अब अंबुजा, एसीसी, पेन्ना और ओरिएंट सीमेंट इन सभी कंपनियों को मिलाकर एक बनाने की रणनीति
अडानी समूह ने देश के तमाम सेक्टर के बिजनेस में खुद को साबित किया है, जिसमें सबसे नया और सबसे तेजी से बढ़ने वाला सीमेंट उद्योग भी है. अडानी समूह ने अपनी आक्रामक रणनीति और सही फैसलों से महज 3 साल में ही देश के सीमेंट बाजार को बदलकर रख दिया है. कंपनी ने अब खुद को सीमेंट बाजार का बादशाह बनाने की तैयारियों पर काम शुरू कर दिया है. अभी अडानी समूह का सीमेंट कारोबार देश में अल्ट्राटेक के बाद दूसरे नंबर पर आता है. अडानी समूह ने खुद को नंबर 1 की पोजीशन पर लाने के लिए अपनी तीनों कंपनियों को एकसाथ मिलाने की रणनीति बनाई है.अडानी समूह ने अपने सीमेंट बिजनेस की सभी कंपनियों को मिलाकर एक ही ब्रांड तले लाने की बात कही है. इससे बाजार में कारोबार बढ़ाने और अल्ट्राटेक से मुकाबला करने में मदद मिलेगी. इस विलय से कंपनी का मुनाफा भी बढ़ेगा.

अभी भारतीय सीमेंट बाजार में अल्ट्राटेक की हिस्सेदारी 26 फीसदी के आसपास है, जिसकी सालाना क्षमता 20 करोड़ टन के करीब है. वहीं, दूसरे नंबर पर काबिज अडानी समूह की बात करें उसके पास कुल बाजार हिस्सेदारी का 14.3 फीसदी मार्केट है. अडानी समूह के पास 4 सीमेंट कंपनियां हैं. अंबुजा, एसीसी, पेन्ना और ओरिएंट सीमेंट. अब समूह ने इन सभी कंपनियों को मिलाकर एक बनाने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है. इस समूह की सालाना उत्पादन क्षमता करीब 12 करोड़ टन के आसपास है.
कितना बड़ा हो जाएगा कारोबार
अडानी समूह ने ऐलान किया है कि वह सभी कंपनियों को मिलाकर एक कंपनी बनाएगा, जिसका नाम अंबुजा सीमेंट होगा और उसका कुल बिजनेस बढ़कर 35 हजार करोड़ रुपये का हो जाएगा. कंपनियों के विलय से लागत को घटाने में मदद मिलेगी और देशभर में इसका विस्तार एक ही नाम से किया जा सकेगा. इस फैसले से कंपनी को अल्ट्राटेक से मुकाबला करने में आसानी होगी.
तीन साल में बदल दिया कारोबार
अडानी समूह ने साल 2022 में ही सीमेंट बाजार में एंट्री की थी. इसके लिए कंपनी ने ग्लोबल सीमेंट कंपनी होल्सिम ग्रुप से अंबुजा और एसीसी को खरीदकर अपने सीमेंट बिजनेस की शुरुआत की. इतने छोटे से अंतराल में ही अडानी समूह ने एक के बाद एक कंपनियों को खरीदकर आज देश का दूसरा सबसे बड़ा बिजनेस खड़ा कर दिया. एसीसी सीमेंट में अंबुजा की करीब 50 फीसदी हिस्सेदारी है और इस कंपनी में अडानी समूह का कुछ हिस्सा सीधे तौर पर भी आता है. अडानी समूह ने पहले गुजरात की सिंघही इंडस्ट्रीज को खरीदा, फिर दक्षिण की सीमेंट कंपनी पेन्ना को खरीदा और सीके बिड़ला समूह की ओरिएंट कंपनी को भी खरीद लिया. ओरिएंट सीमेंट में अंबुजा की 73 फीसदी हिस्सेदारी है, जो तेलंगाना ओर आंध्र प्रदेश के साथ तमिलनाडु में भी मजबूत पहुंच रखती है. कंपनी फिलहाल बाजार नियामक से सिंघही और पेन्ना के मर्जर को लेकर भी अनुमति मांगी है.
विलय से प्रति टन 100 रुपये बढ़ेगी कमाई
अंबुजा सीमेंट की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, तीनों कंपनियों को मिलाकर एक बनाने से विनिर्माण और लॉजिस्टिक्स की लागत को भी घटाया जा सकेगा. इससे कंपनी के रणनीतिक लक्ष्यों को पाना आसान होगा तो रिसोर्सेज को अप्लाई करने में भी तेजी आएगी. कंपनी का यह भी मानना है कि विलय के बाद उसका मार्जिन भी बढ़ जाएगा. अनुमान तो यहां तक लगाया है कि इससे अडानी समूह को प्रति टन करीब 100 रुपये का फायदा और बढ़ जाएगा. ब्रांडिंग, सेल्स और प्रमोशन सभी आसानी से हो सकेगा. बाजार में अपने प्रोडक्ट का विस्तार करने से लेकर उसकी मार्केटिंग तक सभी क्षेत्र में कंपनी आसानी से फैसले लागू कर सकेगी.
अभी कितनी है उत्पादन क्षमता
अडानी समूह के सीमेंट बिजनेस की क्षमता अभी करीब 10.7 करोड़ टन सालाना है, जिसमें से 5.76 करोड़ टन सिर्फ अंबुजा का उत्पादन होता है. एसीसी की उत्पादन क्षमता 4.04 करोड़ टन, जबकि ओरिएंट सीमेंट की क्षमता 85 लाख टन सालाना है. अडानी समूह के पास अभी 24 इंटीग्रेटेड यूनिट हैं. इसके अलावा 22 ग्राइंडिंग यूनिट और 116 रेडी मिक्स कंक्रीट प्लांट शामिल हैं. कंपनी का प्लान है कि साल 2026 तक मर्जर को पूरा करने के बाद 2028 तक कुल उत्पादन क्षमता बढ़ाकर 14 करोड़ टन तक पहुंचाया जाएगा. दूसरी ओर अल्ट्राटेक की क्षमता 18.3 करोड़ टन सालाना रही है और कंपनी ने हाल में 10 हजार करोड़ के निवेश का ऐलान किया है, जिससे कुल क्षमता 24 करोड़ टन से ज्यादा हो जाएगी. कंपनी का कहना है कि इस लक्ष्य को साल 2028 तक प्राप्त कर लिया जाएगा. अल्ट्राटेक और उसकी सब्सिडियरी इंडिया सीमेंट ने मिलकर इस लक्ष्य को प्राप्त करने की रणनीति बनाई है.





