विधानसभा चुनाव के मुहाने पर खड़े मध्यप्रदेश में शनिवार को मंत्रिमंडल में तीन नए मंत्री शामिल किए गए। बुंदेलखंड, बघेलखंड और महाकौशल से आने वाले तीन विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई। इसके बावजूद मंत्रिमंडल में क्षेत्रीय और जातिगत असंतुलन के चलते असंतोष के स्वर सुनाई पड़ रहे हैं। 33 मंत्रियों में 12 सवर्ण समेत लगभग हर समुदाय का प्रतिनिधित्व है। इसके बावजूद क्यों असंतोष है? किस अंचल की उपेक्षा की गई? आगामी विधानसभा चुनाव पर इसका क्या असर पड़ेगा? पढ़ें दैनिक भास्कर की इस खास रिपोर्ट में…
महाकौशल की 38 सीटों में भाजपा के 13 विधायक हैं। इसमें भी सबसे अधिक जबलपुर-कटनी जिले से 7 विधायक जीत कर सदन में पहुंचे हैं। बावजूद मंत्रिमंडल में दोनों जिलों से किसी विधायक को मंत्री नहीं बनाया गया है। बालाघाट जिले से जीते दोनों विधायक अब मंत्री हो गए हैं। इसे लेकर महाकौशल में लोगों की नाराजगी देखी जा रही है। भाजपा के कई विधायक भी अंदरखाने इस उपेक्षा को लेकर नाराज हैं। भाजपा के कद्दावर नेता जबलपुर के पाटन से विधायक अजय विश्नोई तो चुनाव से ठीक पहले होने वाले इस मंत्रिमंडल विस्तार के खिलाफ थे। उन्होंने बयान देकर पार्टी को नसीहत भी दी थी कि आखिरी समय में मंत्रिमंडल विस्तार से फायदा कम, नाराजगी अधिक होगी।
महाकौशल की तरह ही निमाड़ को भी उपेक्षित रखा गया है। यहां की 11 सीट पर 6 भाजपा विधायक जीते हैं, लेकिन केवल एक मंत्री बड़वानी से बनाया गया है।
ग्वालियर-चंबल में हर दूसरा विधायक मंत्री
ग्वालियर-चंबल अंचल में पार्टी के पास 14 विधायक हैं। यहां से 8 विधायकों को मंत्री बनाया गया है। मतलब औसतन हर दूसरा विधायक मंत्री है। मालवा के 27 विधायकों में 7 मंत्री हैं। बुंदेलखंड में 19 विधायकों में 6 मंत्री हैं। दोनों अंचलों में हर तीसरा विधायक मंत्री है। बघेलखंड और मध्य अंचल में पार्टी के 24-24 विधायकों पर पांच-पांच मंत्री हैं। यहां हर पांचवां विधायक मंत्री है।
जातीय संतुलन के चक्कर में असंतुलित हो गया मंत्रिमंडल
चुनाव से ऐन पहले तीन मंत्रियों को बनाने के पीछे जातीय समीकरण देखे गए हैं। बावजूद इसके मंत्रिमंडल में जातीय असंतुलन देखा जा सकता है। मंत्रिमंडल में सबसे अधिक 12 मंत्री सवर्ण हैं। प्रदेश में ओबीसी की आबादी 49 प्रतिशत है, लेकिन सिर्फ 12 ओबीसी मंत्री हैं। इसी तरह आदिवासियों को लुभाने में भले ही पार्टी हर कवायद में जुटी है, लेकिन मंत्रिमंडल में इस समुदाय के 4 लोग ही मंत्री हैं। यही हाल एससी विधायकों का है। 18 एससी विधायक पार्टी से जीते हैं, लेकिन मंत्री सिर्फ तीन बने हैं। एक-एक विधायक जैन और सिख हैं।
मंत्रिमंडल में पांचवीं पास से लेकर पीएचडी तक
शिवराज मंत्रिमंडल में भले ही क्षेत्रीय और जातीय असंतुलन दिखता हो, लेकिन शिक्षा के नजरिए से संतुलित है। शिवराज मंत्रिमंडल के 33 मंत्रियों में सिर्फ 5 ही 12वीं से कम पढ़े-लिखे हैं। 28 मंत्रियों में इंजीनियर, डॉक्टर, वकील, पीएचडी कर चुके लोग शामिल हैं। गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा पीएचडी, उषा ठाकुर एमए, एमफिल, डॉ. अरविंद भदौरिया एलएलबी, एमए, पीएचडी और उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव एलएलबी, एमए, एमबीए व पीएचडी कर चुके हैं। पशुपालन मंत्री प्रेम सिंह पटेल पांचवीं पास हैं। इसी तरह बृजेंद्र सिंह यादव आठवीं और सुरेश धाकड़ 10वीं पास हैं।
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45 से 73 साल की उम्र वाले मंत्री, महिला सिर्फ तीन
शिवराज मंत्रिमंडल में सबसे कम उम्र के विधायक राहुल सिंह लोधी हैं। उनकी उम्र 45 वर्ष है। सबसे अधिक उम्र के मंत्री बिसाहूलाल हैं। उनकी उम्र 73 साल हो चुकी है। अनुभव की बात करें तो गोपाल भार्गव 8 बार के विधायक हैं। विजय शाह और गौरीशंकर बिसेन 7वीं बार विधायक बने हैं। भाजपा को भले ही सबसे अधिक वोट पिछले कुछ चुनावों से महिलाएं देती रही हों, लेकिन मंत्रिमंडल में सिर्फ तीन ही महिला विधायक मंत्री हैं।
सीएम खुद डैमेज कंट्रोल की कमान संभाल रहे
मंत्रिमंडल में महाकौशल की उपेक्षा और नाराजगी से पार्टी भी वाकिफ है। यही कारण है कि सीएम शिवराज सिंह सबसे अधिक दौरे जबलपुर में कर रहे हैं। हर महीने एक से दो कार्यक्रम उनके जबलपुर में तय हो रहे हैं। यहां तक कि महाकौशल या बघेलखंड के किसी हिस्से में जाना भी होता है, तो वे जबलपुर होकर ही जाते हैं। कई बार सीएम महाकौशल की उपेक्षा पर बोल भी चुके हैं कि यहां की जिम्मेदारी मेरी है। प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा एक समय तक जबलपुर में ही सक्रिय रह चुके हैं। उनका भी अक्सर दौरा यहां होता रहता है।
आधा दर्जन मंत्रियों के टिकट कटने के आसार
भाजपा से जुड़े सूत्रों की मानें तो 33 मंत्रियों में आधा दर्जन के टिकट पार्टी काट सकती है। इसमें ग्वालियर चंबल, मालवा-निमाड़, महाकौशल और बघेलखंड के कुछ चेहरे शामिल हैं। इन मंत्रियों की रिपोर्ट ठीक नहीं बताई जा रही है। इसमें दो से तीन विधायक अधिक उम्र होने के चलते दौड़ से बाहर हो सकते हैं। उनकी सीट पर उनके ही परिवार के किसी सदस्य को मौका दिया जा सकता है।
चुनाव के मुहावरे बदल चुके हैं
राजनीतिक विश्लेषक गिरिजा शंकर कहते हैं कि जातीय और क्षेत्रीय असंतुलन का चुनाव में फायदा-नुकसान के मुहावरे बदल चुके हैं। ये 80-90 के दशक में होता था। ये 2023 है। अब इसे नए तरीके से देखने की जरूरत है।
शिवराज मंत्रिमंडल के कैबिनेट मंत्री-
डॉ. नरोत्तम मिश्रा (63)- गृह, जेल, संसदीय कार्य, विधि एवं विधायी कार्य मंत्री। 6वीं बार विधायक बने हैं। 1990 में पहली बार एमएलए बने थे।
दतिया (बुंदेलखंड)
जाति-ब्राह्मण
शिक्षा-पीएचडी
गोपाल भार्गव (71)- लोक निर्माण, कुटीर एवं ग्रामोद्योग. मंत्री। 8वीं बार विधायक बने हैं। 1985 में पहली बार एमएलए बने थे।
सागर (बुंदेलखंड)
जाति-ब्राह्मण
शिक्षा-पीजी
तुलसीराम सिलावट (68)- जल संसाधन, मछुआ कल्याण तथा मत्स्य विकास मंत्री। 5वीं बार के विधायक हैं। 1985 में पहली बार एमएलए बने थे।
इंदौर (मालवा)
जाति-एससी
शिक्षा-एमए
डॉ. (कुं.) विजय शाह (61)- वन मंत्री। 7वीं बार विधायक चुने गए हैं। 1990 में पहली बार एमएलए बने थे।
हरदा (भोपाल-नर्मदापुरम अंचल)
जाति-एसटी
