अमेरिका के लेविस्टन मेन में गोलीबारी में 22 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोगों के घायल होने की खबर है। इधर दिल्ली की साकेत कोर्ट आज सौम्या विश्वनाथन मर्डर केस में आरोपियों को सजा देने पर फैसला 7 नवंबर तक टल गया है। उधर पीएम मोदी ने आज महाराष्ट्र के शिरडी में श्री साईबाबा समाधि मंदिर में पूजा-अर्चना की। महाराष्ट्र के राज्यपाल रमेश बैस, सीएम एकनाथ शिंदे और डिप्टी सीएम देवेंद्र फड़णवीस भी मौजूद रहे। वहीं मच्छल सेक्टर में मुठभेड़ में दो आतंकी ढेर। कश्मीर जोन पुलिस का कहना है कि ऑपरेशन जारी है।
लोस-विस चुनाव साथ कराने उच्चस्तरीय समिति कर रही विचार, 30 लाख ईवीएम की जरूरत

सूत्रों के मुताबिक, आरक्षित इकाइयों को ध्यान में रखते हुए, आयोग को एक साथ मतदान के लिए लगभग 30 लाख नियंत्रण इकाइयों, लगभग 43 लाख मतपत्र इकाइयों और लगभग 32 लाख वीवीपैट की आवश्यकता होगी। देश में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के एकसाथ चुनाव के सुचारु संचालन के लिए चुनाव आयोग को करीब 30 लाख इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) की आवश्यकता होगी। सुगमतापूर्व चुनाव कराने के लिए तैयारी में लगभग डेढ़ साल का वक्त लगेगा। सूत्रों ने बताया कि एक ईवीएम में एक नियंत्रण इकाई, कम से कम एक मतपत्र इकाई और एक मतदाता सत्यापन योग्य पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपीएटी) इकाई शामिल होती है।
सूत्रों के मुताबिक, आरक्षित इकाइयों को ध्यान में रखते हुए, आयोग को एक साथ मतदान के लिए लगभग 30 लाख नियंत्रण इकाइयों, लगभग 43 लाख मतपत्र इकाइयों और लगभग 32 लाख वीवीपैट की आवश्यकता होगी। इस संबंध में आयोग ने कुछ महीने पहले विधि आयोग को सूचित किया था कि उसे इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों को संग्रहीत करने के लिए पर्याप्त भंडारण सुविधाओं की भी आवश्यकता होगी।
चुनौतियों पर भी हुआ मंथन
विधि आयोग ने एक साथ चुनाव कराने के लिए अपनी आवश्यकताओं और चुनौतियों पर चुनाव आयोग के साथ बातचीत की थी। बातचीत से अवगत सूत्रों ने कहा कि जब ऐसी कोई कवायद होगी तो बहुत कुछ मतदान केंद्रों की संख्या पर निर्भर करेगा। पिछले लोकसभा चुनावों में 12.50 लाख मतदान केंद्र थे। आयोग को अब 12.50 लाख मतदान केंद्रों के लिए लगभग 15 लाख नियंत्रण इकाइयों, 15 लाख वीवीपैट इकाइयों और 18 लाख मतपत्र इकाइयों की आवश्यकता है। एक ईवीएम की लाइफ 15 साल होती है। इन वोटिंग इकाइयों की लागत कितनी है, इस पर कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। पिछली खरीद दरों पर भी एक करोड़ इकाइयों की कुल लागत 15,000 करोड़ रुपये से अधिक होगी, जिसमें वीवीपीएटी इकाइयों के लिए 6,500 करोड़ रुपये भी शामिल है। यदि स्थानीय निकाय चुनाव भी लोकसभा और विधानसभा चुनावों के साथ कराए जाएं तो लागत और भी अधिक हो सकती है।
दूसरी शादी नहीं कर सकेंगे असम के सरकारी कर्मचारी, तत्काल प्रभाव से लागू हुआ आदेश

अधिसूचना में कहा गया है कि दिशानिर्देश असम सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 26 के प्रावधानों के अनुसार जारी किए गए हैं। नियमों का उल्लंघन करने पर अनुशासनात्मक प्राधिकरण सरकारी सेवक के खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू कर सकता है।असम सरकार ने अपने कर्मचारियों को पति या पत्नी के जीवित होते दूसरी शादी करने पर रोक लगाने के साथ दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी है। कार्मिक विभाग की अधिसूचना में कहा गया है कि यदि पति या पत्नी जीवित है तो सरकारी कर्मचारी को किसी अन्य व्यक्ति से शादी करने से पहले सरकार की अनुमति लेनी होगी। भले ही उसे व्यक्तिगत कानून के तहत उसे ऐसी शादी की अनुमति हो। हालांकि, इसमें तलाक के मानदंडों के बारे में उल्लेख नहीं किया गया है। सीएम हिमंत बिस्व सरा के निर्देश पर नियम तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।
डिफेंस एक्सपो में दिखी स्वदेशी हथियारों की ताकत, ड्रोन की खूबियां जानने के लिए बेताब दिखे लोग

