सुसंस्कृति परिहार
आज़ादी के 75वर्ष पूरे होने के साथ ही अमृत काल के आगमन के प्रथम दिवस देशवासियों को भारतीय शिक्षा बोर्ड मिल गया। देशवासियों को खुश होना चाहिए कि उन्हें मेकाले शिक्षा पद्धति से निजात मिल जाएगी।अब क्लर्क नहीं स्वयंसेवक तैयार होंगे जो भारतीय अध्यात्म और वैदिक ज्ञान के साथ योग ,गणित, भूगर्भ और ज्योतिष विद्या गुरुकुल में ग्रहण करेंगे।जिसका मुख्यालय संभवतः श्रृषिकेश में होगा इसकी कमान योगबाबा के रुप में विश्व प्रसिद्ध रामदेव के हाथ में होगी।
योग और रामदेव बाबा को कौन नहीं जानता जिन्होंने योग में हर मर्ज का इलाज है कहकर पूरी दुनिया में अपना सिक्का जमाया परिणामत:सारी दुनिया 21जून को योग दिवस पर अनुलोम-विलोम करती है।ऐसे अंतरर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त व्यक्ति के हाथों भारतीय शिक्षा की कमान सौंपकर जो अमृत बूंदें हमें मिलेगी उसका सरकार के प्रति हम सबका आभार तो बनता ही है।
देश में मंहगी शिक्षा से आम आदमी परेशान हैं सभी लोग शिक्षित होने की दौड़ में शामिल हैं पिछले कुछ वर्षों में गरीब गुरबों के बच्चे कलेक्टर एस पी बन गए
ये उचित नहीं है इन पदों पर संस्कारवान परिवार के बच्चे ही अच्छे लगते हैं उनमें रुतबा रौब दाब की ज़रुरत होती है वह गरीब गुरबों के बच्चे कहां से लायेंगे। इसीलिए सबको शिक्षा का पाठ से निकालना ही होगा इसलिए गांव गांव खुले स्कूल बंद और गुरुकुल चालू। जहां शिष्य गुरु सेवा की पारंपरिक पद्धति से ही शिक्षा ग्रहण करेगा। वहां कौन पढ़ेगा यह कहने की ज़रूरत नहीं।
कुल मिलाकर भारतीय संविधान को खत्म कर मनुवादी संविधान की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है इसका इस्तकबाल कीजिए और याद कीजिए जालौर के सुराणा गांव की वह हृदय विदारक घटना जहां प्राथमिक शाला के कक्षा तीसरी के छात्र इंद्रराज जो दलित था को गुरुदेव की मटकी से पानी पीने की सजा मौत मिली। अम्बेडकर ने जिस नफरत से जूझते हुए ऐसे अमानवीय व्यवहार के लिए संविधान में जो प्रावधान कराए वे सब ख़त्म हो जायेंगे मनुवादी संविधान यही कहता है। संभावना इस बात की भी है इस मनुवादी व्यवस्था को जीवित रखने वाले गुरुदेव को भविष्य में श्रेष्ठ गुरुदेव का दर्जा मिल जाए और शिक्षा बोर्ड सदस्य भी बना लिया जाए क्योंकि 15अगस्त के अमृत महोत्सव के जलसे में लालकिले से हमारे साहिब की ज़ुबां से इस दर्दनाक हादसे पर मासूम के बिलखते परिवार के लिए दो शब्द भी नहीं निकले।सूत्र बता रहे हैं उधर राजस्थान पुलिस पर गुरुदेव का आशीर्वाद होने से उल्टे पुलिस ने बच्चे के परिवारजनों को पीटा भी है और जल्दबाजी में मासूम की अन्तेष्टि भी कर दी गई।मामला चूंकि राजस्थान का है इसलिए सारा दोष कांग्रेस सरकार पर लगा दिया गया जबकि ऐसी मानसिकता सामंतवादी सोच का ही प्रतिफल है जिसकी ओर भारत सरकार लगातार बढ़ रही है।
आइए अब भारतीय शिक्षा बोर्ड प्रमुख बाबा रामदेव की शिक्षा दीक्षा पर भी एक नज़र डाल लें।योग जिसमें हर मर्ज का इलाज है के बावजूद बाबा ने हर मर्ज के लिए बेशकीमती आयुर्वेद औषधियां तैयार कर लीं हैं। आपको याद होगा उन्होंने कोरोनावायरस से निपटने कोरोनिल गोली भी ईज़ाद कर ली थी।वो तो WHO ने अनुमति नहीं दी वरना कोरोनावायरस आज सातवें आसमान पर पहुंच गया होता। फिर भी उनका दवाओं का कारोबार खूब चला और अब तक चल रहा है। यहीं कहीं बाबा के दिल में ख्याल आया कि अशुद्ध उपभोक्ता सामग्री से तरह तरह की बीमारियां पैदा हो रही हैं इसलिए जन हित में उन्होंने घी से लेकर लिपिस्टिक तक तमाम सामग्री बेचने का उपक्रम भी चालू कर दिया। लोग योग से रोग ठीक होने की बात भूल गए और शुद्धतम उपभोक्ता सामग्री भी उम्दा स्वास्थ्य के लिए खरीदने लगे।भारत ही नहीं बल्कि कई और देश आयातक बन गए।देखते ही देखते बाबा विश्व के प्रमुख उद्योगपतियों की टाप टेन लिस्ट में आ गए ।ऐसे ज्ञानवान को भारतीय शिक्षा बोर्ड प्रमुख बनाना सरकार का हम सब के लिए यह बेहतरीन तोहफा है।कुबूल कीजिए। कुछ सिरफिरे लोग यह कहते हैं कि बाबा के तमाम प्रोडक्ट मिलावटी हैं तथा वे खुद और उनके साथी बालकृष्ण अपनी चिकित्सा हेतु एलोपैथी चिकित्सा लेते हैं।इससे करता फर्क पड़ता है ?
बहरहाल,ये सब चल रहा है ऊपर से लेकर नीचे तक जो कहा जा रहा है ठीक उसके उलट काम होता है। हालांकि भारतीय जनमानस इस चीज़ को शुरू से मानता रहा कि जो प्रारब्ध में होगा वहीं मिलेगा।जितनी सांसें ऊपर वाले ने दी हैं बस उतनी ही मिलेंगी इसी तरह की शिक्षा आने वाले कल में आपके साथ होगी। इसलिए चिंतित होने की ज़रूरत नहीं। मासूम इंद्रराज की नियति यही थी।आज आवश्यकता इस बात की है कि आप तैयारी करना शुरू कर दें पुरातन परिपाटी में जीने की । लालकिले की सज-धज भी इस बात का शुभ संकेत है कि राजा की अगवानी में हाथी शामिल हो चुके हैं।राजाज्ञा की अवज्ञा करने वालों की अब खैर नहीं।जय जवान जय किसान जय विज्ञान जय अनुसंधान सब झूठे हैं यह पहली टपकी अमृत बूंद बता रही है अब जय मनुवादी संविधान की बोलना होगी । सुस्वागतम।





