इंदौर। इंदौर शहर और जिले में न तो पूर्ण लाकडाउन किया गया है न ही औद्योगिक गतिविधियों पर रोक लगाई गई है। बावजूद इसके उद्योगों से श्रमिकों की घर वापसी शुरू हो चुकी है। शहर के उद्योगों में काम करने वाले करीब 25 फीसद श्रमिक शहर छोड़कर चले गए हैं। खुले होने के बावजूद उद्योगों में अभी उत्पादन की गति मंद पड़ी हुई है। ऐसे में श्रमिकों की घर वापसी से उद्योग फिलहाल तो अप्रभावित दिख रहे हैं। उद्योगों के मुताबिक कोरोना को लेकर घबराहट श्रमिकों की घर वापसी की वजह बनी है। इंदौर व इससे सटे छोटे-बड़े औद्योगिक क्षेत्रों में ढाई हजार से ज्यादा मध्यम और लघु श्रेणी के उद्योग संचालित हो रहे हैं। इन उद्योगों में कम से कम दो लाख श्रमिक काम कर रहे हैं।
उद्योगपतियों के अनुसार शहर में लगातार बढ़ते कोरोना के मामलों और बीमारी को लेकर आ रही खबरों से श्रमिकों में घबराहट है। इस बीच जिला प्रशासन द्वारा लगाए गए संतुलित लाकडाउन ने घबराहट को और बढ़ा दिया। इसके बाद 25 से 30 प्रतिशत श्रमिक जो बाहर से आए थे वे अपने घरों को लौट गए। भारत सरकार के मध्यम श्रेणी के उद्योगों का राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त कर चुके सांवेर रोड में कंफेक्शनरी फैक्ट्री संचालित कर रहे दीपक दरियानी के मुताबिक बीते वर्ष उद्योग में एक हजार से ज्यादा श्रमिक थे। बीते वर्ष के लाकडाउन की मार पड़ी।
जनवरी तक स्थितियां फिर सुधरती दिखी तो कर्मचारियों की संख्या बढ़कर 650 तक पहुंच गई थी। बीते 15-20 दिनों में बीमारी को लेकर घबराहट फैली उसके बाद लगातार लाकडाउन को लेकर भी अफवाहें चलती रही। हमारी फैक्ट्री आशा कंफेक्शनरी में उत्पादन जारी है, लेकिन करीब 30 प्रतिशत तक श्रमिक अपने घरों को लौट गए हैं। एसोसिएशन आफ इंडस्ट्रीज (एआइएमपी) के उपाध्यक्ष योगेश मेहता के अनुसार उद्योगों में काम तो जारी है, लेकिन उत्पादन प्रभावित हुआ है। आक्सीजन नहीं मिलने से लोहा व धातु से संबंधित उद्योगों में काम ठप पड़ा है। इसके कारण उनसे जुड़े श्रमिक घरों को लौट चुके हैं। अन्य उद्योगों में उत्पादन कम है क्योंकि बाजार बंद है और ये वे उद्योग हैं जो सीधे तौर पर बाजार की मांग से जुड़े हैं। तीसरे ऐसे उद्योग हैं जिनमें पूंजी प्रवाह कमजोर पड़ने से काम प्रभावित हुआ है।
उद्योगपति समझा रहे हैं
एसोसिएशन आफ इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष प्रमोद डफरिया के अनुसार श्रमिकों को समझाइश दी जा रही है कि प्रशासन ने लाकडाउन नहीं किया है, ऐसे में वे घबराएं नहीं। बीते वर्ष भी घर वापसी कर चुके श्रमिकों को वापस लाने के लिए एसोसिएशन ने अभियान चलाया था। संबंधित जिलों के कलेक्टरों से समन्वय कर उद्योगपतियों को वापस लाया गया था। स्थितियां सामान्य होने के बाद अब फिर से अभियान चलाया जाएगा।
टैक्स की मियाद में मिले छूट
एसोसिएशन आफ इंडस्ट्रीज मध्यप्रदेश ने वाणिज्यकर विभाग एवं विद्युत वितरण कंपनी को पत्र भेजा है। प्रमोद डफरिया ने कहा कि वर्तमान में उद्योग तथा व्यापार का कामकाज बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। संक्रमण फैलने के कारण कई संस्थान बंद हैं ऐसे में समय पर रिटर्न भरना उद्योगव्यापार जगत के लिए कठिन हो रहा है इस हेतु एसोसिएशन ने वाणिज्यिक कर आयुक्त से जीएसटीआर-1 एवं जीएसटीआर-3 के रिटर्न भरने की तिथि को आगे बढ़ाए जाने का अनुरोध किया है। इसी के साथ एसोसिएशन ने मध्य प्रदेश विद्युत वितरण कंपनी के सीएमडी से भी औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए राहत प्रदान किए जाने का अनुरोध करते हुए कहा है कि निम्न व उच्चदाब औद्योगिक उपभोक्ताओं के बिलों की नियत तिथि को आगे बढ़ाया जाना चाहिए और औद्योगिक बिल राशि किश्तों में भरने की सुविधा प्रदान की जाए।





