पशुता– जड़ता- कामुकता यानी पतन की पराकाष्ठा : क्या भारतीय महिला स्वीकार कर सकती है महिला दिवस?_
~डॉ. नीलम ज्योति
(1). अकेली रहती है :
मतलब साथ (सेक्स) की जरूरत तो होगी ही। मजदूर वैगेरह हॉयर कर मजे मारती होगी। सैक्स टॉय तो मौज मौज़ करने के लिए बेस्ट ऑप्शन है ही।
(2).
बाहर रहकर पढ़ी है :
मतलब घाट-घाट का पानी पी हुई है। पक्का कैरेक्टरलेस है। हाथ रखते ही तैयार हो जाएगी। ऐसियों का क्या….
(3).
मेट्रो सिटी में रहती है :
मतलब खुली होगी। मेट्रो सिटीज़ में रहने वाली लड़कियां तो बहुत खुली {वैश्या} होती हैं। पता नहीं कितनों के साथ सो जाएं। मतलब सेक्स के लिए हमेशा आसानी से उपलब्ध।
(3).
गाँव की है :
सीधी होगी। खेत-खलिहान, खंडहर में दो-चार बार ही प्रैक्टिस की होगी। मतलब इसको आसानी से बेवकूफ़ बनाकर यूज़ कर सकते हैं।
छोटे शहर की है! मतलब चालू होगी।
(4).
ब्रेकअप हो गया है :
मतलब ऐसी रोती और जरूरतमंद लड़की को विश्वास देकर सेक्स की जुगाड़ की जा सकती है।
(5).
बॉयफ्रेंड ने चीट किया है :
ओह्ह ! बेबी मैं ऐसा नहीं हूं, दुनिया से अलग हूँ। यार चीट हुई लड़कियों को यूज़ करना औऱ आसान है। सिली गर्ल्स……।
(6).
छोटी जात की है :
यार ये चमारिनें होती बहुत बेवकूफ़ हैं। “मैं जाति को नहीं मानता, शादी करूँगा” बस इतने में तो तन-मन-धन से समर्पित हो जायेंगी।
(7).
काली है :
ओह्ह…! .यार रंग से कुछ नहीं होता काला रंग तो बहुत खूबसूरत होता है। यार उस कलूटी को ऐसे नहीं बोलूंगा तो बिस्तर तक कैसे आएगी।
(8).
सेल्फ डिपेंड है :
इमोशनल फुल बनाकर सारी अय्याशी करने का बढ़िया ऑप्शन है। इंडिपेंडस और बराबरी की बात कर देख कैसे नीचे आती है।
(9).
तलाकशुदा है, विधवा है :
यार कंधा ही तो देना है। बस वो पैर खोलने की लिए तैयार मिलेंगी।
(10).
अभी स्कूल में पढ़ रही है :
लगती तो एकदम माल है, गोटी सेट करनी पड़ेगी।
बातें चाहे जितने तरीके से हों, केंद्र में हवस, वासना यानी बस “सेक्स” है। ऐसे ही नहीं हर दिन रेप हो रहे। ये रेप की तैयारी तो “हरपल” हो रही है।
–लड़की नवदुर्गा का रूप है. नारी नारायणी है. ये महज लेखन-भाषण-प्रवचन का विषय है. दिखावे का पाखंड है।
अपवाद को छोड़ दें तो, हक़ीकतन नाभि के ठीक तीन इंच नीचे केंद्रित रहने वाला बन चुका है भारतीय पुरूष समाज.
🌱चेतना विकास मिशन :