तीन दिवसीय एक्सपो फ्रांस के आंतरिक मंत्रालय, भारत के गृह मंत्रालय व विदेश मंत्रालय के सहयोग से शुरू किया गया है। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में आंतरिक सुरक्षा के लिए प्रगति मैदान में बृहस्पतिवार को डिफेंस एक्सपो ‘मिलिपोल इंडिया’ का शुभारंभ किया गया। तीन दिवसीय एक्सपो फ्रांस के आंतरिक मंत्रालय, भारत के गृह मंत्रालय व विदेश मंत्रालय के सहयोग से शुरू किया गया है। एक्सपो में स्वदेशी हथियारों की ताकत देखने को मिल रही है। कुछ हथियार भारतीय सेना में शामिल हैं और कई को आने वाले समय में शुमार किया जाएगा।
एक्सपो में 150 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शक शामिल हैं। इसका उद्घाटन सरकार के सचिव अतुल डुल्लू, चंद्राकर भारती एएस व फ्रांस की नागरिकता राज्य मंत्री सबरीना एग्रेस्टी-रूबाचे ने किया।
ड्रोन के जरिये आसानी से पहुंचेंगे हथियार
एक्सपो में बंदूक, पिस्टल, मिसाइल और ड्रोन रखे गए हैं, लेकिन इनमें सबसे खास बीएमपी सी-थ्रू आर्मर है। वहीं, सियाचिन की दुर्गम पहाड़ी हो या लद्दाख रेंज की ऊंची चोटियां, अब सैनिकों के पास ड्रोन के जरिये आसानी से दवा से लेकर हथियार, दवाएं व अन्य संसाधन पहुंच सकेंगे। दर्शकों के बीच यह आकर्षण का केंद्र बना है।
ड्रोन को देखने व इसकी जानकारी लेने के लिए दर्शक बेताब दिखे। यह फाइबर से बना है और इसका कुल भार तीन किलो है। यह आसानी से 20 हजार फीट की ऊंचाई तक उड़ सकता है। खास बात यह है कि यह ऊंची पहाड़ियों में अपने से तीन गुना वजन को ले जा सकता है। माइनस 30 से 50 डिग्री में छह घंटों तक उड़ने की क्षमता रखता है।
डूबे लोगों का पता लगाएगी सोनार मशीन
किसी दुर्घटना में पानी में डूबे लोगों को अब आसानी से खोजा जा सकेगा। इसके लिए सोनार हेंडी मशीन को स्वदेशी कंपनी ने निर्मित किया है। सोनार आधारित उपकरण द्वारा पानी के अंदर 50 मीटर तक फंसे किसी भी इंसान का पता लगाया जा सकता है। इससे गोताखोरों का समय बचेगा और प्रभावी कार्रवाई की जा सकेगी। पानी की सतह पर रखकर इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। इस उपकरण को खरीदने के लिए एनडीआरएफ से बात चल रही है।
कमला नेहरू अस्पताल में चिकित्सकों ने प्रीमेच्योर बच्ची को दिया नया जीवन

केएनएच में चिकित्सकों ने प्रीमेच्योर बच्ची को नया जीवन दिया है। छह महीने में ही जन्मी बच्ची का वजन सिर्फ 600 ग्राम था। फेफड़े भी पूरी तरह से बने नहीं थे।
10 से 15 किलोमीटर दायरे वाले कम बच्चों के स्कूल होंगे मर्ज, बनेंगे मॉडल

कैबिनेट की मंजूरी के बाद सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्कूलों के गठन की तैयारी में शिक्षा विभाग जुट गया है।
हिमाचल वन विभाग के लिए जी का जंजाल बनी पीएमओ की चिट्ठी, जानें पूरा मामला

पीएमओ के निर्देश पर केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय ने इस संबंध में उपयुक्त कार्रवाई करने के लिए कहा है।
पर्यटन उद्योग पर दोहरे टैक्स की मार, सैलानी रद्द करवाने लगे हिमाचल की बुकिंग

