रायपुर
राजधानी के स्टेशन से करीब 11 महीने बाद शुक्रवार को सुबह साढ़े 7 बजे पहली लोकल दुर्ग के लिए रवाना हुई और इसी के साथ लोकल ट्रेनें चलने का सिलसिला शुरू हो गया। कोरोना काल से पहले तक खचाखच भरकर दुर्ग जाने वाली और इससे बुरे हाल में वहां से आने वाली इस ट्रेन में पहले दिन रायपुर से केवल 7 यात्री रवाना हुए, जबकि इसकी क्षमता 1400 सीटों की है। इसके अलावा राजधानी से सुबह से शाम तक कुल 3 लोकल ट्रेनें रवाना हुईं और सभी खाली-खाली चलीं।
यात्रियों में इसके किराए की भी चर्चा रही। रायपुर से दुर्ग का किराया लोकल में 10 रुपए लगता था, लेकिन स्पेशल लोकल के नाम पर 30 रुपए वसूले गए। राजधानी से शुक्रवार को बिलासपुर और डोंगरगढ़ के लिए भी लोकल ट्रेनें चली हैं। केवल बिलासपुर की ट्रेन में ही शतक पार हुआ, यानी 115 यात्रियों ने सफर किया। शाम साढ़े 5 बजे छूटी डोंगरगढ़ लोकल में 52 यात्री थे। लोकल ट्रेनें सिर्फ रायपुर ही नहीं, बिलासपुर और दुर्ग से भी चली हैं। इस तरह, पहले दिन कुल मिलाकर 5 लोकल ट्रेनें शुरू की गई हैं।
सात और ट्रेनें 15 तक
रेलवे अफसरों ने दावा किया कि पहले दिन लोगों को टिकट बुकिंग के अलावा ट्रेनों का टाइम टेबल ठीक से पता नहीं था, इसलिए मुसाफिर ज्यादा नहीं मिले। जैसे-जैसे ट्रेनें बढ़ेंगी, मुसाफिरों की संख्या बढ़ती जाएगी। राजधानी से 15 फरवरी तक कुल 7 लोकल ट्रेनें चलने लगेंगी। प्रदेश के अन्य बड़े स्टेशनों के मिलाक 12 ट्रेनें शुरू की जाएंगी।
किराया भी तीन गुना
लोकल ट्रेनों को स्पेशल के तौर पर चलाने की वजह से इनका किराया मेल-एक्सप्रेस जैसा हो गया है। कोरोना काल से पहले राजधानी से दुर्ग का लोकल का किराया 10 रुपए था, लेकिन शुक्रवार को इसका टिकट 30 रुपए में दिया गया। लगभग हर स्टेशन के लिए किराया तीन गुना वसूलने का अनुमान है। टिकट जनरल काउंटरों से दिए जा रहे हैं।





