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*शाश्वत प्रेम*

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तुम वो फूल हो
जिसको मैं बिना स्पर्श के
खिलता हुआ
और महकता हुआ
देखना चाहता हूं।

तुम मेरी वो
अधूरी ख्वाहिश हो
जिसके पूरे होने का
इंतजार मैंने कई
युगों तक किया है।

तुम मेरे जीवन का
वो अंतिम अध्याय हो
जिसके पूरा होने पर
शाश्वत आनंद
मुझे स्पर्श कर जाएगा।

डॉ.राजीव डोगरा
कांगड़ा हिमाचल प्रदेश (युवा कवि लेखक)
(हिंदी अध्यापक)
पता-गांव जनयानकड़
पिन कोड -176038
कांगड़ा हिमाचल प्रदेश
rajivdogra1@gmail.com

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