इंदौर
मिलावट के मामलों में अफसर विवेकाधिकार के नाम पर कानून का मनमाना इस्तेमाल कर रहे हैं। भास्कर ने ऐसे 22 मामलों की फाइल निकाली तो तमाम गड़बड़ियां सामने आईं। एक केस में चार बार पकड़े गए व्यापारी पर हर बार जुर्माने की राशि घटाई गई तो अन्य मामले में दूसरी बार ही इसे दोगुना कर दिया गया। एक केस में पहली गलती पर ही 2 लाख का जुर्माना लगाया गया। समान गलती पर दूसरे व्यापारी को महज 25 हजार में छोड़ दिया गया।

इसके विपरीत पड़ोसी जिले धार में एक केस में दोबारा गड़बड़ी पकड़े जाने पर लाइसेंस निरस्ती की कार्रवाई की गई। हाई कोर्ट की विशेष खंडपीड ने हाल ही में कमल खरे विरुद्ध शासन के मामले में मिलावटखोरों के खिलाफ रासुका को सही ठहराते हुए कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। बावजूद इसके शहर में जिन व्यापारियों पर रासुका के अंतर्गत कार्रवाई की गई, उन पर भी मामूली जुर्माना लगाया गया।
ये कैसे फैसले- एक जैसी गलतियों पर भी अलग-अलग कार्रवाई

धार में दूसरी बार में लाइसेंस निरस्त, 3.5 लाख जुर्माना
धार में अपर कलेक्टर दिलीप कापसे ने 2018 में यश ड्रिंकिंग वाटर के मामले में दूसरी बार गड़बड़ी पर लाइसेंस निरस्त कर 3.5 लाख का जुर्माना किया।

धारा 49 में पीठासीन अधिकारी के लिए कार्रवाई के दिशा निर्देश तक हैं
खाद्य सुरक्षा मानक अधि. 2006 एवं विनियम 2011 में मिलावटखोरों पर FIR कर अधिकतम जुर्माने एवं उम्रकैद तक के प्रावधान हैं। धारा 64 एवं धारा 49 के अनुसार, बार-बार अपराध पर लाइसेंस निरस्त कर दोगुना दंड देने का प्रावधान है। पीठासीन अधिकारी को कार्रवाई के लिए दिशा-निर्देश भी दिए गए हैं।’ – श्याम शुक्ला, हाई कोर्ट, एडवोकेट
अपराध की पुनरावृत्ति पर पहले से कम दंड देना विवेकाधिकार नहीं
जस्टिस रमेश गर्ग के मुताबिक, फूड एंड सेफ्टी एक्ट 2006 की धारा 50 से 63 तक में अलग-अलग अपराधों में अलग पेनल्टी हो सकती है। दंड की राशि एक रुपए से प्रावधान के अनुसार अधिकतम हो सकती है। दंडाधिकारी को धारा 49 के प्रावधानों में प्रकरण की परिस्थितियों का आकलन करते हुए दंड की राशि तय करना होगी। धारा 50 से धारा 63 के किसी भी अपराध के पुनरावृत्ति पर दंडाधिकारी को धारा 64 में पहले अपराध में लगाई पेनल्टी से दोगुना पेनल्टी लगानी होगी।
हालांकि यह राशि प्रावधान में दिए गए अधिकतम दंड से अधिक नहीं हो सकती है। जहां अपराध निरंतर हो रहा है, वहां प्रतिदिन के हिसाब से एक लाख रुपए तक दंड आरोपित किया जा सकता है। ऐसे अपराधी का लाइसेंस निरस्त किया जाना चाहिए।
जहां भी अपराध की पुनरावृत्ति होगी, वहां दंडाधिकारी को ऐसा कोई विवेकाधिकार नहीं है कि वह पहले लगाए गए दंड से कम दंड लगाए तथा धारा 64 के प्रावधानों का उल्लंघन करे। जहां तक विवेकाधिकार का प्रश्न है, वह धारा 49 में दिए गए हैं परंतु धारा 64 आदेशात्मक होने से वहां विवेकाधिकार का उपयोग नहीं हो सकता। धारा 64 के अनुसार ही दंड आदेश पारित करना होगा।
सीधी-बात अभय बेड़ेकर, अपर कलेक्टर, इंदौर
ये विवेकाधिकार का मामला मीडिया ट्रायल नहीं हो रहा है
आपके 22 फैसले की कॉपी है। एक जैसे मामलों में अलग-अलग जुर्माने लगाए हैं। क्या आधार है?
– ये एडीएम के विवेक पर रहता है, किसको क्या जुर्माना लगाना है। 50 हजार से 5 लाख तक जुर्माना की लिमिट है। कहीं निश्चित नहीं लिखा है कि 20 हजार ही जुर्माना लगेगा।
व्यापारियों का कहना है कि छापे के बाद सेटिंग से जुर्माने की राशि कम कराई जाती है?
– ये बिलकुल गलत है। जो लोग पैसे देते हैं वे शिकायत करें। हाल ही में एक फूड इंस्पेक्टर को निलंबित किया है।
वाडीलाल आइस्क्रीम और पेपे न्यूट्रीशियन पर पहली बार में ढाई-ढाई लाख का जुर्माना लगा, गणगौर स्वीट्स पर पहली बार में 75 हजार तो चौथी बार में 10 हजार का ही जुर्माना?
– यह कोर्ट का मामला है। क्या आप जज से पूछ सकते हो कि किसी को दो महीने की सजा क्यों दी और दूसरे को तीन महीने की क्यों। यह आप तय नहीं कर सकते। मीडिया ट्रायल नहीं हो रहा है यहां पर।
दूसरी बार जुर्माना लगने पर ही लाइसेंस सस्पेंड होना था, जुर्माना भी बढ़ना था?
– आप मुझे नियम दिखा दो।





