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इंदौर की तरह पीपीपी मोड पर कूड़ा प्रबंधन करने को चेन्नई की कंपनी तैयार, देगी प्रेजेंटेशन

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लुधियाना

एटूजेड कंपनी से अनुबंध टूटे 14 दिन बीत चुके हैं। वहीं, भाजपा ने मेयर पर अपने स्तर पर फैसले लेते हुए निजी लोगों को फायदा पहुंचाने की तैयारी करने के आरोप लगाए थे। विपक्ष के विरोध और आरोपों पर विराम लगाते हुए मेयर बलकार सिंह संधू ने शनिवार को ऑल पार्टी मीटिंग बुलाई।

इस मीटिंग में मेयर संधू ने इंदौर की तरह पीपीपी मोड पर कूड़े की प्रोसेसिंग और लिफ्टिंग के तरीके पर संज्ञान लेते हुए सभी पार्षदों के समक्ष ये बात रखी की पांच कंपनियों से उनका संपर्क हुआ है। इनमें से चेन्नई की एक कंपनी लुधियाना आ रही है। कंपनी सोमवार को मीटिंग के दौरान प्रेजेंटेशन देते हुए ये स्थिति स्पष्ट करेगी कि यहां पर कैसे कूड़ा प्रबंधन किया जाए जिससे निगम को ही मुनाफा हो। मीटिंग में प्रेजेंटेशन के बाद पार्षदों भी प्रतिक्रिया दे सकते हैं।

उनकी सहमति से ही टेंडर काॅल किए जाएंगे। मेयर कैंप ऑफिस में मेयर बलकार संधू द्वारा बुलाई मीटिंग में पहुंचे भाजपा समेत लिप, आप, कांग्रेसी, शिअद के पार्षदों ने भी सहमति जताते हुए इंदौर की तर्ज पर ही यहां भी कूड़ा प्रबंधन करने पर जोर दिया। सबने एक सुर में ऐसी कंपनी को कूड़ा प्रबंधन करने देने की बात कही जो निगम को पैसा दे न कि निगम पर वित्तीय बोझ डाले।

वहीं हाउस मीटिंग में भी इस संबंध में एजेंडा रखा जाएगा और सभी पार्षदों की सहमित के बाद ही फैसला लिया जाएगा मीटिंग में सीनियर डिप्टी मेयर शाम सुंदर मल्होत्रा, भाजपा के लोकल बॉडी सेल इंचार्ज इंदर अग्रवाल, सुनीता शर्मा, लिप के स्वर्णदेप सिंह, शिअद के हरभजन डंग, जसपाल सिंह, कांग्रेस पार्षद ममता आशु, डॉ जयप्रकाश भी मौजूद थे।

कंपनी लगाएगी प्लांट, कूड़े से बनाएगी बाल्टियां

मेयर ने बताया कि कूड़े की लिफ्टिंग व प्रोसेसिंग के लिए निगम ने देश की प्रमुख 5 कंपनियों को शॉर्ट लिस्ट किया है। इनमें से एक कंपनी चेन्नई की है। इस कंपनी ने कूड़े से बाल्टियां बनाने का दावा किया है। इसके लिए कंपनी 10 करोड़ की लागत से एक हाईटैक प्लांट स्थापित करेगी।

मीटिंग के दौरान पार्षदों ने मेयर से एटूजेड के काम छोड़ने का कारण भी पूछा। इस पर मेयर ने बताया कि पीपीसीबी ने खुद एटूजेड को कूड़े की सही से सेग्रीगेशन व प्रोसेसिंग न करते हुए पकड़ा है। एनजीटी की ओर से भी एटूजेड को हटाने का प्रयास किया जा रहा था। वहीं, निगम कूड़े के सेग्रीगेशन, लिफ्टिंग व प्रोसेसिंग के अलग-अलग टेंडर लगाने पर भी विचार कर रही है। अगर इस विचार को हाउस की मंजूरी मिलती है, तो इन सभी कामों के लिए अलग-अगल टेंडर लगा विभिन्न कंपनियों को काम सौंपा जाएगा।

इधर, क्वालिटी कंट्रोल टीम को मिली दोबारा मंजूरी

मीटिंग में मेयर बलकार संधू ने क्वालिटी कंट्रोल टीम को दोबारा से बहाल करने का निर्णय लिया है। टीम में शामिल काॅन्ट्रेक्ट मुलाजिमों को बकाया सैलरी भी जल्द दे दी जाएगी। बता दें कि भास्कर ने ये मुद्दा गंभीरता से उठाया कि शहर में नई बन रही सड़कों के मामले में पहले क्वालिटी कंट्रोल टीम ने ये खुलासा किया था कि यहां पर ठेकेदारों की तरफ से घटिया क्वालिटी की सड़कें बनाई जा रही हैं। ऐसे में निगम की तरफ से क्वालिटी कंट्रोल टीम को ही खत्म कर दिया गया है।

इस पर विपक्ष ने फिर से मुद्दा उठाया तो मेयर संधू ने शनिवार को ही ये खुलासा किया कि क्वालिटी कंट्रोल टीम को दोबारा से मंजूरी दे दी है। बता दें कि क्वालिटी कंट्रोल टीम ने शहर के विभिन्न इलाकों में सड़क निर्माण में घटिया मैटीरियल इस्तेमाल करने का मामला उजागर किया था। इसके बाद क्वालिटी कंट्रोल टीम को खत्म करने की साजिशें शुरू हो गई थी। निगम ने भी टीम खत्म करने के आदेश जारी कर दिए थे।

Ramswaroop Mantri

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