दिवाली की छुट्टियों से लेकर क्रिसमस और न्यू ईयर के लिए शिमला, मनाली, धर्मशाला सहित अन्य पर्यटन स्थलों पर की गई कमरों की एडवांस बुकिंग सैलानी रद्द करवा रहे हैं।
: मलबे में दबे लोगों का तुरंत चलेगा पता, जीपीआर यंत्र बनेगा मददगार

शिमला में अब आपदा आने पर आधुनिक लाइफ डिटेक्टिंग डिवाइस और ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडॉर (जीपीआर) यंत्र मददगार होंगे। समरहिल के शिव बावड़ी त्रासदी से सबक लेते हुए जिला प्रशासन इन उपकरणों की खरीद करने जा रहा है।
शोध में खुलासा: मुंह के कैंसर की रोकथाम में तुलसी, एलोवेरा, हल्दी, त्रिफला मददगार

एक अध्ययन के अनुसार तुलसी, एलोवेरा, हल्दी और त्रिफला जैसे सुरक्षित और प्रभावी हर्बल उपचारों को ओएसएमएफ के इलाज के लिए आजमाया गया है।मुंह के कैंसर को रोकने के लिए तुलसी, एलोवेरा, हल्दी और त्रिफला मददगार साबित हो सकते हैं। ओएसएमएफ (ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस) के इलाज के लिए इनको आजमाया गया है। ये संबंधित एंजाइमों को रोककर सूजन को कम करने में सहायक हो सकते हैं। एक अध्ययन के अनुसार तुलसी, एलोवेरा, हल्दी और त्रिफला जैसे सुरक्षित और प्रभावी हर्बल उपचारों को ओएसएमएफ के इलाज के लिए आजमाया गया है। यह अध्ययन एमएन डीएवी डेंटल कॉलेज और अस्पताल तातुल ओच्छघाट की डॉ. रिहू सिद्धू, इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज भुवनेश्वर की डॉ. राधा पी दलाई सहित कुछ विदेशी संस्थानों के विशेषज्ञों ने संयुक्त रूप से किया है। इस अध्ययन के मुताबिक तुलसी से संबंधित जड़ी-बूटी के कई प्रकार के औषधीय उपयोग हैं।
चयापचय और प्रतिरक्षा प्रक्रियाओं में सुधार के लिए आयुर्वेद से तुलसी को कई फॉर्मूलेशन में सुझाया गया है। सूजन पैदा करने वाले एंजाइमों को रोककर यह सूजन को कम करने में सहायता करता है। एलोवेरा एक पौधा है, जिसे घाव भरने वाला हार्मोन भी कहा जाता है और इसमें विटामिन ए, सी, ई, बी1, बी2, बी3, बी6, कोलीन, फोलिक एसिड, बीटा-कैरोटीन और बी12 होता है। यह हानिकारक मुक्त कणों के खिलाफ लड़ाई में मदद करता है। एलोवेरा स्टेरोल्स में बिना किसी नकारात्मक दुष्प्रभाव के सूजन को कम करने की कोर्टिसोन जैसी ही क्षमता होती है। ओएसएमएफ और लाइकेन प्लेनस के इलाज के लिए एलोवेरा दंत चिकित्सा में उपयोगी हो सकता है। ओरल सबम्यूकोस फाइब्रोसिस के इलाज के लिए हर्बल उपचार पर अध्ययन बेहद दुर्लभ हैं।
क्या है ओएसएमएफ
ओरल सबम्यूकोस फाइब्रोसिस (ओएसएमएफ) ओरल म्यूकोसा को प्रभावित करती है। यह सबम्यूकोसा के अंदर घने कोलेजन ऊतक जमाव की विशेषता है और कभी-कभी ग्रसनी और अन्न प्रणाली तक फैल सकता है। मौखिक म्यूकोसा का फूलना, कड़ापन, जलन, ट्रिस्मस, जीभ की गतिशीलता में कमी और स्वाद संवेदना में कमी इस बीमारी की पहचान है। भारत में यह 0.20 से 0.5 प्रतिशत तक लोगों में है। यदि ओएसएमएफ का उपचार नहीं किया जाता है तो यह मौखिक कैंसर में विकसित हो सकता है।
ओएसएमएफ के 24 रोगियों का किया उपचार
निदान के लिए ओएसएमएफ के चौबीस रोगियों को चुना गया। हर समूह में 15 नमूनों के साथ समूह ए-एलोवेरा और समूह बी-तुलसी के रूप में दो उपचार समूहों में विभाजित किया गया। प्रतिभागियों में 20 से 55 वर्ष की आयु सीमा वाले दोनों लिंग शामिल हैं। दवाओं के कारण होने वाले किसी भी प्रणालीगत प्रभाव की जांच के लिए उपचार के पहले और बाद में रक्त के नमूने लिए गए। उपचार से पहले और बाद में, मुंह खुलने और जलन देखी गई। मरीजों को ग्लिसरीन में एक ग्राम एलोवेरा और एक ग्राम तुलसी पाउडर मिलाकर पेस्ट बनाने का निर्देश दिया। मरीजों से कहा गया कि वे इस पेस्ट को अपने मौखिक म्यूकोसा पर दिन में दो से तीन बार लगाएं और खाने या पीने से पहले 10 मिनट तक प्रतीक्षा करें।
Cryptocurrency Fraud Case: क्रिप्टोकरेंसी ठगी मामले में आरोपियों की पांच करोड़ की संपत्ति सीज

