अहमदाबाद। पिछले एक सप्ताह से गुजरात की राजनीति में कांग्रेस विधायक और पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष जिग्नेश मेवानी चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। थराड में ड्रग्स मुद्दे पर पुलिस का पट्टा उतारने वाली टिप्पणी के बाद पुलिस परिवारों ने सड़कों पर उतरकर मेवानी का विरोध किया, वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में आम नागरिक मेवानी के समर्थन में सामने आए हैं।
कांग्रेस और स्वयंभू संगठनों द्वारा जगह-जगह ज्ञापन दिए जा रहे हैं। जनता के दबाव के बीच पुलिस ने ड्रग्स और शराब कारोबारियों को उनके धंधे बंद करने की सख़्त चेतावनी दी है।
आम आदमी पार्टी के विधायक गोपाल इटालिया ने भी ड्रग्स के मुद्दे पर मेवानी का समर्थन किया है। उन्होंने कहा, “जिग्नेश भाई ने पुलिस पर जो आरोप लगाए हैं, वह सही हैं। गुजरात पुलिस कमर में पट्टा पहनने के बजाय गले में पहनकर सरकारी टॉमी बनी हुई है। ऐसे पुलिसवालों का पट्टा उतरना ही चाहिए।”
इटालिया ने भाजपा सरकार और गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी पर हमला करने के साथ-साथ कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति पर भी निशाना साधा। उनका आरोप था कि“कांग्रेस के दो राज्यसभा सांसद, 12 विधायक और कई पूर्व विधायक नहीं चाहते कि मेवानी का कद बढ़े। इसलिए ये लोग ड्रग्स के मुद्दे पर उनका समर्थन नहीं कर रहे जबकि आम आदमी पार्टी खुलकर उनके साथ है।”
इटालिया के आरोपों की जनचौक ने पड़ताल की, तो पता चला कि उत्तर गुजरात में सांसद गीनीबेन ठाकोर सहित कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मेवानी के समर्थन में रैलियाँ कर रहे हैं और ज्ञापन भी दे रहे हैं। उत्तर गुजरात में कांग्रेस के प्रदेश स्तर के नेतृत्व द्वारा चलाई जा रही जन आक्रोश यात्रा के दौरान ही ड्रग्स का मुद्दा प्रमुख रूप से सामने आया। प्रदेश कांग्रेस प्रमुख अमित चावड़ा, पाटीदार नेता परेश धनाणी और सेवा दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालजी देसाई खुलकर मेवानी के साथ उतर चुके हैं।
अहमदाबाद और कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति
गुजरात की राजनीति में अहमदाबाद को केंद्र माना जाता है। यहां 16 विधानसभा सीटें हैं और राजनीतिक कहावत है— “गांधीनगर का रास्ता अहमदाबाद से होकर जाता है।”
1987 में भाजपा ने पहली बार अहमदाबाद म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन में सत्ता हासिल की थी और 1990 में जनता दल के साथ गठबंधन कर पहली बार राज्य की सत्ता में आई थी। आज अहमदाबाद भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता है।
पड़ताल में यह भी पता चला कि ऐसे समय में जब पूरे गुजरात में ड्रग्स के मुद्दे पर जनता खुलकर कांग्रेस और मेवानी के पक्ष में है, अहमदाबाद कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता और पार्षद पार्टी लाइन से हटकर काम कर रहे हैं।
शनिवार को शहर कांग्रेस समिति की अध्यक्षा सोनल पटेल के नेतृत्व में पुलिस कमिश्नर ऑफिस से कलेक्टर ऑफिस तक मार्च निकाला गया, जिसमें बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और नागरिक शामिल हुए। मार्च के दौरान भीड़ जबरन जिला अधिकारी कार्यालय के भीतर तक पहुंच गई, हालांकि कोई अप्रिय घटना नहीं हुई।
इस प्रदर्शन में दानिलिमड़ा के कांग्रेस विधायक शैलेश परमार और पूर्व विधायक हिम्मत सिंह पटेल नदारद थे। प्रदर्शन वाले दिन शैलेश परमार ने अपने समर्थकों के साथ गोमतीपुर की एक चाय दुकान पर चाय के साथ वीडियो जारी किया, जिससे संदेश गया कि वह शहर में होने के बावजूद विरोध मार्च में शामिल नहीं हुए। इसे एक चुनौती के रूप मे देखा गया।
नगर निगम में कॉंग्रेस के 24 पार्षद हैं जिस में से लगभग 80 प्रतिशत कांग्रेस पार्षद रैली में मौजूद नहीं थे। कुछ वार्ड प्रमुखों ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया: “हमें हमारे नेताओं (हिम्मत सिंह पटेल और शैलेश परमार) की ओर से निर्देश थे कि रैली में नहीं जाना है।”
मुस्लिम राजनीति और अनुपस्थिति
