नर्मदा बचाओ आंदोलन द्वारा राजघाट के निकट नर्मदा किनारे “बहती, डूबती, लड़ती नर्मदा” प्रदर्शनी का नर्मदा घाटी के किसान, आदिवासी, मछुआरों की उपस्थिति में सुश्री मेधा पाटकर द्वारा शुभारंभ किया गया । प्रदर्शनी नर्मदा जयंती यानी 19 फरवरी की जारी रहेगी।
प्रदर्शनी का उदघाटन करते हुए सुश्री मेधा पाटकर ने कहा कि प्रकृति के संकेतों को समझने और उसके अनुसार विकास नीति में बदलाव की जरूरत है, अन्यथा मानव सभ्यता के इतिहास में एक बहुत बड़ी त्रासदी की आशंका है। 2013 की केदारनाथ त्रासदी ने हमें एक संकेत दिया था लेकिन हमने उससे कुछ सबक नहीं सीखा। परिणामस्वरूप बहुत जल्दी हमें चमोली में फिर से दूसरा अप्रत्याशित हादसा देखना पड़ा। सरदार सरोवर बांध से नर्मदा घाटी में क्या क्या दुष्परिणाम होंगे इसकी अभी कल्पना भी नहीं की जा सकती।
प्रदर्शनी में वरिष्ठ कलाकार श्री रत्नाकर मतकरी के अलावा श्री राजू सुतार सुश्री वैशाली ओक, सुश्री कृतिका परमार, श्री समीर गोराडे, श्री राजेश कुलकर्णी, श्री संजय भोसले, सुश्री शिल्पा भल्लाल, सुश्री सुमित्रा भावे आदि कलाकारों के छायाचित्रों और पेंटिंग का प्रदर्शन किया गया है जिनमें सरदार सरोवर बांध के कारण नर्मदा नदी और नर्मदा घाटी के जंगल, जमीन, पहाड़ और भरे-पूरे गांवों में हुए विनाश का सजीव चित्रण है। इस अवसर पर अपने संदेश में कलाकार श्री राजू सुतार ने बिना उचित पुनर्वास के लोगों को दबाने को क्रूरतापूर्ण तथा वेदनादायक बताया। उन्होंने आंदोलन से जुड़ी प्रभावित महिलाओं को आंदोलन की ताकत बताया।
कार्यक्रम के दौरान सेंचुरी सत्याग्रह के श्री नवीन मिश्रा और साथियों ने नर्मदा के भजन और संघर्ष गीत गाए। सभा को जगदीश पटेल, श्यामा मछुआरा, कमला यादव, देवराम कनेरा आदि ने भी संबोधित किया
नर्मदा बचाओ आंदोलन द्वारा बहती, डूबती, लड़ती नर्मदा प्रदर्शनी का आयोजन





