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दुलारचंद यादव की हत्या:जहां भी गुंडे, मवाली, अपराधी, लुटेरे, डकैत, लफंदड़, उचक्के हों, उन सबको हराएं….लोकतंत्र को बचाएं

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नीतीश का क्राइम, करप्शन और कम्युनलिज्म का नारा तो अनंत सिंह के साथ चलता है ,सवर्ण वर्चस्व को चुनौती देने वाले बहुजन नायकों का खून भी उस क्षेत्र में कम नहीं बहा

मोकामा में गुरुवार यानी 30 अक्टूबर को दोपहर में 76 वर्षीय स्थानीय नेता दुलारचंद यादव की गोली मारकर हत्या कर दी गई। दुलारचंद यादव जनसुराज कैंडिडेट पीयूष प्रियदर्शी के साथ चुनाव प्रचार के काफिले में शामिल थे। जनसुराज समर्थक दुलारचंद यादव की हत्या के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई है। शव यात्रा के दौरान गोलीबारी और पत्थरबाजी की खबर सामने आई है।

दुलारचंद के परिवार ने बाहुबली और एनडीए प्रत्याशी अनंत सिंह पर हत्या का आरोप लगाया है। अनंत सिंह पर गंभीर धाराओं के 38 मुकदमे दर्ज हैं, जिसमें सात हत्या और 11 अपहरण के मुकदमे हैं। पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर लिया है और मोकामा के तारतार गांव में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।

पटना एसएसपी कार्तिकेय शर्मा इस पूरी घटना पर बताते हैं कि,”पुलिस की ओर से भी एफआईआर की गई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मामला क्लियर हो पाएगा। इस मामले में 3 एफआईआर दर्ज की गई है। पत्थरबाजी में शामिल कुछ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। फिलहाल छापेमारी चल रही है। बिना साक्ष्य के किसी पर कार्रवाई नहीं होगी।”

सवर्ण वर्चस्व को चुनौती देने वाले बहुजन नायकों का खून भी उस क्षेत्र में कम नहीं बहा

समाजिक कार्यकर्ता महेंद्र सुमन बताते हैं कि, “मोकामा के टाल क्षेत्र में जितना पानी जमा है, सवर्ण वर्चस्व को चुनौती देने वाले बहुजन नायकों का खून भी उस क्षेत्र में कम नहीं बहा है। दुलारचंद के खून ने उस पानी को और रक्ताभ, चमकीला कर दिया है।

दुलारचंद अपने नाम के अनुरूप सचमुच में उस क्षेत्र के दुलारे थे। वे टाल क्षेत्र की बगाबत के सबसे बेखौफ, फक्कड़ स्वर थे। उन्हें महज सामाजिक कार्यकर्ता कहना उनके कद को छोटा करना होगा। वास्तव में, वे चौहरमल की परम्परा के टाल क्षेत्र के बागी थे, ठीक उसी तरह जैसे चम्बल के बीहड़ों की रानी फूलन देवी और कैमूर की पहाड़ियों के मोहन बिंद।”

बहुजन लेखक क्रांति कुमार बताते हैं कि,” राजधानी पटना से 93 किलोमीटर दूर मोकामा में संविधान और कानून का राज नहीं चलता। यहां छोटे सरकार अनंत सिंह का राज चलता है. अनंत सिंह के सर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का हाथ है।”

“अनंत सिंह को सरकार की तरफ से 4 पुलिस गनर मिले हैं, उसकी निजी सुरक्षा में 8 या 12 आदमी एके-47 से लैस होकर चलते हैं। ऐसा आरोप मृतक दुलारचंद यादव के पोते ने लगाया है। मोकामा में सभी दल के नेताओं की गाड़ी चेक होती है, लेकिन अनंत सिंह की गाड़ियों का काफिला पुलिस कभी नहीं चेक करती है।” आगे वह बताते हैं।

वाकई बिहार में हुई दुलारचंद यादव की हत्या एक बड़ा अलार्म है। पिछले बीस सालों में बिहार में कुछ भी नहीं बदला। हर दूसरे दिन कहीं ना कहीं बंदूक़ चल जाती है।