क्रिप्टोकरेंसी ठगी के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। मामले की जांच कर रही पुलिस एसआईटी ने आरोपियों की पांच करोड़ रुपये की संपत्ति सीज कर दी है।
मंडी से शुरू होकर पूरे राज्य में फैला क्रिप्टोकरेंसी ठगी का जाल, अब तक नौ आरोपी गिरफ्तार

क्रिप्टोकरेंसी ठगी की शुरुआत जिला मंडी से हुई। यहीं से आरोपियों ने करोड़पति बनने के लिए इस धंधे को अंजाम दिया।
मुंबई में 11 करोड़ का लालच देकर बुजुर्ग दंपत्ती से साढ़े चार करोड़ की ठगी, पढ़ें देश की अन्य खबरें

मुबंई पुलिस ने बताया कि दक्षिण मुंबई के एक बुजुर्ग के साथ 4.35 करोड़ की ठगी हुई है। बुजुर्ग ने 11 करोड़ जीतने के लालच में साढ़े चार करोड़ रुपये गवां दिए। बुुजुर्ग की पत्नी ने थाने में ठगी की शिकायत दर्ज कराई। दिव्यांग जमाता था धौंस तो गला रेतकर ले ली जान, अदरक कारोबारी की हत्या, विवाद में मारी गोली

अचानक वह एक ओर गिर गया और गले से खून का फव्वारा फूट पड़ा। परिवार को समझ नहीं आया कि आखिर क्या हुआ। परिजन उसे अस्पताल लेकर भागे। यहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।
नीता अंबानी बोलीं- लड़कियां-लड़कों के बराबर, हमने व्यापार में तीनों बच्चों को बराबर हिस्सेदारी दी

