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छह गुणवाली नारी का लक्ष्मीबाई ने बताया सातवां गुण : आचार्यश्री विभवसागर मुनि

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बांसवाड़ा। । ग्रन्थों में हमने पड़ा है छह गुण वाल नारी कुल को तारने वाली होती है, लेकिन रानी लक्ष्मी बाई ने तो सिद्ध कर दिया कि सातवें वीरांगना गुण को धारण करने वाली नारी कुल को ही नहीं देश को तार देती है। शास्त्रों में नारी के छह गुण बताये गये हैं-
कार्येषु मंत्री वचनेषु दासी, भोज्येषु माता शयनेषु रंभा।धर्मानुकूला क्षमया धरित्री, षड्भिर्गुणैः स्त्रिकुलतारणी स्यात्।।
व्यक्ति कार्य, व्यापार, कोई निर्णय, खरीद-फरोख्त करता है तो उसकी पत्नी उसे मंत्री के समान सलाह देती है, उस समय वह उसकी मंत्री वन जाती है। जब व्यक्ति घर के कोई कार्य पानी लाओ, चाय बनाओ, विस्तर लगाओ जैसे करने को कहता है तो पत्नी उसकी बात तुरंत मानती हुई दासी के समान आज्ञानुपालन करती है। जब व्यक्ति भोजन करने बैठता है तो स्त्री अपने पति को बहुत दुलार से भोजन कराती है, पंखा भी झलती है। पुरुष को यदि बीमारी के कारण परहेज करना होता है तो वह दुर्गुणकारी भोज्य लेने से मना कर देती है और यदि कम भोजन कर रहा है तो उसकी मनुहार करके भरपेट भोजन कराती है। यदि सब्जी आदि कम बची है तो पत्नी स्वयं रूखा-सूखा खा लेगी लेकिन अपने पति को बच्चे की तरह प्यार से पूर्ण भोजन करती है, ऐसे में भोजन कराते हुए स्त्री को माता कहा गया है। और रात्रि में शय्या पर शयन करने में वह अप्सरा स्वर्ग की रम्भा बन जाती है। यदि घर में खटपट हो गई, बहुत हुआ पति ने गुस्से में एकाध चाटा भी मार दिया, भले ही उसकी गलती न भी हो तो वह एक कोने में बैठकर आंसू वहा लेती है और इसी बीच कोई मेहमान या परिचित आ जाये तो अपने पल्लू से आंसू पोछकर मुस्कुराता हुआ चेहरा लेकर सामने आ जाती है जैसे कुछ हुआ ही न हो, किसी को अंदर की बात पता न चल जाये। इसलिए स्त्री को क्षमा में पृथ्वी के समान माना गया है। पृथ्वी को कितना खोदें, हल चलायें वह आपको अनाज ही उगायेगी। ऐसे छह गुणों से युक्त धर्मानुकूला नारी को कुल तारणी कहा गया है। लेकिन रानी लक्ष्मीबाई ने तो अपना वीरांगना रूप धारण कर सातवां गुण दिखाकर दुनिया को चकित कर दिया। ये विचार बांसवाड़ा में ससंघ प्रवासरत आचार्य श्री विभवसागर जी महाराज ने सागर सखीग्रुप की श्रीमती कल्पना जैन के संयोजन में आयोजित वर्चुअल महिला संगोष्ठी को संबोधित करते हुए व्यक्त किये।

ये विचार बांसवाड़ा में ससंघ प्रवासरत आचार्य श्री विभवसागर जी महाराज ने सागर सखीग्रुप की श्रीमती कल्पना जैन के संयोजन में आयोजित वर्चुअल महिला संगोष्ठी को संबोधित करते हुए व्यक्त किये। सखी ग्रुप ने 26 जनवरी गणतंत्रता दिवस के अवसर पर महिला शक्ति का योगदान विषय पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की थी। जिसकी अध्यक्षता ब्र. प्रदीप जी पीयूष ने की, विशेष अतिथि श्री अखिल भारतवर्षीय दि. जैन विद्वत् परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री डाॅ. महेन्द्रकुमार जैन ‘मनुज’ थे। आलेखों की निर्णायक श्रीमती अनीता जैन रायपुर थीं, संचालन श्रीमती संगीता जैन सिहोरा ने किया। इस गोष्ठी में अनीता जैन रायपुर, इन्दु जैन, अलका जैन, सुलेखा जैन दमोह, ज्योति जैन दमोह, मंजु जैन जबलपुर, संगीता सिहोरा, कल्पना जैन सागर, श्रेया जैन, सपना जैन और स्नेहलता सिंघई आदि अनेक ने अपने विचार व्यक्त किये। आभार बहन संध्या जैन सहसपुर ने व्यक्त किया। 


डाॅ. महेन्द्रकुमार जैन ‘मनुज

’22/2, रामगंज, जिंसी, इन्दौर, मो.9826091247

Ramswaroop Mantri

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