अनंत की पत्नी को नाचने वाली बताया था

दुलारचंद यादव ने मर्डर से 2 दिन पहले मीडिया से बात करते हुए कहा था कि,”अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी नहीं नीलम खातून है। लोकसभा चुनाव जब नीलम देवी लड़ रही थीं तो लोग दरी लेकर दौड़ रहे थे और कह रहे थे कि नाचने वाली आई है। नीलम देवी नाचने के लिए गई थी, अनंत सिंह ने उसे रख लिया। दोनों की कोई शादी हुई थी। नीलम देवी भूमिहार थोड़े ही है।”

वहीं अनंत सिंह हत्या के आरोप पर कहा है कि यह सब सूरजभान का किया धरा है। सूरजभान सिंह की पत्नी मोकामा से राजद की प्रत्याशी हैं। सूरजभान और उनकी पत्नी वीणा देवी ने कहा कि हमारा इस घटना से कोई लेना-देना नहीं है। दुलारचंद यादव मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद के करीबी रहे हैं। दुलारचंद पर हत्या, रंगदारी, फिरौती के 2 दर्जन मामले दर्ज थे। टाल के इलाके में 80 के दशक में उनका काफी दबदबा था।

इस मौत का प्रभाव आसपास के कई क्षेत्रों फतुहा , बख्तियारपुर, बाढ़ , मोकामा, लखीसराय, सूर्यगढ़ा के साथ-साथ बेगूसराय और बरबीघा इत्यादि क्षेत्रों में पड़ सकता है। जनता की गोलबंदी एनडीए के खिलाफ महागठबंधन या जनसुराज दोनों तरफ जा सकती है।

नीतीश का क्राइम, करप्शन और कम्युनलिज्म का नारा तो अनंत सिंह के साथ चलता है 

वरिष्ठ पत्रकार पुष्यमित्र लिखते हैं कि,”इस मुद्दाविहीन चुनाव में कहीं अंदरखाने में अपराध और दबंगई दहक ही रही थी। चुनाव के पहले कई अपराधियों को जेल से बाहर निकाला गया। टिकट देने में दोनों धड़ों ने अपराधियों से परहेज नहीं किया। संकोच तक नहीं किया।

मोकामा में जो हत्या हुई उसकी पृष्ठभूमि तो दोनों पक्षों ने तैयार करके रखी ही थी। सीवान के रघुनाथपुर से जो पत्रकार साथी अनुभव लेकर आ रहे हैं, वे बहुत अच्छे नहीं हैं। पूरे पांच साल तक हमारे नेता अपराध के खिलाफ वेद वचन कहते हैं। तेजस्वी ने तो इसी मोकामा में कलम बांटा था। नीतीश का क्राइम, करप्शन और कम्युनलिज्म का नारा तो अनंत सिंह के साथ चलता ही है। किसी को अपराधियों से परहेज नहीं है। इसलिए सलेक्टिव विरोध का भी कोई मतलब नहीं है।

आगे वह लिखते हैं, “हमारे राजनीतिक दलों में अभी वह हौसला पैदा नहीं हुआ है कि वह बिना अपराधियों के चुनाव लड़ने की सोच सकें। सोचिए तो दुलारचंद यादव जन सुराज प्रत्याशी के साथ घूम रहे थे। उनके समर्थन में अभियान चला रहे थे। फिर अपराधियों से परहेज भला किसको है?”

राजद के राष्ट्रीय प्रवक्ता जयंत जिज्ञासु बताते हैं कि,” जहां भी गुंडे, मवाली, अपराधी, लुटेरे, डकैत, लफंदड़, उचक्के हों, उन सबको हराएं। लोकतंत्र को बचाएं, अगर सचमुच इंसानियत से कोई वास्ता रह गया हो! जीना हराम करके रख दिया है इन लीचड़ों ने कमज़ोर लोगों का! जिन लोगों ने इन सबका भरण-पोषण किया है, वे सबके सब इस पाप के भागी हैं।”

इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर खुल कर बोला जा रहा है कि ये जंगलराज है या नहीं? एनडीए के उम्मीदवार पर सवाल उठाएगा मीडिया या ओसामा-ओसामा ही करता रह जाएगा?

Ramswaroop Mantri

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