अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

*मिशन चंद्रयान-2 ने सूर्य के बारे में किया चौंकाने वाला खुलासा*

Share

भारत के चंद्र मिशन चंद्रयान-2 ने एक बार फिर इतिहास रचा है। इसरो ने बताया है कि चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर ने सूर्य के प्रभाव से चांद के वायुमंडल में हुए बदलावों का पता लगाया है। 18 अक्तूबर को इसरो ने यह जानकारी साझा की

भारत के चंद्र मिशन चंद्रयान-2 ने एक बार फिर इतिहास रचा है। इसरो ने बताया है कि चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर ने सूर्य के प्रभाव से चांद के वायुमंडल में हुए बदलावों का पता लगाया है। 18 अक्तूबर को इसरो ने यह जानकारी साझा की और बताया कि इस खोज से चंद्रमा के बाहरी वातावरण, अंतरिक्ष मौसम और सतह पर होने वाले बदलावों को बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा।

सूर्य के तूफान का असर

इसरो ने बताया कि चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर पर लगे उपकरण CHACE-2 (चेस-2) ने एक बड़ी और पहली बार देखी गई घटना दर्ज की है। सूर्य से निकले कोरोनल मास इजेक्शन (CME) यानी सूर्य के बड़े विस्फोटों से निकली ऊर्जा और कणों ने चंद्रमा के बेहद पतले वायुमंडल (एक्सोस्फीयर) पर सीधा असर डाला, जब यह सौर तूफान चांद तक पहुंचा, तो चंद्रमा के दिन के समय के वायुमंडल का दबाव अचानक बढ़ गया। चंद्रयान-2 ने रिकॉर्ड किया कि उस समय वातावरण में परमाणुओं और अणुओं की मात्रा 10 गुना से भी अधिक बढ़ गई थी। इस तरह का सीधा अवलोकन करने वाला चंद्रयान-2 दुनिया का पहला मिशन बन गया है।

कब हुई थी यह घटना ?

यह घटना 10 मई 2024 को हुई थी। उस दिन सूर्य ने लगातार कई बार CME फेंके थे। क्योंकि चंद्रमा के पास न तो पृथ्वी जैसा चुंबकीय क्षेत्र है और न ही सघन वायुमंडल, इसलिए सूर्य से निकले आवेशित कण सीधे उसकी सतह से टकराए। इस टक्कर से चांद की सतह से बड़ी संख्या में परमाणु और अणु उछलकर उसके बाह्यमंडल में चले गए, जिससे उसका वातावरण अस्थायी रूप से फूल गया।

CME क्या होता है?

कोरोनल मास इजेक्शन (CME) सूर्य की सतह से होने वाला एक विशाल विस्फोट है, जिसमें भारी मात्रा में ऊर्जा, हाइड्रोजन और हीलियम के कण अंतरिक्ष में निकलते हैं, जब ये कण किसी ग्रह या उपग्रह से टकराते हैं, तो वे उसके वायुमंडल और सतह पर गहरा असर डालते हैं। क्योंकि चंद्रमा के पास सुरक्षा के लिए न तो हवा है और न ही चुंबकीय ढाल, इसलिए सौर तूफानों का प्रभाव वहां ज्यादा स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। इस अवलोकन से वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिलेगी कि सौर गतिविधियों का चांद की सतह और वायुमंडल पर क्या असर पड़ता है।

चंद्रयान-2 का सफर और उपलब्धि

चंद्रयान-2 मिशन को 22 जुलाई 2019 को श्रीहरिकोटा से GSLV-MkIII-M1 रॉकेट के जरिए लॉन्च किया गया था। यह मिशन 8 वैज्ञानिक उपकरणों के साथ भेजा गया था और 20 अगस्त 2019 को सफलतापूर्वक चंद्रमा की कक्षा में पहुंचा। हालांकि 7 सितंबर 2019 को विक्रम लैंडर से संपर्क टूट गया था, लेकिन ऑर्बिटर अब भी 100 किलोमीटर की ऊंचाई से चंद्रमा की परिक्रमा कर रहा है और लगातार वैज्ञानिक डेटा भेज रहा है।

भविष्य के लिए अहम खोज

इसरो ने कहा कि यह खोज न केवल वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि भविष्य में चांद पर बनने वाले मानव बेस या कॉलोनी के लिए भी चेतावनी है। अगर भविष्य में चंद्रमा पर मानव मिशन या स्थायी ठिकाने बनाए जाएंगे, तो वैज्ञानिकों को ऐसे सौर तूफानों और उनके प्रभावों को ध्यान में रखना होगा।

Ramswaroop Mantri

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें