भारत एक लोकतांत्रिक देश है जहाँ हर किसी को अपने व्यक्तिगत जीवन के विषय में निर्णय लेने का अधिकार है। भारत में कानून का सहारा लेने के बजाय जागरूकता अभियान, शिक्षा के स्तर को बढ़ाकर तथा गरीबी को समाप्त करने जैसे उपाय करके जनसंख्या नियंत्रण के लिये प्रयास होने चाहिये।
परिवार नियोजन से जुड़े परिवारों को आर्थिक प्रोत्साहन दिया जाना चाहिये तथा ऐसे परिवार जिन्होंने परिवार नियोजन को नहीं अपनाया है उन्हें विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से परिवार नियोजन हेतु प्रेरित करना चाहिये। बेहतर तो यह होगा कि शादी की उम्र बढ़ाई जाए, स्त्री-शिक्षा को अधिक आकर्षक बनाया जाए, परिवार-नियंत्रण के साधनों को मुफ्त में वितरित किया जाए, संयम को महिमा-मंडित किया जाए और छोटे परिवारों के लाभों को प्रचारित किया जाए। शारीरिक और बौद्धिक श्रम के फासलों को कम किया जाए। जनसंख्या दिवस पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने बिल्कुल सही कहा है कि जनसंख्या स्थिरीकरण के प्रयासों से सभी मत, मजहब, वर्ग को समान रूप से जोड़ा जाना चाहिए। अनियंत्रित जनसंख्या भी अघोषित आतंकवाद एवं जिहादी मानसिकता ही है, यह राष्ट्र की प्रगति एवं संसाधनों को जड़ करने एवं बांधने का जरिया है।
विशेषकर कोरोना संकट के बाद से देश के हालत हर तरह से बहुत जटिल एवं अनियंत्रित हुए है। सभी संसाधन कम पड़ते गए हैं और अचानक देश में एक संकट खड़ा हो गया है। बेचारी पहले से दुखी गरीब जनता ज्यादा परेशानी में है। जनसंख्या वृद्धि एक नयी चुनौती बनकर हमारे सामने आई और आज भी इस पर काबू पाने में सरकार को कठिनाई हो रही है। जनसंख्या वृद्धि के दुष्परिणाम देश को भोगने पड़ रहे हैं। अधिक जनसंख्या के कारण बेरोजगारी की विकराल समस्या उत्पन्न हो गयी है। लोगों के आवास के लिए कृषि योग्य भूमि और जंगलों को उजाड़ा जा रहा है। यदि जनसंख्या विस्फोट यूं ही होता रहा तो लोगों के समक्ष रोटी, कपड़ा, मकान और पर्यावरण की विकराल स्थिति उत्पन्न हो जाएगी। इससे बचने का एक मात्र उपाय यही है की हम येन केन प्रकारेण बढ़ती आबादी को रोकें। इसके लिये चीन के द्वारा अपनायी गयी जनसंख्या नियंत्रण नीति पर भी ध्यान देना चाहिए। अन्यथा विकास का स्थान विनाश को लेते अधिक देर नहीं लगेगी। सरकार को इस विशेष अवसर पर सबकी सहमति से जनसंख्या नियंत्रण पर कानून का निर्धारण करना चाहिए।
Add comment