शिक्षा-एमए
जगदीश देवड़ा (66)- वाणिज्यिक कर, वित्त योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी मंत्री। 6वीं बार विधायक बने हैं। 1990 में पहली बार एमएलए बने थे।
नीमच (मालवा)
जाति-एससी
शिक्षा-एमए, एलएलबी
बिसाहूलाल सिंह (73)- खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री। 6वीं बार विधायक बने हैं। 1980 में पहली बार एमएलए बने थे।
अनूपपुर (बघेलखंड)
जाति-एसटी
शिक्षा-एमए
यशोधरा राजे सिंधिया (67)- खेल एवं युवा कल्याण, तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री। चौथी बार विधायक बनी हैं। 1998 में पहली बार एमएलए बनीं।
सागर (ग्वालियर-चंबल)
जाति-कुनबी
शिक्षा-स्नातक
भूपेन्द्र सिंह (63)- नगरीय विकास एवं आवास मंत्री। चौथी बार के विधायक हैं। 1993 में पहली बार एलएलए बने।
सागर (बुंदेलखंड)
जाति-ओबीसी
शिक्षा-एलएलबी
कु.मीना सिंह मांडवे (63)- आदिम जाति कल्याण, अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री। 5वीं बार विधायक बने हैं। 1996 में पहली बार एमएलए बनीं।
उमरिया (बघेलखंड)
जाति-एसटी
शिक्षा-एमए
कमल पटेल (62)- किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री। 5वीं बार विधायक बने हैं। 1993 में पहली बार एमएलए बने थे।
हरदा (भोपाल-नर्मदापुरम अंचल)
जाति-पटेल
शिक्षा-बीकॉम, एलएलबी
गोविन्द सिंह राजपूत (62)- राजस्व, परिवहन मंत्री। चौथी बार विधायक हैं। 2003 में पहली बार एमएलए बने थे।
सागर (बुंदेलखंड)
जाति-क्षत्रिय
शिक्षा-बीए, एमबीए
बृजेन्द्र प्रताप सिंह (56)- खनिज साधन, श्रम मंत्री। तीसरी बार विधायक बने हैं। 2003 में पहली बार एमएलए बने थे।
पन्ना (बुंदेलखंड)
जाति-क्षत्रिय
शिक्षा-बीकॉम, एलएलबी
विश्वास सारंग (51)- चिकित्सा शिक्षा, भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास मंत्री। तीसरी बार विधायक हैं। 2008 में पहली बार एमएलए बने।
भोपाल (भोपाल-नर्मदापुरम अंचल)
जाति-कायस्थ
शिक्षा-बीई (सिविल)
डॉ. प्रभुराम चौधरी (65)- लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री। चौथी बार विधायक हैं। 2008 में पहली बार के एमएलए बने।
रायसेन (भोपाल-नर्मदापुरम अंचल)
जाति-एससी
शिक्षा-एमबीबीएस
डॉ. महेन्द्र सिंह सिसोदिया (61)- पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री। तीसरी बार विधायक हैं। 2013 में पहली बार एमएलए बने।
गुना (ग्वालियर-चंबल)
जाति-क्षत्रिय
शिक्षा-बीएससी (द्वितीय वर्ष)
प्रद्युम्न सिंह तोमर (55)- ऊर्जा मंत्री। तीसरी बार के विधायक। 2008 में पहली बार एमएलए बने।
ग्वालियर (ग्वालिय-चंबल)
जाति-क्षत्रिय
शिक्षा-बीए
प्रेम सिंह पटेल (69)- पशुपालन, सामाजिक न्याय एवं नि:शक्तजन कल्याण मंत्री। पांचवी बार विधायक हैं। 1993 में पहली बार एमएलए बने।
बड़वानी (निमाड़)
जाति-एसटी
शिक्षा-प्राथमिक
ओम प्रकाश सखलेचा (65)- सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री। चौथी बार विधायक हैं। 2003 में पहली बार एमएलए बने।
नीमच (मालवा)
जाति-जैन
शिक्षा-बीकॉम
उषा ठाकुर (56)- पर्यटन, संस्कृति, अध्यात्म मंत्री। तीसरी बार विधायक हैं। 2003 में पहली बार एमएलए बनीं।
