सुसंस्कृति परिहार
पहले सांसद संजय सिंह और अब लगभग 48दिन जेल में रहने के केजरीवाल की जमानत होना सरकार की ख़ुफ़िया जांच एजेंसियों की ना केवल तौहीन है बल्कि विपक्ष के जनप्रतिनिधियों सांसद और मुख्यमंत्री के साथ हुई घृणित राजनीति को दर्शाते हैं। सरकार के इशारों पर नाचने वाली ईडी को कोर्ट ने बुरी तरह धो डाला।
विदित हो,सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग में शुक्रवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को अंतरिम जमानत दे दी।केजरीवाल को एक जून तक के लिए अंतरिम जमानत दी गई है।पीठ ने कहा कि चुनावों से 48 घंटे पहले हम केजरीवाल को पर्याप्त समय दे रहे हैं। केजरीवाल के चुनाव प्रचार पर कोई पाबंदी नहीं है लेकिन उन्हें दो जून को सरेंडर करना होगा।
।कोर्ट में ईडी ने केजरीवाल को अंतरिम जमानत का पुरजोर विरोध किया। ईडी की तरफ से खालिस्तानी अमृतपाल का भी नाम लिया और कहा कि वह भी जेल से चुनाव लड़ना चाहते है। कोर्ट ने ईडी के सारे तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि उसके पास डेढ़ साल का वक्त था। अगस्त 2022 में एफआईआर दर्ज हुई थी।केजरीवाल को चुनाव से पहले या बाद में भी गिरफ्तार किया जा सकता था। जस्टिस संजीव खन्ना ने दिल्ली के सीएम को बड़ी राहत देते हुए कहा कि 21 दिन में कोई चीजें बहुत ज्यादा नहीं बदल जाएंगी।
सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल को अंतरिम जमानत देते हुए कहा कि लोकसभा चुनाव के मद्देनजर उदारवादी दृष्टिकोण उचित है। उनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। वह समाज के लिए खतरा नहीं है। उन पर गंभीर आरोप जरूर हैं पर वे अभी तक उन्हें दोषी नहीं ठहराया गया है। कोर्ट ने केजरीवाल को निर्देश दिया कि वह किसी भी गवाह से बात नहीं करेंगे। आधिकारिक फाइलों तक उनकी पहुंच नहीं होगी। केजरीवाल को एक जमानत राशि के साथ 50,000 रुपये का जमानत बांड भरना होगा।
बहरहाल,भाजपा की अरविंद केजरीवाल को चुनाव से दूर रखने की कोशिश को करारा झटका लगा है। कोर्ट ने उन्हें पूरे देश में अपने प्रचार को जारी रखने की अनुमति दी है।उनकी हिरासत के बाद से दिल्ली और पंजाब के साथ आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं में जो जोश उमड़ा था निश्चित तौर पर वह कई गुना बढ़ जाएगा। वह भाजपा के लिए घातक होगा।आगे अदालत अपनी कार्रवाई जारी रखेगा लेकिन एक पार्टी प्रमुख तथा मुख्यमंत्री पद पर काबिज़ जनता के प्रतिनिधि के साथ जिस तरह कार्रवाई को अंजाम दिया गया वह घोर निंदनीय है इसकी आमजन में तीखी प्रतिक्रिया देखी जा रही है।
कुल मिलाकर इस फैसले से जनता का हौसला बढ़ा है जबकि दूसरी ओर भाजपा के लिए यह कदम आत्मघाती साबित होगा ।देश विदेश में भाजपा के इस कदाचरण की घनघोर निंदा हुई है। समझदार लोग इसलिए और ज्यादा चिंतित रहे जब एक मुख्यमंत्री को इतने दिनों तक जेल में अकारण रखा जा सकता है तो आम आदमी की खैर नहीं। लोकतंत्र के लिए इस जमानत का होना हर्ष का विषय है।इसका असर तेजी से चौथे और अन्य चरणों पर पड़ेगा।भाजपा की कुटिल राजनीति का एक अध्याय भी बंद होगा क्योंकि कोर्ट ने ऐसे मामलों में शीघ्र जमानत का विचार भी बना लिया।






