एस पी मित्तल, अजमेर
पूर्व डिप्टी सीएम और छह वर्ष तक राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे सचिन पायलट ने भी अब कह दिया है कि राजस्थान में अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार रिपीट होगी। एक बार भाजपा और एक बार कांग्रेस वाली तीस वर्ष की परंपरा इस बार टूट जाएगी। पायलट ने यह बात तब कही है, जब विधानसभा चुनाव में डेढ़ वर्ष रहा है। पायलट का यह ताजा बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि अब तक पायलट यह कहते रहे कि हमें उन कारणों पता लगाना चाहिए, जिसमें कांग्रेस सत्ता में रहने पर हार जाती है। पायलट खुद गिनाते रहे कि अशोक गहलोत के मुख्यमंत्री रहते कांग्रेस को 2003 में 56 तथा 2013 में मात्र 21 सीटें मिली। 2018 में गहलोत सरकार में डिप्टी सीएम बनने के बाद पायलट अपने बयान को दोहराते रहे। हालांकि 2020 में बगावती तेवरों के कारण पायलट से डिप्टी सीएम और प्रदेशाध्यक्ष का पद छीन लिया गया। 10 जून को राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद उत्साहित पायलट ने कहा कि अब अगले वर्ष प्रदेश में कांग्रेस सरकार ही बनेगी। यानी पायलट अब तक जो सवाल उठा रहे थे, उन पर विराम लग गया है। पायलट के इस बयान से सीएम गहलोत के समर्थक बेहद खुश हैं। समर्थको को लगता है कि अब गहलोत और पायलट के बीच विवाद समाप्त हो गया है। लेकिन सवाल उठता है कि कांग्रेस सरकार को रिपीट करवाने में सचिन पायलट की क्या भूमिका होगी? पायलट मौजूदा समय में सिर्फ एक विधायक की भूमिका में है। जुलाई 2020 में जो पद छीने गए, उनमें से एक भी पद पायलट को वापस नहीं मिला है। पद छीन जाने के बाद पिछले दो वर्ष में पायलट हमेशा गहलोत सरकार के साथ खड़े रहे। चाहे विधानसभा के उपचुनाव हों या फिर हाल ही के राज्यसभा चुनाव। पायलट ने पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ गहलोत सरकार के पक्ष में भूमिका निभाई है। न केवल सकारात्मक भूमिका निभाई, बल्कि केंद्र की भाजपा सरकार को कोसने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी। पायलट ने निकम्मा नकारा, धोखेबाज जैसे शब्दों के जख्म भी सहे। गहलोत सरकार के रिपीट होने की बात पायलट ने किस नजरिए से कही है, यह आने वाले दिनों में पता चलेगा। अलबत्ता राज्यसभा चुनाव के मद्देनजर गहलोत ने गांधी परिवार में अपने नंबर बढ़ाए है तो पायलट ने भी सोनिया गांधी और राहुल गांधी का भरोसा जीता है। जानकारों की मानें तो विधानसभा चुनाव से पहले पायलट नई भूमिका में सामने आएंगे।