कांग्रेस के कई वरिष्ठ मुस्लिम नेता भी विरोध प्रदर्शन में सक्रिय नहीं दिखे। पूर्व विधायक गयासुद्दीन शेख और विधायक इमरान खेड़ावाला केवल कमिश्नर ऑफिस तक पहुंचे और वीडियो रिकॉर्ड कर वापस लौट गए। सांसद अमीबेन याज्ञनिक भी अनुपस्थित रहीं।
ड्रग्स जैसे गंभीर मुद्दे के प्रति उदासीनता पर जब जनचौक ने शैलेश परमार और हिम्मत सिंह पटेल से प्रतिक्रिया मांगी तो उन्होंने टिप्पणी करने के बजाय टाल दिया। यह वही नेता हैं जो लम्बे समय से अहमदाबाद में कांग्रेस की राजनीति को नियंत्रित करते रहे हैं। इसी प्रकार के राजनीति की वजह से कांग्रेस धीरे-धीरे निर्धारित मुस्लिम इलाकों तक सीमित होती गई है।
कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश अध्यक्ष वजीर खान ने कहा: “पार्टी एकजुट है। हमें इटालिया के बयान का जवाब देने की जरूरत नहीं। सभी को रैली में जाने की आवश्यकता नहीं है नेताओं के काम बंटे हुए हैं”
वहीं विधायक इमरान खेड़ावाला ने कहा: “हमें गांधी नगर चुनाव आयोग के दफ्तर जाना था, इसलिए हम रैली के साथ कलेक्टर ऑफिस नहीं जा सके कमिश्नरऑफिस पहुंचे थे।”
शहर कांग्रेस अध्यक्षा सोनल पटेल ने कहा: “हम किसी को नोटिस नहीं देंगे। हमारा ध्यान नई नेतृत्व पंक्ति तैयार करने पर है। वह पंक्ति तैयार हो रही है नए लोग रैली में थे किराये की भीड़ नहीं बुलाई गई थी लोगों का समर्थन स्वतः सामने आया है। जिग्नेश मेवानी के पास जितना साहस है, वह किसी के पास नहीं। वह जितने आगे निकल चुके हैं उन्हें अब कोई पीछे नहीं कर सकताl षड्यंत्र कर सकते हैं लेकिन मेवानी जैसा साहस कहां लाएंगे ”
ड्रग्स मुद्दा और राजनीतिक हलचल
गुजरात पिछले तीन दशकों से भाजपा का मजबूत गढ़ है और कांग्रेस मुख्य विपक्षी दल। लेकिन पहली बार जनता किसी मुद्दे पर कांग्रेस के साथ दिखाई दे रही है — वह मुद्दा है: ड्रग्स और शराब के खिलाफ संघर्ष।
गुजरात नशा बंदी वाला राज्य है, इसके बावजूद शराब खुलेआम बिक रही है। ड्रग्स फैक्टरीज पकड़ी जा रही हैं और मिज़ोरम व महाराष्ट्र पुलिस गुजरात में कार्रवाई करती रही है। अनुमान है कि गुजरात में अंग्रेजी शराब का सालाना कारोबार लगभग 50,000 करोड़ रुपये का है, जबकि ड्रग्स का कारोबार इससे कई गुना बड़ा है।
कॉंग्रेस बनाम सरकार
30 जुलाई 2024 को विधानसभा में कांग्रेस नेता अमित चावड़ा ने कहा था: “भाजपा शासन में गुजरात ड्रग्स का लैंडिंग, मैन्युफैक्चरिंग और ट्रेडिंग हब बन चुका है।”
अब वही मुद्दा मेवानी ने और तीखे तरीके से उठाया है। उन्होंने अदाणी समूह, मुंद्रा पोर्ट और गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मेवानी ने आपातकालीन विधानसभा सत्र बुलाने, व्हाइट पेपर जारी करने और अदाणी की गिरफ्तारी की मांग की है।
जब कॉंग्रेस की जन आक्रोश यात्रा थराड पहुंची तो महिलाओं द्वारा ड्रग्स और शराब की समस्या को कॉंग्रेस नेताओं के सामने रखा गया और बताया कैसे महिलाएं ड्रग्स के कारण विधवा हो रही है महिलाओं की पीड़ा सुनने के बाद मेवानी महिलाओं के साथ एसपी कार्यालय पहुंच गए।
मेवानी ने पुलिस के उच्च अधिकारियों के सामने कहा था “अगर जिले में ड्रग्स और दारू का कारोबार नहीं रुका तो पट्टा और बेल्ट तुम्हारा उतरेगा— मेरा नहीं… मेरा नाम जिग्नेश मेवानी है, पीछे पड़ा तो पूरी अकड़ निकाल दूँगा।”
मेवानी ने गुजराती भाषा में कहा था कि छोतरा काढ़ी नाखीश जो विवाद खड़ा हुआ है वह शब्द छोतरा और बेल्ट है छोतरा का अर्थ होता है अकड़। इसके बाद गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी ने इसे अमर्यादित भाषा बताते हुए कहा: “डिग्रियां ले लीं लेकिन डिग्रियों के साथ संस्कार नहीं मिले।”
हर्ष संघवी के शाब्दिक वार को पुलिस को उकसाने वाला क़दम बताया गया जिसके बाद पुलिसकर्मियों के परिजनों ने मेवानी के विरोध में रैली की और जन आक्रोश यात्रा को बाधित करने का प्रयास भी किया गया सरकार और पुलिस के इस क़दम के विरोध में जनता और कॉंग्रेस ने अगले ही दिन उससे कई गुना बड़ी रैली कर दी जिसके बाद पुलिस और सरकार को मेवानी का विरोध छोड़कर पीछे हटना पड़ाl
मार्च में गुजरात में अहमदाबाद महानगरपालिका सहित अन्य महानगरों के और जिला पंचायत चुनाव होने हैं। ड्रग्स मुद्दे पर मेवानी की आक्रामकता और जनता का खुला समर्थन भाजपा के लिए खतरे की घंटी माना जा रहा है।