नीता ने बताया कि हम दोनों ने कभी भी बेटा-बेटी में भेदभाव नहीं किया। मैंने हमेशा तीनों बच्चों को एक समान माना है। मुझे लगता है, जो काम लड़के कर सकते हैं, वह लड़कियां भी कर सकती है। यही मुकेश का भी मानना है और यह उत्तराधिकारी बनाते समय दुनिया ने देखा है।
‘आज लड़कियों को यह समझना होगा कि वे लड़कों के बराबर हैं। मैंने अपने घर में कभी भी तीनों बच्चों आकाश, अनंत और ईशा के बीच कभी भेदभाव नहीं किया। रिलायंस में तीनों को बराबर की हिस्सेदारी दी।’ यह कहना है एशिया के सबसे अमीर उद्योगपति मुकेश अंबानी की पत्नी नीता अंबानी का। हाल ही में एक साक्षात्कार में उन्होंने महिला सश्कतिकरण पर अपनी बात रखी। नीता ने पारिवारिक जीवन में खुलकर बात की, जिसमें पति मुकेश के साथ रिश्ते भी शामिल थे।
मुकेश को पाकर बहुत भाग्यशाली
नीता ने साक्षात्कार में आगे कहा कि हमने एक-दूसरे से बहुत कुछ सीखा है। मैं हमेशा कहती हूं, मुकेश अपने समय से बहुत आगे की सोचते हैं। इसे स्पॉटलाइट कह सकते हैं। मैं हमेशा बच्चों से कहती हूं कि मेरा सबसे महत्वपूर्ण निर्णय सही जीवन साथी चुनना था। मैं मुकेश को पाकर बहुत भाग्यशाली हूं। मुकेश मेरे सबसे अच्छे दोस्त हैं। मेरे जीवन साथी हैं। हमने जीवन के हर चरण का आनंद लिया है। हमने अपने बच्चों को पाला है अब हम अपने पोते-पोतियों का पालन पोषण कर रहे हैं।
मुझे सड़क वाली भेल बहुत पसंद है
उन्होंने आगे कहा कि हम भी वही करते हैं, जो आम पति-पत्नी करते हैं। वह मुझे ड्राइव पर ले जाते हैं। हम हिंदी संगीत सुनते हैं। हम दोनों को स्ट्रीट फूड बहुत पसंद है। मुझे सड़क वाली भेल पसंद है और उन्हें इडली-डोसा। हम अब भी वहीं करते हैं, जो पहले करते थे। हम बड़ों का सम्मान करते हैं। ईमानदार हैं। विनम्र हैं। मुझे लगता है कि हम में बहुत कुछ नहीं बदला है।
बेटी को बेटों के बराबर अधिकार दिए
नीता ने बताया कि हम दोनों ने कभी भी बेटा-बेटी में भेदभाव नहीं किया। मैंने हमेशा तीनों बच्चों को एक समान माना है। मुझे लगता है, जो काम लड़के कर सकते हैं, वह लड़कियां भी कर सकती है। यही मुकेश का भी मानना है और यह उत्तराधिकारी बनाते समय दुनिया ने देखा है। ईशा की शादी परिमल परिवार में हुई है बावजूद इसके उन्हें अपने भाइयों के साथ बराबर हिस्सेदारी मिली है। आकाश, अनंत और ईशा के साथ-साथ पूरी युवा पीढ़ी भारत का नतेृत्व करने वाली हैं।
हमेशा उन्हें अच्छा इंसान बनाने के लिए प्रेरित करती हूं
नीता ने कहा कि मेरे तीनों बच्चों में अलग-अलग गुण हैं। अनंत सबसे छोटे हैं, वे बेहद दयालु हैं। आकाश जियो के माध्यम से डिजिटल क्रांति कर रहे हैं। ईशा रिलायंस फाउंडेशन में सक्रिय हैं और रिटेल का नेतृत्व कर रही हैं। मैं हमेशा अपने बच्चों से कहती हूं कि वह अपने ताकत पर ध्यान दें। खुद को मजबूत बनाएं। कोई भी व्यक्ति पूरा नहीं होता। गलतियों पर ध्यान दें। मैं उन्हें समझाती हूं कि सफलताओं से ज्यादा गलतियों से सीखना चाहिए। मैं उन्हें कहती हूं कि हमेशा विनम्र रहो, दयालु रहो। लोगों का सम्मान करो।
लोस चुनाव से पहले झांसी में शुरू होंगे 6000 करोड़ के छह बड़े प्रोजेक्ट
लोस चुनाव से पहले झांसी में शुरू होंगे 6000 करोड़ के छह बड़े प्रोजेक्ट
खबरों के खिलाड़ी: मोदी के दौर में राज्यों में असली क्षत्रप कौन, केंद्र की योजनाएं राज्यों में कैसे हावी हैं?
पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा मध्य प्रदेश और राजस्थान की हो रही है। पूरा फोकस सरकार की योजनाओं और चेहरों पर है। जानिए इस पर किस दल की कैसी रणनीति है?
जैन समाज चुनाव के द्वितीय चरण में सौरभ बने निर्विरोध कोषाध्यक्ष
ललितपुर। दिगंबर जैन पंचायत समिति के द्विस्तरीय चुनाव में 47 पदों के लिए 88 प्रत्याशियों ने अभिनंदनोदय तीर्थ चुनाव कार्यालय में नामांकन पत्र दाखिल किए।
राम शंकर द्विवेदी जिलाध्यक्ष, दिलीप चौरसिया जिलामंत्री बने
उत्तर प्रदेश राजस्व निरीक्षक संघ जनपद शाखा के द्विवार्षिक चुनाव में राम शंकर द्विवेदी को जिलाध्यक्ष एवं दिलीप चौरसिया को जिलामंत्री चुना गया।
जीत के लिए भाजपा को भेदना होगा सुरक्षित सीटों का चक्रव्यूह, पिछले चुनाव में रहा बुरा प्रदर्शन

