विजय दलाल
*जो लोग भी इस बात पर पक्का यकीन करते हैं कि देश के चुनाव में बीजेपी ईवीएम का दुरूपयोग कर रही है वो यह मानते हैं कि इसका संबंध है!*
*चुनाव आयोग के सुप्रीम कोर्ट में इस खुलासे के बाद कि कितनी ही मशीनों में रिकॉर्ड पर डले वोटों की संख्या और मशीन में गणना की वोटों की संख्या में बहुत अंतर पाया गया,हैक कर मशीन के दुरूपयोग होने का एक और प्रमाण है।*
*मेरे कई दोस्त ये तो मानते हैं कि ईवीएम का दुरूपयोग तो होता है लेकिन उनकी यह धारणा है कि चूंकि लोकसभा के चुनाव करीब है और उसमें इसका दुरूपयोग होना है इसलिए अभी राज्यों के विधानसभा में इसका दुरूपयोग नहीं होगा।*
*लेकिन मेरे जैसे लोग जो यह मानते हैं कि बीजेपी के लिए गुजरात और उत्तर प्रदेश के बाद सत्ता के लिए सबसे महत्वपूर्ण राज्य कोई है तो वह मध्यप्रदेश है। इसलिए वो किसी भी हालत में मध्यप्रदेश की सत्ता नहीं छोड़ सकते।*
*इस बार खरीद – बिक्री भी संभव नहीं है।*
*चूंकि मध्यप्रदेश में सीधा दो दलों का आपस में मुकाबला है जहां जीत हार का अंतर कम हो ऐसे में कांग्रेस के वोट किसी तीसरी पार्टी को ट्रांसफर कर बीजेपी के उम्मीदवार को जिताने का खेल इंडिया गठबंधन के बाद और आप पार्टी जैसी पार्टी द्वारा बीजेपी की बी पार्टी बनने के सारे गणित समाप्त होने के बाद मुश्किल हो गया है।
*मध्यप्रदेश के सारे सर्वे कांग्रेस को जीता भले रहे हों लेकिन 8 – 10 सीटों का फर्क ही बता रहे हैं।
*ऐसे में निश्चित रूप से ईवीएम के दुरूपयोग का बिहार – उत्तर प्रदेश माडल ही काम आएगा कि जीतने वाली पार्टी के वोट कहीं औवेसी की या लोजपा पार्टी को तो कहीं बसपा या अपने अपने क्षेत्र में प्रभाव रखने वाली अन्य स्थानीय पार्टियों को ट्रांसफर कर बीजेपी उम्मीदवार को जिता दो।*
*लेकिन मध्य प्रदेश में ऐसे हालात नहीं होने से नया तरीका आजमाया जा रहा है।*
*आप मेरी बात समझने के लिए इस समाचार पर गौर करें ।*
*आरएसएस जुड़े रहे कुछ* *पदाधिकारियों ने मध्यप्रदेश में एक नई पार्टी “जनहित पार्टी” बनाई है। जो केवल 25 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े करेगी।*
*कारण बड़ी संख्या में भाजपा नेता कांग्रेस में शामिल हो रहे हैं ऐसे में भाजपा का वोटर कांग्रेस को न चला जाए। यदि भाजपा से नाराज़ हैं तो जनहित पार्टी को वोट देंगे। कांग्रेस के खाते में नहीं जाएंगे।*असल में ईवीएम के दुरूपयोग के लिए मध्यप्रदेश में जहां*बीजेपी – कांग्रेस का सीधा मुकाबला है*यह नया माडल आया है। इस नये माडल में वह कई आरोपों से बच जाती है एक बहुत कम* *विधानसभा क्षेत्रों में ऐसी चिप लगी मशीनें जो हैक की जा सके लगानी होती है। राज्य स्तर उन ही विधानसभा क्षेत्रों में हर स्तर पर इस काम में सहयोग करने वाले प्रशासनिक और चुनाव आयोग के अधिकारी पोस्ट किए जाते हैं।* *दूसरा प्रोग्रामिंग में वोट बीजेपी को ट्रांसफर नहीं करना पड़ता है, तो इस आरोप से बचा जाता है।*
*17 नवंबर से 3 दिसंबर यानी 16 दिन पड़ी मशीनें पर्याप्त समय है जरूरत अनुसार प्रोग्रामिंग रन करने के लिए।*
*फिर हमेशा की तरह तर्क है अगर ईवीएम का दुरूपयोग हुआ है तो राजस्थान, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में कैसे कांग्रेस कैसे जीत गई।*
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*अभी तो इसका दुरूपयोग रोकने का उपाय केवल और केवल वीवीपेट पर्ची की 100% समानांतर गणना है, जो अब सुप्रीम कोर्ट के भरोसे है।