इंदौर (मालवा)
जाति-क्षत्रिय
शिक्षा-एमए, एमएड, एमफिल
डॉ. अरविन्द सिंह भदौरिया (56)- सहकारिता,लोक सेवा प्रबंधन मंत्री। दूसरी बार विधायक हैं। 2008 में पहली बार एमएलए बने।
भिंड-(ग्वालियर-चंबल)
जाति-क्षत्रिय
शिक्षा-एमए, एलएलबी, पीएचडी
डॉ. मोहन यादव (58)- उच्च शिक्षा मंत्री। दूसरी बार विधायक हैं। 2013 में पहली बार एमएलए बने।
उज्जैन (मालवा)
जाति-यादव
शिक्षा-बीएससी, एलएलबी, एमए, एमबीए, पीएचडी
हरदीप सिंह डंग (56)- नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा, पर्यावरण मंत्री। तीसरी बार विधायक हैं। 2013 में पहली बार एमएलए बने।
मंदसौर (मालवा)
जाति-सिख
शिक्षा-एमकॉम
राजवर्धन सिंह दत्तीगांव (51)- औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन मंत्री। चौथी बार विधायक हैं। 2003 में पहली बार एमएलए बने।
धार (मालवा)
जाति-क्षत्रिय
शिक्षा-एमए
राजेंद्र शुक्ला (59)- मंत्री विभाग तय नहीं। चौथी बार विधायक हैं । 2003 में पहली बार एमएलए बने।
रीवा (बघेलखंड)
जाति-ब्राह्मण
शिक्षा-एमए
गौरीशंकर बिसेन (71)- मंत्री विभाग तय नहीं। 7वीं बार विधायक हैं। 1985 में पहली बार एमएलए बने।
बालाघाट (महाकौशल)
जाति-बिसेन
शिक्षा-एमए
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शिवराज मंत्रिमंडल के राज्य मंत्री-
भारत सिंह कुशवाहा (53)- उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण (स्वतंत्र प्रभार) नर्मदा घाटी विकास मंत्री। दूसरी बार विधायक हैं। 2013 में पहली बार एमएलए बने।
ग्वालियर (ग्वालियर-चंबल)
जाति-ओबीसी
शिक्षा-हाईस्कूल
इन्दर सिंह परमार (59)- स्कूल शिक्षा (स्वतंत्र प्रभार), सामान्य प्रशासन मंत्री। दूसरी बार विधायक हैं। 2013 में पहली बार एमएलए बने।
शाजापुरा (मालवा)
जाति-परमार ओबीसी
शिक्षा-बीएससी, एलएलबी
रामखेलावन पटेल (66)- पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण (स्वतंत्र प्रभार), विमुक्त घुमक्कड़ एवं अर्द्ध घुमक्कड़ जनजाति कल्याण (स्वतंत्र प्रभार), पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री। दूसरी बार के विधायक हैं। 2008 में पहली बार एमएलए बने।
सतना (बघेलखंड)
जाति-कुर्मी (पटेल)
शिक्षा-एमए, एमकॉम
राम किशोर (नानो) कांवरे (58)- आयुष (स्वतंत्र प्रभार), जल संसाधन मंत्री। दूसरी बार विधायक हैं। 2008 में पहली बार एमएल बने।
बालाघाट (महाकौशल)
जाति-ओबीसी
शिक्षा-एमए
बृजेन्द्र सिंह यादव (55)- लोक स्वास्थ्य एवं यांत्रिकी मंत्री। तीसरी बार विधायक हैं। पहली बार फरवरी 2018 उपचुनाव में जीते थे।
अशोकनगर (ग्वालियर-चंबल)
जाति-यादव
शिक्षा-आठवीं
सुरेश धाकड़ (56)- लोक निर्माण विभाग मंत्री। दूसरी बार विधायक हैं। 2018 में पहली बार एमएलए बने थे।
शिवपुरी (ग्वालियर-चंबल)
जाति-धाकड़
शिक्षा-10वीं
ओ.पी.एस. भदौरिया (55)- नगरीय विकास एवं आवास मंत्री। दूसरी बार विधायक हैं। पहली बार 2018 में एमएलए बने।
भिंड (ग्वालियर चंबल)
जाति-क्षत्रिय
शिक्षा-बीएससी, एमए, एलएलबी
राहुल सिंह लोधी (45)- मंत्री विभाग तय नहीं।
टीकमगढ़ (बुंदेलखंड)
जाति-लोधी
शिक्षा-स्नातक