मध्य प्रदेश में भी भाजपा को सुरक्षित सीटों पर बुरे प्रदर्शन की कीमत सत्ता गंवा कर चुकानी पड़ी थी। राज्य में सुरक्षित सीटों की संख्या 82 है। भाजपा को इनमें से महज 25 सीटें मिली थीं। 2013 के चुनाव में पार्टी को 53 सीटें मिली थीं। कांग्रेस को 2013 की तुलना में 28 सीटों का लाभ मिला था।
पांच राज्यों में से तीन राज्यों मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में सत्ता की सीढ़ी एससी-एसटी वर्ग के मतदाता हैं। तीनों ही राज्यों में जीत हासिल करने के लिए भाजपा को सुरक्षित सीटों का तिलिस्म तोड़ना होगा। बीते चुनाव में इन सीटों पर बुरे प्रदर्शन ने पार्टी की सत्ता से विदाई की पटकथा लिखी थी। दरअसल कांग्रेस ने दो तिहाई सुरक्षित सीटों पर जीत हासिल कर भाजपा के सत्ता बरकरार रखने के सपने पर ग्रहण लगा दिया था।
गौरतलब है कि इन तीनों राज्यों में विधानसभा सीटों की संख्या 520 है। इनमें से करीब 35 फीसदी (180) सीटें एससी-एसटी उम्मीदवारों के लिए सुरक्षित हैं। बीते विधानसभा चुनाव में भाजपा इनमें से एक तिहाई से भी कम सीटों पर जीत हासिल कर पाई। साल 2013 के चुनाव में सुरक्षित सीटें ही भाजपा की ताकत थीं। खासतौर पर सुरक्षित सीटों पर भाजपा ने साल 2013 के मुकाबले राजस्थान और मध्यप्रदेश में बेहद बुरा प्रदर्शन किया था।
मध्य प्रदेश में भी मिली थी निराशा
मध्य प्रदेश में भी भाजपा को सुरक्षित सीटों पर बुरे प्रदर्शन की कीमत सत्ता गंवा कर चुकानी पड़ी थी। राज्य में सुरक्षित सीटों की संख्या 82 है। भाजपा को इनमें से महज 25 सीटें मिली थीं। 2013 के चुनाव में पार्टी को 53 सीटें मिली थीं। कांग्रेस को 2013 की तुलना में 28 सीटों का लाभ मिला था। पार्टी को 82 में से 40 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। भाजपा की जीती हुई सीटों की संख्या बीते चुनाव के मुकाबले करीब आधी रह गई थी, जबकि कांग्रेस की जीती सीटों की संख्या 12 से बढ़ कर 40 हो गई थी।
छग में भी लगा झटका
भाजपा को 2013 के चुनाव के मुकाबले 2018 में सुरक्षित सीटों के मामले में छत्तीसगढ़ में भी बड़ा झटका लगा था। राज्य में एससी और एसटी सुरक्षित सीटों की संख्या 39 है। पार्टी को इनमें से महज छह सीटों पर ही जीत हासिल हुई थी। साल 2013 में भाजपा को एससी सुरक्षित दस में से नौ सीटें मिली थी जो 2018 में घट कर दो रह गई। इसी प्रकार पार्टी को एसटी सुरक्षित 29 में से महज चार सीटें मिली। सुरक्षित सीटों पर बुरे प्रदर्शन के कारण कांग्रेस को राज्य में तीन चौथाई बहुमत हासिल हो गया।
राजस्थान में एससी सुरक्षित सीटों ने डुबो दी थी नैया
राजस्थान में एसटी सुरक्षित 25 और एससी सुरक्षित 34 सीटें हैं। साल 2013 के चुनाव में भाजपा ने एससी सुरक्षित 34 में से 32 सीटें जीत कर सरकार बनाई थी। हालांकि बीते चुनाव में यह संख्या घट कर 11 हो गई। वहीं कांग्रेस जिसे तब एक भी सीट पर जीत नहीं मिली थी उसने 21 सीटों पर जीत दर्ज की। एसटी सुरक्षित सीटों पर भी कांग्रेस भाजपा पर भारी पड़ी थी। भाजपा को 2013 के चुनाव के मुकाबले 13 की जगह 10 सीटें मिली थी, जबकि कांग्रेस ने सात की जगह 13 सीटें जीती थीं।अपनी प्रतिक्रिया
सूर्यप्रकाश अध्यक्ष व राजेश बने प्रबंधक
खेसरहा ब्लॉक क्षेत्र के तपानाथ सरस्वती इंटर कॉलेज धमौरा की प्रबंध समिति का चुनाव रविवार को पर्यवेक्षक राम नवल की देखरेख में संपन्न हुआ।
चुनावी रणनीति: 125 सीटों पर मोदी को रोकने का प्लान तैयार, RSS की स्टाइल में काम करेंगे ये कार्यकर्ता

योजना से जुड़े एक कार्यकर्ता ने अमर उजाला को बताया कि इन 125 सीटों की पहचान उत्तर से लेकर दक्षिण तक देश के विभिन्न राज्यों से की गई है। जिन सीटों पर भाजपा के उम्मीदवारों ने विपक्षी दलों से बहुत कम मार्जिन से जीत हासिल की है, उन पर लोगों को मोबिलाइज किया जाएगा..
चुनावी दशहरे में रावण-हनुमान की सबसे ज्यादा डिमांड, राम-दुर्योधन बताकर भी हो रहे हैं राजनीतिक हमले

