रहा है।

अमेरिका को लेकर जताई गई थी चिंता

रिपोर्ट में कहा गया है कि इस पत्र को बेहद सतर्कता और जानबूझकर लिखा गया था, जिसमें अमेरिका की आर्थिक गतिविधियों पर चिंता व्यक्त की और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की संभावना विचार करने के लिए नई कूटनीतिक पहल का प्रस्ताव दिया गया। जिनपिंग का यह पत्र ऐसे समय में आया था जब वॉशिंगटन का चीन और भारत दोनों पर व्यापारिक दबाव बढ़ गया था।

पीएम मोदी को पहुंचाया गया संदेश

सूत्र के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया कि पत्र में उन सभी अमेरिकी समझौतों पर चिंता जाहिर की गई थी, जो चीनी हितों को प्रभावित कर सकते थे। इसमें कूटनीतिक संबंधों को शुरू करने की बात कही गई और बीजिंग की पहल का नेतृत्व करने के लिए एक क्षेत्रीय प्रशासक का भी जिक्र किया गया था। सूत्र ने बताया कि यह जानकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी दी गई थी।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में बताया गया है कि कैसे यह बैकचैनल संवाद एक व्यापक बातचीत में बदल गया। जून तक नई दिल्ली ने बीजिंग के साथ फिर से बातचीत शुरू कर दी थी। बीते सप्ताह दोनों पक्ष अपने सीमा विवादों को सुलझाने के प्रयासों को फिर से शुरू करने पर सहमत हुए, जो 2020 में गलवान घाटी में हुए झड़प के बाद प्रत्यक्ष प्रगति थी।

संबंधों के ठीक होने में बाधा

हालांकि, संबंधों के ठीक होने में कुछ बाधाएं भी हैं। एक बाधा निर्वासित तिब्बती सरकार और 90 वर्षीय दलाई लामा के निधन के बाद उत्तराधिकार के मुद्दे हैं। चीन सरकार ने 1793 के शाही अध्यादेश का हवाला देते हुए कहा है कि चयन प्रक्रिया और उम्मीदवार को बीजिंग की मंजूरी लेनी होगी। दलाई लामा को भारत ने राजनीतिक शरण दी है, जबकि निर्वासित तिब्बती सरकार भी भारत के हिमाचल प्रदेश से संचालित होती है। इन बाधाओं के चलते दोनों पक्षों के धीरे-धीरे आगे बढ़ने की संभावना है।

दोनों देशों के रिश्तों पर मुंबई स्थिति चीनी वाणिज्य दूतावास में काम कर चुके पूर्व चीनी राजनयिक कुई होंगजियान का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि शी जिनपिंग सावधानी से कदम उठाएंगे और संबंधों में स्पष्ट सुधार होने के बाद ही सार्वजनिक रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इसके बजाय वे द्विपक्षीय संबंधों को दिशा देने के लिए अधिक औपचारिक तंत्र स्थापित करना पंसद करेंगे।

Ramswaroop Mantri

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