भाजपा प्रवक्ता जयराम विप्लव ने अमर उजाला से कहा कि सभी राजनीतिक दल के नेताओं को यह समझना पड़ेगा कि यदि वे आज किसी दूसरी पार्टी के नेता के प्रति अमर्यादित टिप्पणी करेंगे, तो दूसरे दल के कार्यकर्ता भी उनके प्रति उसी तरह की टिप्पणी कर सकते हैं। इससे केवल राजनीतिक माहौल दूषित होता है और नेताओं के प्रति जनता में नकारात्मक विचार बनते हैं…
नवरात्रि और दशहरे का त्योहारी मौसम करीब आ गया है। इस दौरान रावण, मेघनाथ और कुंभकर्ण के पुतलों की सबसे ज्यादा मांग रहती है, जिन्हें जलाकर लोग इस त्योहार को मनाते हैं। लेकिन इसी समय देश के चुनावी मौसम में भी खूब गर्मी आ गई है। सभी दल इसके लिए अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुट गए हैं। अपने राजनीतिक विरोधियों पर हमला करने के लिए उन्हें रावण, मेघनाथ, कुंभकर्ण, सुपर्णखा, दुर्योधन और दुशासन बताया जा रहा है, तो अपनी पार्टी के नेताओं को भारत माता और राम बताकर उनका महिमामंडन किया जा रहा है। इस पर खूब विवाद भी हो रहा है, लेकिन सोशल मीडिया इस तरह के चित्रों से भरा पड़ा है।
राहुल को रावण बताने पर विवाद
सबसे ताजा विवाद भाजपा के उस फोटो पर हो रहा है, जिसमें कांग्रेस नेता राहुल गांधी को ‘नये युग का रावण’ करार दिया गया है। भाजपा ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल (अब एक्स) से पांच अक्तूबर को एक ट्वीट किया, जिसमें राहुल गांधी को नए युग का रावण बताया और कहा कि उनका काम राम विरोधी और धर्म विरोधी होता है। भाजपा ने अपने इस ट्वीट में राहुल गांधी पर भारत को नष्ट करने का लक्ष्य रखने का आरोप भी लगाया है।
भाजपा ने राहुल गांधी पर यह हमला ऐसे समय में किया है, जब सनातन विवाद सुर्खियां बना हुआ है। इंडिया गठबंधन के अनेक दल लगातार सनातन विरोधी बयान दे रहे हैं। भाजपा उन पर सनातन विरोधी होने का आरोप लगा रही है।
राजनीतिक बहस को गिराने का आरोप
भाजपा के इस ट्वीट पर कांग्रेस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। प्रियंका गांधी अपने भाई के बचाव में उतरीं और कहा कि आखिर आप राजनीतिक बहस को किस स्तर तक ले जाना चाहते हैं। उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को टैग करते हुए पूछा कि क्या अपनी पार्टी के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से किए जा रहे इन भड़काऊ और हिंसात्मक ट्वीट से आप सहमत हैं।
भाजपा ने दिया जवाब
प्रियंका गांधी के इस बयान के बाद भाजपा नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने कांग्रेस नेता श्रीनिवास बीवी के द्वारा 2018 में जारी किया गया वह आपत्तिजनक पोस्टर ट्वीट कर दिया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आपत्तिजनक रूप में दिखाया गया था। इस चित्र में पीएम के एक तरफ कुछ उद्योगपतियों के चेहरे लगाए गए थे, तो दूसरी ओर भाजपा के कुछ अन्य नेताओं के चेहरे दिखाई गए थे।
भाजपा नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने कहा है कि कांग्रेस को इस तरह का ट्वीट करने से पहले अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। यदि वे देश के सबसे लोकप्रिय नेता पर गलत तरह से हमला करेंगे, तो उन्हें भी उसी तरह के हमले के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने प्रियंका गांधी को टैग करते हुए पूछा है कि प्रियंका गांधी जी आखिर इसकी शुरूआत किसने की थी?
अखिलेश यादव को बताया कृष्ण
इसके पहले यूपी विधानसभा चुनाव 2022 के पहले समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव को उनके समर्थकों ने भगवान कृष्ण के रूप में दिखाया था। रायबरेली में उनकी एक यात्रा से पहले गली-चौराहे पर इस तरह के पोस्टर लगाकर उनका स्वागत किया गया था। भाजपा ने इस पोस्टर पर आपत्ति जताई थी।
लालू बने विष्णु तो तेजस्वी बने कृष्ण
इस समय राष्ट्रीय जनता दल के नेता और नीतीश सरकार में मंत्री चंद्रशेखर के सनातनविरोधी बयानों के कारण विवाद मचा हुआ है। लेकिन लगभग एक साल पहले राजद नेताओं ने स्वयं अपने नेताओं को विष्णु और कृष्ण के रूप में दिखाया था। पिछले वर्ष दशहरे के पूर्व राजद कार्यालय के बाहर पटना में एक पोस्टर लगाया गया था। इसमें लालू यादव को विष्णु, नीतीश कुमार को अर्जुन और तेजस्वी यादव को उनके सारथी कृष्ण के रूप में दिखाया गया था। भाजपा के शीर्ष नेताओं को इस पोस्टर में अहंकार और अधर्म के प्रतीक के रूप में दिखाया गया था जिसका भाजपा ने कड़ा विरोध किया था।
सोनिया गांधी को दिखाया भारत माता
पिछले महीने सितंबर माह में कांग्रेस की एक रैली तेलंगाना के हैदराबाद शहर में हुई थी। इस रैली के पहले कांग्रेस नेताओं ने सोनिया गांधी को दुर्गा और भारत माता के रूप में पोस्टरों में दिखाया था। भाजपा ने इसकी यह कहकर आलोचना की थी कि कांग्रेस पहले से ‘इंदिरा इज इंडिया, इंडिया इज इंदिरा’ वाली सोच की रही है। पार्टी ने कहा था कि कोई भी व्यक्ति भारत माता के बराबर नहीं हो सकता।
हनुमान बनने की सबमें होड़
फिलहाल, इस मामले में सभी देवताओं में हनुमान जी सबके प्रिय बने हुए हैं। दिल्ली विधानसभा चुनाव के पहले आम आदमी पार्टी ने हनुमान का पक्ष लिया था और उसे जीत मिली थी। कर्नाटक में भी जब भाजपा के राम के सामने कांग्रेस ने भगवान हनुमान को अपना ‘हथियार’ बनाया और उसे जीत मिली। मध्यप्रदेश में कमलनाथ स्वयं को हनुमान के रोल में ही दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। उनके समर्थक उन्हें हनुमान भक्त बताकर एक पार्टी विशेष को नष्ट करने की बात कर रहे हैं।
टीएमसी के पोस्टर पर विवाद
पिछले वर्ष फरवरी 2022 में तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने ममता बनर्जी को दुर्गा माता के रूप में दिखाया था तो प्रधानमंत्री को गलत तरीके से प्रस्तुत किया था। भाजपा ने इस पोस्टर पर खूब आपत्ति जाहिर किया था। जुलाई 2016 में भाजपा नेता दयाशंकर सिंह और बसपा नेताओं का विवाद हो गया था। इस विवाद के बाद प्रयागराज में एक पोस्टर लगा था जिस पर खूब विवाद हुआ था। पोस्टर में दयाशंकर सिंह को अर्जुन, उनकी पूर्व पत्नी स्वाती सिंह को दुर्गा और मायावती को एक आपत्तिजनक चरित्र के रूप में दर्शाया गया था।
गलत सोच से बचना ही सबके लिए सही
भाजपा प्रवक्ता जयराम विप्लव ने अमर उजाला से कहा कि सभी राजनीतिक दल के नेताओं को यह समझना पड़ेगा कि यदि वे आज किसी दूसरी पार्टी के नेता के प्रति अमर्यादित टिप्पणी करेंगे, तो दूसरे दल के कार्यकर्ता भी उनके प्रति उसी तरह की टिप्पणी कर सकते हैं। इससे केवल राजनीतिक माहौल दूषित होता है और नेताओं के प्रति जनता में नकारात्मक विचार बनते हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक पर्यावरण को दूषित होने से बचाने के लिए इसको साफ-स्वच्छ रखने में सबको अपनी जिम्मेदारी निभानी पड़ेगी और अपनी-अपनी पार्टी के अतिउत्साही कार्यकर्ताओं पर लगाम लगानी पड़ेगी।
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पंजाब के बाद चंडीगढ़ पहुंची आप और कांग्रेस की लड़ाई

इन दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर कई राज्यों में खींचतान चल रही है। अब नया झगड़ा चंडीगढ़ में सामने आया है। चंडीगढ़ लोकसभा सीट के लिए दोनों ही दल दावा कर रहे हैं। कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी को चुनाव से बाहर होने की अपील की है।





